रांची AIIMS : झारखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को राष्ट्रीय स्तर तक मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने केंद्र सरकार से रांची में AIIMS और RIMS-2 की स्थापना के लिए सहयोग मांगा है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के समक्ष झारखंड की स्वास्थ्य जरूरतों, बढ़ती मरीज संख्या और बेहतर चिकित्सा ढांचे की आवश्यकता को विस्तार से रखा। यदि यह प्रस्ताव साकार होता है तो झारखंड के लाखों लोगों को राज्य के भीतर ही उच्चस्तरीय इलाज उपलब्ध हो सकेगा।
रांची में AIIMS और RIMS-2 की जरूरत क्यों?
झारखंड की राजधानी रांची का राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। यहां न केवल झारखंड बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण अस्पताल पर दबाव बढ़ रहा है। कई बार बेड, ऑपरेशन थिएटर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता चुनौती बन जाती है। ऐसे में RIMS-2 और AIIMS जैसी अत्याधुनिक स्वास्थ्य संस्थाओं की स्थापना स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे सकती है।
केंद्र सरकार से क्या मांग की गई?
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि झारखंड जैसे विकासशील राज्य को स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेष सहायता दी जाए। उन्होंने कहा कि रांची में AIIMS की स्थापना और RIMS-2 परियोजना को केंद्र का सहयोग मिलने से राज्य के लोगों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।
इसके साथ ही उन्होंने चिकित्सा शिक्षा, आधुनिक उपकरण, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया।
RIMS-2 बनने से क्या होंगे फायदे?
यदि रांची में RIMS-2 की स्थापना होती है तो इसके कई बड़े लाभ होंगे।
- गंभीर मरीजों के इलाज की क्षमता बढ़ेगी।
- आधुनिक सुपर स्पेशियलिटी विभाग विकसित होंगे।
- मेडिकल छात्रों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा।
- डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- दूसरे राज्यों में इलाज कराने की मजबूरी कम होगी।
- झारखंड मेडिकल हब बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
AIIMS बनने से झारखंड को मिलेगा राष्ट्रीय स्तर का संस्थान
AIIMS देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में गिना जाता है। यहां मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं, आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिलती है।
यदि रांची में AIIMS स्थापित होता है तो—
- कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी और ट्रॉमा जैसी जटिल बीमारियों का इलाज राज्य में ही संभव होगा।
- गरीब और ग्रामीण मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी।
- चिकित्सा अनुसंधान और मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
- राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत होगी।
झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगा नया आधार
झारखंड सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में काम कर रही है। नए अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, डॉक्टरों की नियुक्ति और स्वास्थ्य योजनाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि यदि केंद्र का सहयोग मिलता है तो रांची में स्वास्थ्य क्षेत्र का तेजी से विकास होगा और राज्य के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
मरीजों को दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी होगी कम
वर्तमान समय में झारखंड के हजारों मरीज गंभीर बीमारी के इलाज के लिए दिल्ली, कोलकाता, भुवनेश्वर, पटना और वेल्लोर जैसे शहरों का रुख करते हैं। इससे मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।
रांची में AIIMS और RIMS-2 जैसी संस्थाएं बनने के बाद मरीजों को अपने ही राज्य में बेहतर इलाज मिल सकेगा। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी।
चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
AIIMS और RIMS-2 बनने से MBBS, MD, MS, DM और MCh जैसे उच्च चिकित्सा पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या बढ़ सकती है। साथ ही शोध कार्य, आधुनिक लैब और मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं विकसित होंगी।
इससे झारखंड के विद्यार्थियों को राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ने की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े चिकित्सा संस्थानों की स्थापना से स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी और सरकारी निवेश भी बढ़ता है। मेडिकल उपकरण, फार्मास्यूटिकल्स, रिसर्च और हेल्थकेयर से जुड़े उद्योगों को भी इसका लाभ मिलता है।
रांची में AIIMS और RIMS-2 बनने से पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
निष्कर्ष
रांची में AIIMS और RIMS-2 की स्थापना की दिशा में केंद्र सरकार से सहयोग मांगना झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि इस परियोजना को मंजूरी मिलती है तो राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे न केवल मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज मिलेगा, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अब सभी की नजर केंद्र सरकार के आगामी निर्णय पर टिकी है, जो झारखंड के स्वास्थ्य ढांचे को नई पहचान दे सकता है.







