शिबू सोरेन को भारत रत्न : झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की मांग की है। धनबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन ने अपना संपूर्ण जीवन आदिवासियों, गरीबों, किसानों और वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए संघर्ष में समर्पित कर दिया। ऐसे महान जननायक को भारत रत्न देकर सम्मानित करना पूरे झारखंड और देश के लिए गर्व की बात होगी।
शिबू सोरेन के योगदान को बताया ऐतिहासिक
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि शिबू सोरेन केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान और अस्मिता के प्रतीक हैं। उन्होंने अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए लंबा संघर्ष किया और आदिवासी समाज की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। उनके प्रयासों के कारण ही झारखंड आंदोलन को नई दिशा मिली और अंततः वर्ष 2000 में झारखंड राज्य का गठन संभव हो सका।
उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, त्याग और जनसेवा की मिसाल है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए उन्होंने लगातार आंदोलन किए और आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी। यही कारण है कि आज भी लाखों लोग उन्हें सम्मानपूर्वक ‘दिशोम गुरु’ के नाम से जानते हैं।
भारत रत्न देने की मांग तेज
इरफान अंसारी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि शिबू सोरेन के योगदान को देखते हुए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं होगा, बल्कि झारखंड आंदोलन और आदिवासी समाज के संघर्षों का सम्मान भी होगा।
हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग उठाई है। झारखंड में इस मांग को लेकर लगातार जनसमर्थन बढ़ता जा रहा है।
झारखंड आंदोलन में निभाई अहम भूमिका
झारखंड राज्य के निर्माण का इतिहास शिबू सोरेन के संघर्षों के बिना अधूरा माना जाता है। उन्होंने झारखंड के लोगों को संगठित कर अलग राज्य की मांग को मजबूती प्रदान की। कोयला, खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र होने के बावजूद विकास से वंचित आदिवासी और स्थानीय समुदायों की समस्याओं को उन्होंने राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
झारखंड आंदोलन के दौरान शिबू सोरेन ने हजारों कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर आंदोलन को जनांदोलन का स्वरूप दिया। उनके नेतृत्व में कई बड़े आंदोलन हुए, जिन्होंने केंद्र सरकार का ध्यान झारखंड की ओर आकर्षित किया।
आदिवासी समाज की आवाज रहे शिबू सोरेन
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि शिबू सोरेन ने हमेशा आदिवासी समाज के हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दों को मजबूती से उठाया। उनके प्रयासों का परिणाम है कि आज झारखंड की पहचान देशभर में एक अलग राज्य के रूप में स्थापित है।
इरफान अंसारी ने कहा कि शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने हमेशा जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझा और समाधान के लिए संघर्ष किया।
धनबाद में भी दिखा समर्थन
धनबाद सहित राज्य के कई जिलों में शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग को लेकर लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों का मानना है कि झारखंड के विकास और राज्य निर्माण में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान मिलना चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिबू सोरेन ने झारखंड की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया और राज्य के लोगों के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाई। इसलिए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करना उचित होगा।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
स्वास्थ्य मंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। कई नेताओं ने भी शिबू सोरेन के योगदान को याद करते हुए उनके सम्मान में भारत रत्न देने की मांग का समर्थन किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और अधिक जोर पकड़ सकता है।
निष्कर्ष
धनबाद में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी द्वारा शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग ने झारखंड की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। झारखंड आंदोलन, आदिवासी अधिकारों की लड़ाई और राज्य निर्माण में उनके योगदान को देखते हुए यह मांग लगातार मजबूत होती जा रही है। अब निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि वह इस मांग पर क्या निर्णय लेती है। फिलहाल झारखंड के विभिन्न वर्गों में यह भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है कि ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए।







