कान्हु मुंडा : झारखंड में कभी नक्सली गतिविधियों का बड़ा चेहरा रहे और 25 लाख रुपये के पूर्व इनामी नक्सली कान्हु मुंडा को हजारीबाग ओपन जेल से पश्चिम बंगाल के पुरुलिया केंद्रीय कारागार में स्थानांतरित कर दिया गया है। यह स्थानांतरण कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया है, क्योंकि पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में उसके खिलाफ दर्ज दो मामलों की सुनवाई अभी लंबित है। झारखंड में दर्ज सभी मामलों का निष्पादन पहले ही पूरा हो चुका है। ऐसे में अब उसकी कानूनी लड़ाई केवल पश्चिम बंगाल की अदालतों तक सीमित रह गई है।
यह मामला झारखंड और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों में सक्रिय रहे कान्हु मुंडा के खिलाफ कई गंभीर आरोप दर्ज रहे हैं। हालांकि वर्ष 2017 में आत्मसमर्पण करने के बाद उसने मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया शुरू की थी।
क्यों किया गया पुरुलिया जेल स्थानांतरण?
जानकारी के अनुसार कान्हु मुंडा को लगभग दो सप्ताह पहले हजारीबाग ओपन जेल से पुरुलिया केंद्रीय जेल भेजा गया। इसका मुख्य कारण पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में दर्ज दो लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई है। न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने और अदालत में नियमित पेशी सुनिश्चित करने के लिए जेल प्रशासन ने उसे संबंधित राज्य की जेल में स्थानांतरित किया है।
जेल प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि स्थानांतरण पूरी तरह न्यायालय के निर्देश और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप किया गया है। जब तक दोनों मामलों का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक कान्हु मुंडा पुरुलिया जेल में ही रहेगा।
झारखंड में सभी 47 मामलों का हो चुका है निष्पादन
कान्हु मुंडा के खिलाफ झारखंड के विभिन्न जिलों में कुल 47 आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें पुलिस पर हमले, हथियार लूट, नक्सली हिंसा, विस्फोट, हत्या और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप शामिल थे।
पुलिस और न्यायालय की लंबी प्रक्रिया के बाद झारखंड के सभी मामलों का निष्पादन पूरा हो चुका है। यही कारण है कि अब उसकी कानूनी स्थिति केवल पश्चिम बंगाल में लंबित दो मामलों पर निर्भर करती है।
कौन है कान्हु मुंडा?
कान्हु मुंडा पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांधा प्रखंड के जियान गांव का निवासी है। वह एक समय प्रतिबंधित नक्सली संगठन का सक्रिय एरिया कमांडर माना जाता था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहा।
उस पर गुड़ाबांधा थाना पर हमला, पुलिसकर्मियों की हत्या, ट्रेन पर फायरिंग, हथियार लूट और अन्य हिंसक घटनाओं में शामिल होने के आरोप लगे थे। उसकी गिरफ्तारी के लिए सरकार ने 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, जिससे वह झारखंड के सबसे वांछित नक्सलियों में शामिल हो गया था।
2017 में किया था आत्मसमर्पण
कई वर्षों तक जंगलों में सक्रिय रहने के बाद कान्हु मुंडा ने वर्ष 2017 में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया और विभिन्न मामलों की सुनवाई शुरू हुई।
पहले उसे जमशेदपुर के घाघीडीह केंद्रीय कारा में रखा गया। बाद में अच्छे आचरण और जेल नियमों के अनुसार उसे हजारीबाग ओपन जेल स्थानांतरित किया गया, जहां अपेक्षाकृत कम सुरक्षा व्यवस्था के बीच कैदियों को पुनर्वास का अवसर दिया जाता है।
क्या होती है ओपन जेल?
ओपन जेल ऐसी विशेष जेल होती है जहां अच्छे आचरण वाले कैदियों को रखा जाता है। यहां कैदियों को सीमित स्वतंत्रता के साथ रहने और समाज की मुख्यधारा में लौटने की दिशा में अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं होता कि कैदी पूरी तरह स्वतंत्र होता है।
यदि किसी कैदी के खिलाफ किसी अन्य राज्य में मुकदमे लंबित हों तो अदालत के आदेश पर उसे संबंधित राज्य की जेल में भेजा जा सकता है। कान्हु मुंडा के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई है।
पुरुलिया कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले की निगाह पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की अदालत पर है। वहां लंबित दो मामलों की सुनवाई पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि कान्हु मुंडा को आगे राहत मिलेगी या उसे सजा का सामना करना पड़ेगा।
यदि अदालत दोनों मामलों का निष्पादन कर देती है और किसी अन्य मामले में उसकी आवश्यकता नहीं रहती, तो आगे की कानूनी प्रक्रिया उसी फैसले के आधार पर तय होगी।
झारखंड में नक्सलवाद पर लगातार हो रही कार्रवाई
पिछले कुछ वर्षों में झारखंड सरकार और सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के खिलाफ लगातार अभियान चलाया है। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि कई शीर्ष उग्रवादी गिरफ्तार या मारे गए हैं। विकास योजनाओं, सड़क निर्माण और सुरक्षा अभियानों के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के मामलों का समय पर कानूनी निष्पादन और पुनर्वास नीति नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
निष्कर्ष
पूर्व इनामी नक्सली कान्हु मुंडा का हजारीबाग ओपन जेल से पुरुलिया जेल स्थानांतरण केवल जेल बदलने का मामला नहीं है, बल्कि लंबित न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। झारखंड में उसके खिलाफ दर्ज सभी मामलों का निपटारा हो चुका है, जबकि पश्चिम बंगाल के दो मामलों का फैसला अभी बाकी है। अब आने वाले समय में पुरुलिया की अदालत का निर्णय ही उसके भविष्य की दिशा तय करेगा।







