Homeरांची न्यूज़MGM अस्पताल में एक्सपायर्ड दवा देने का आरोप, किशोर की बिगड़ी हालत...

MGM अस्पताल में एक्सपायर्ड दवा देने का आरोप, किशोर की बिगड़ी हालत ने खड़े किए कई सवाल | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

- Advertisement -spot_img

MGM अस्पताल एक्सपायर्ड दवा मामला : पूर्वी सिंहभूम जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल MGM मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। अस्पताल में इलाज करा रहे एक किशोर को कथित तौर पर एक्सपायर्ड दवा दिए जाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। इस घटना ने न केवल अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में दवा प्रबंधन और मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

घटना के बाद मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल से मिली दवा के सेवन के बाद किशोर की तबीयत अचानक खराब हो गई। जब दवा की जांच की गई तो उसके एक्सपायर्ड होने की बात सामने आई। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, किशोर का इलाज MGM अस्पताल में चल रहा था। उपचार के दौरान उसे अस्पताल के स्टोर अथवा दवा वितरण केंद्र से दवा उपलब्ध कराई गई। परिजनों का आरोप है कि दवा देने से पहले उसकी वैधता और एक्सपायरी डेट की जांच नहीं की गई।

दवा सेवन के कुछ समय बाद मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद परिजनों ने डॉक्टरों से संपर्क किया और दवा की पैकिंग की जांच की। आरोप है कि इसी दौरान पता चला कि दवा की एक्सपायरी डेट समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल

इस घटना ने अस्पताल की दवा वितरण प्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अस्पताल में मरीजों को दी जाने वाली दवाओं की नियमित निगरानी और गुणवत्ता जांच अनिवार्य होती है।

यदि वास्तव में मरीज को एक्सपायर्ड दवा दी गई है, तो यह केवल एक कर्मचारी की गलती नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी। अस्पतालों में दवा स्टॉक का रिकॉर्ड, एक्सपायरी डेट की निगरानी और समय पर नष्ट करने की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है।

स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार एक्सपायर्ड दवाओं को अलग रखा जाता है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनका निपटान किया जाता है। ऐसे में मरीज तक ऐसी दवा पहुंचना कई स्तरों पर हुई चूक की ओर संकेत करता है।

एक्सपायर्ड दवा कितनी खतरनाक?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार एक्सपायर्ड दवा का प्रभाव सामान्य दवा की तुलना में कम हो सकता है। कुछ मामलों में ऐसी दवाएं मरीज के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकती हैं।

हालांकि सभी एक्सपायर्ड दवाएं नुकसानदायक नहीं होतीं, लेकिन मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार उनकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता की गारंटी समाप्त हो जाती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य संस्थानों में एक्सपायर्ड दवा का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित माना जाता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चों और किशोरों के मामले में अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी होता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और शारीरिक प्रतिक्रिया वयस्कों से अलग हो सकती है।

परिजनों में आक्रोश

घटना के बाद मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते मामले पर ध्यान नहीं दिया जाता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

परिजनों ने मांग की है कि यह पता लगाया जाए कि एक्सपायर्ड दवा अस्पताल के स्टॉक में कैसे मौजूद थी और मरीज तक कैसे पहुंची। साथ ही उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।

इस घटना के बाद अस्पताल में इलाज करा रहे अन्य मरीजों और उनके परिजनों के बीच भी चिंता का माहौल देखने को मिला। कई लोगों ने दवा वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चेतावनी

MGM अस्पताल में सामने आया यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है। यह पूरे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक चेतावनी की तरह है।

झारखंड के कई सरकारी अस्पतालों में दवा प्रबंधन, स्टॉक रखरखाव और निगरानी को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अस्पतालों में आधुनिक डिजिटल इन्वेंट्री सिस्टम लागू किए जाएं तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

डिजिटल सिस्टम के माध्यम से किसी भी दवा की एक्सपायरी डेट, उपलब्ध स्टॉक और वितरण का रिकॉर्ड आसानी से रखा जा सकता है। इससे दवा समाप्त होने से पहले ही अलर्ट जारी हो सकता है और मरीजों को सुरक्षित दवा उपलब्ध कराई जा सकती है।

जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल अस्पताल प्रशासन पूरे मामले की जांच कराने की बात कह रहा है। जांच में यह स्पष्ट होगा कि मरीज को वास्तव में एक्सपायर्ड दवा दी गई थी या नहीं। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि यदि दवा एक्सपायर्ड थी तो वह अस्पताल के स्टॉक में कैसे बनी रही।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नजर भी इस मामले पर बनी हुई है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

किसी भी स्वास्थ्य संस्थान की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करना है। दवा वितरण में हुई छोटी सी लापरवाही भी मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में नियमित ऑडिट, स्टॉक वेरिफिकेशन, फार्मेसी निरीक्षण और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। इससे न केवल मरीजों का भरोसा बढ़ेगा बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

निष्कर्ष

जमशेदपुर के MGM अस्पताल में कथित एक्सपायर्ड दवा दिए जाने के बाद किशोर की हालत बिगड़ने का मामला स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। यह घटना मरीजों की सुरक्षा, दवा प्रबंधन और अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही पर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि मामले में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img
Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
- Advertisement -spot_img
Related News
- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here