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Doctors Day 2026: बच्चों को बिना जरूरत एंटीबायोटिक देना पड़ सकता है खतरनाक, डॉ. गरिमा दीप्ति ने अभिभावकों को किया जागरूक | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

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बच्चों में एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल : राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (Doctors Day 2026) के अवसर पर शहर की वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गरिमा दीप्ति ने अभिभावकों से बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर एक महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने कहा कि बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को एंटीबायोटिक दवा देना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। एंटीबायोटिक का गलत और अनावश्यक उपयोग केवल बच्चे की वर्तमान बीमारी पर ही नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में उसके इलाज को भी कठिन बना सकता है।

डॉ. गरिमा दीप्ति ने बताया कि आजकल हल्का बुखार, सर्दी, खांसी या गले में दर्द होने पर कई अभिभावक स्वयं मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक खरीदकर बच्चों को दे देते हैं। यह आदत तेजी से बढ़ रही है, जबकि अधिकांश मामलों में ऐसी बीमारियां वायरल संक्रमण के कारण होती हैं और उनमें एंटीबायोटिक की जरूरत ही नहीं होती।


एंटीबायोटिक क्या होती है और कब दी जाती है?

एंटीबायोटिक ऐसी दवाएं हैं जो केवल बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण का इलाज करती हैं। वायरल संक्रमण जैसे सामान्य सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार, फ्लू और अधिकांश गले के संक्रमण में एंटीबायोटिक प्रभावी नहीं होती।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बिना जरूरत एंटीबायोटिक का उपयोग किया जाता है तो इससे बीमारी जल्दी ठीक नहीं होती, बल्कि शरीर में दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने लगती है।


क्या है एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस?

डॉ. गरिमा दीप्ति ने बताया कि जब एंटीबायोटिक दवाओं का बार-बार या गलत तरीके से उपयोग किया जाता है तो बैक्टीरिया उन दवाओं के खिलाफ मजबूत हो जाते हैं। इस स्थिति को एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (Antibiotic Resistance) कहा जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इसे दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में शामिल कर चुका है। यदि यह समस्या बढ़ती रही तो भविष्य में सामान्य संक्रमण का इलाज भी कठिन हो सकता है।


बच्चों के लिए क्यों बढ़ रहा है खतरा?

बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित हो रही होती है। ऐसे में बार-बार एंटीबायोटिक देने से उनके शरीर के अच्छे बैक्टीरिया भी प्रभावित होते हैं।

इसके कारण—

  • दवा का असर धीरे-धीरे कम होने लगता है।
  • भविष्य में गंभीर संक्रमण का इलाज मुश्किल हो सकता है।
  • एलर्जी और दवा के दुष्प्रभाव बढ़ सकते हैं।
  • बार-बार दस्त और पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
  • अस्पताल में भर्ती होने की संभावना बढ़ सकती है।

किन बीमारियों में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती?

डॉ. गरिमा दीप्ति के अनुसार निम्न स्थितियों में अधिकांश मामलों में एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती—

  • सामान्य सर्दी-जुकाम
  • वायरल बुखार
  • फ्लू
  • अधिकांश खांसी
  • वायरल गले का संक्रमण
  • वायरल दस्त

हालांकि, हर मरीज की स्थिति अलग होती है। इसलिए अंतिम निर्णय डॉक्टर ही लेते हैं।


अभिभावक इन गलतियों से बचें

डॉक्टरों का कहना है कि कई बार अभिभावक पुराने प्रिस्क्रिप्शन देखकर दोबारा वही दवा शुरू कर देते हैं या पड़ोसी की सलाह पर एंटीबायोटिक दे देते हैं। यह बेहद खतरनाक हो सकता है।

इन बातों का विशेष ध्यान रखें—

  • बिना डॉक्टर की सलाह दवा न दें।
  • मेडिकल स्टोर से खुद एंटीबायोटिक खरीदकर न खिलाएं।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई पूरी अवधि तक दवा दें।
  • बच्चा ठीक लगने पर बीच में दवा बंद न करें।
  • बची हुई पुरानी दवा दोबारा इस्तेमाल न करें।
  • दूसरे बच्चे की दवा अपने बच्चे को कभी न दें।

बीमारी में क्या करें?

यदि बच्चे को तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ, कमजोरी या कोई गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

डॉक्टर जांच और लक्षणों के आधार पर तय करते हैं कि बीमारी वायरल है या बैक्टीरियल। उसी के अनुसार दवा दी जाती है।


Doctors Day पर दिया जागरूकता का संदेश

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर डॉ. गरिमा दीप्ति ने कहा कि डॉक्टरों का उद्देश्य केवल इलाज करना ही नहीं, बल्कि समाज को सही स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना भी है।

उन्होंने कहा कि यदि अभिभावक जिम्मेदारी के साथ एंटीबायोटिक का उपयोग करेंगे तो भविष्य में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी गंभीर समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है।

उन्होंने यह भी अपील की कि इंटरनेट या सोशल मीडिया पर पढ़ी गई जानकारी के आधार पर बच्चों का इलाज न करें। हर बच्चे की शारीरिक स्थिति अलग होती है और दवा भी उसी के अनुसार निर्धारित की जाती है।


रांची समेत पूरे झारखंड में बढ़ रही जागरूकता की जरूरत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रांची सहित पूरे झारखंड में एंटीबायोटिक के सही उपयोग को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दवा खरीद लेते हैं, जिससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

Doctors Day जैसे अवसर लोगों को यह समझाने का बेहतर माध्यम हैं कि एंटीबायोटिक कोई सामान्य दवा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल की जाने वाली जीवनरक्षक दवा है।


निष्कर्ष

बच्चों में एंटीबायोटिक का अनावश्यक उपयोग एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी बीमारी में स्वयं दवा देने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। सही समय पर सही दवा और पूरा उपचार ही बच्चों को स्वस्थ रखने का सबसे सुरक्षित तरीका है।

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