Homeरांची न्यूज़रांची गैंगरेप केस: दोषी को उम्रकैद, पॉक्सो कोर्ट ने लगाया 50 हजार...

रांची गैंगरेप केस: दोषी को उम्रकैद, पॉक्सो कोर्ट ने लगाया 50 हजार का जुर्माना | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

- Advertisement -spot_img

रांची गैंगरेप केस : झारखंड की राजधानी रांची की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के एक बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी सुशील उरांव को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाने के साथ-साथ 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत का यह फैसला बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर सख्त न्यायिक रुख को दर्शाता है और समाज में यह संदेश देता है कि ऐसे अपराधों के दोषियों के प्रति कानून किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा।

यह मामला वर्ष 2024 में रांची जिले के मांडर थाना क्षेत्र में हुई एक दर्दनाक घटना से जुड़ा है। लंबी सुनवाई, गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोषी को कठोर सजा सुनाई।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, 17 अप्रैल 2024 को चान्हो थाना क्षेत्र के हूंटार गांव की दो नाबालिग मौसेरी बहनें स्थानीय मेले में गई थीं। उनके साथ दो नाबालिग लड़के भी थे। मेला समाप्त होने के बाद सभी लोग एक बाइक से वापस लौट रहे थे।

रास्ते में दोनों नाबालिग आरोपियों ने लड़कियों को अपने घर ले जाकर उनके साथ जबरन दुष्कर्म किया। आरोप है कि बाद में उन्होंने अपने साथी सुशील उरांव को भी वहां बुलाया, जिसने एक नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया।

घटना के बाद एक पीड़िता किसी तरह आरोपियों के कब्जे से निकलकर अपने घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। दूसरी पीड़िता अगले दिन बीजूपाड़ा-खलारी मार्ग के समीप जंगल में मिली, जहां आरोपी उसे छोड़कर फरार हो गए थे।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित परिवार ने मांडर थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर तत्काल जांच शुरू की। पीड़िताओं का मेडिकल परीक्षण कराया गया और घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए गए। इसके अलावा कई प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट, पीड़िताओं के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषी के खिलाफ मजबूत पक्ष रखा।

अदालत ने क्या कहा?

रांची की विशेष पॉक्सो अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद सुशील उरांव को दोषी करार दिया। अदालत ने कहा कि नाबालिगों के साथ यौन अपराध समाज के लिए अत्यंत गंभीर अपराध हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है।

इसी आधार पर अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना जमा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया है।

पॉक्सो कानून क्या है?

प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) अधिनियम, 2012 बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के उद्देश्य से बनाया गया विशेष कानून है। इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों की सुनवाई विशेष अदालतों में की जाती है।

इस कानून का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि पीड़ित बच्चों को संवेदनशील वातावरण में न्याय दिलाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना भी है। इसलिए ऐसे मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाती है।

झारखंड में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी सतर्कता

झारखंड सरकार, पुलिस विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग समय-समय पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाते हैं। स्कूलों, पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में ‘गुड टच-बैड टच’, साइबर सुरक्षा और बाल अधिकारों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून की सख्ती पर्याप्त नहीं है। परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थानों की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को जागरूक करें और किसी भी संदिग्ध घटना की तुरंत सूचना पुलिस को दें।

समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश

रांची पॉक्सो कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए स्पष्ट चेतावनी है जो महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने की सोच रखते हैं। न्यायपालिका ने एक बार फिर साबित किया है कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कानून बेहद सख्त है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फैसले न केवल पीड़ित परिवारों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में अपराधियों के मन में कानून का भय भी पैदा करते हैं।

पीड़ितों के पुनर्वास की भी है जरूरत

विशेषज्ञों के अनुसार, यौन अपराध के मामलों में केवल दोषियों को सजा देना पर्याप्त नहीं है। पीड़ित बच्चों को मानसिक परामर्श, सामाजिक सहयोग, शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।

सरकार और संबंधित एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पीड़ित बच्चे सामान्य जीवन में वापस लौट सकें और उन्हें किसी प्रकार के सामाजिक भेदभाव का सामना न करना पड़े।

निष्कर्ष

रांची की विशेष पॉक्सो अदालत का यह फैसला न्याय व्यवस्था की मजबूती और बच्चों की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दोषी को उम्रकैद और आर्थिक दंड की सजा देकर अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध करने वालों को कानून के तहत कठोरतम दंड मिलेगा। यह निर्णय समाज में कानून के प्रति विश्वास बढ़ाने और भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img
Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
- Advertisement -spot_img
Related News
- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here