Santhali Storybook : झारखंड के विद्यार्थियों ने शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में राज्य का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। झारखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) के विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई संथाली भाषा की कहानी-पुस्तक “Rimil Aar Chasha Hodo” को प्रतिष्ठित IBBY-UNESCO Collection of Remarkable Books for Young Readers in Indigenous and Endangered Languages के लिए चुना गया है। यह उपलब्धि न केवल विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाती है, बल्कि संथाली जैसी आदिवासी भाषा और उससे जुड़ी सांस्कृतिक पहचान को भी वैश्विक मंच पर स्थान देती है।
संथाली कहानी-पुस्तक को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
“Rimil Aar Chasha Hodo” का चयन ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर में आदिवासी और कम प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। IBBY और UNESCO ने बच्चों एवं युवाओं के लिए ऐसी पुस्तकों का एक अंतरराष्ट्रीय संग्रह तैयार किया है, जो Indigenous और endangered languages में प्रकाशित हुई हैं।
इस संग्रह का उद्देश्य केवल किताबों को एक जगह एकत्र करना नहीं है। इसके माध्यम से बच्चों के साहित्य में भाषाई विविधता, सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय ज्ञान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
झारखंड के विद्यार्थियों की संथाली कहानी-पुस्तक का इस संग्रह में चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें स्थानीय भाषा में बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जगह मिली है।
KGBV के छात्रों के लिए क्यों खास है यह उपलब्धि?
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का उद्देश्य विशेष रूप से उन क्षेत्रों की बालिकाओं को शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना है, जहां सामाजिक या आर्थिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा तक पहुंच चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
ऐसे विद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई पुस्तक का अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संग्रह में चुना जाना कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। यह विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में लिखने, पढ़ने और अपनी संस्कृति को व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।
संथाली भाषा में कहानी लिखने का मतलब केवल एक कहानी तैयार करना नहीं है। इसके माध्यम से स्थानीय समाज, जीवनशैली, परंपरा, प्रकृति और सांस्कृतिक अनुभवों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी मिलता है।
IBBY-UNESCO Collection क्या है?
IBBY यानी International Board on Books for Young People बच्चों और युवाओं के साहित्य को बढ़ावा देने वाला अंतरराष्ट्रीय संगठन है। UNESCO के साथ मिलकर IBBY ने Indigenous और endangered languages में बच्चों के लिए प्रकाशित उल्लेखनीय पुस्तकों का एक वैश्विक संग्रह तैयार किया है।
UNESCO के अनुसार दुनिया में लगभग 7,000 भाषाएं हैं और उनमें से लगभग 40 प्रतिशत भाषाओं के भविष्य को लेकर चिंता जताई गई है। इस स्थिति में बच्चों की किताबें किसी भाषा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं।
इसी सोच के तहत IBBY और UNESCO ने इस संग्रह की शुरुआत की। इसका उद्देश्य ऐसी पुस्तकों को सामने लाना है जो बच्चों को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ती हैं तथा भाषाई विविधता को मजबूत करती हैं।
संथाली भाषा के लिए यह उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण?
संथाली झारखंड सहित पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बोली जाने वाली प्रमुख आदिवासी भाषाओं में से एक है। झारखंड में संथाली भाषा का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व काफी बड़ा है।
किसी भी भाषा का संरक्षण केवल उसे बोलने तक सीमित नहीं होता। किताबें, लोककथाएं, गीत, शिक्षा सामग्री और बच्चों का साहित्य भाषा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जब बच्चे अपनी ही भाषा में किताब पढ़ते हैं, तो उन्हें अपनी संस्कृति और आसपास की दुनिया को समझने में आसानी हो सकती है। इसी कारण “Rimil Aar Chasha Hodo” जैसी पुस्तक का अंतरराष्ट्रीय संग्रह में शामिल होना संथाली साहित्य के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
UNESCO का Indigenous Languages पर विशेष फोकस
UNESCO के नेतृत्व में International Decade of Indigenous Languages 2022–2032 चल रहा है। इस दशक का व्यापक उद्देश्य Indigenous languages के संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रचार के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयासों को बढ़ावा देना है।
IBBY-UNESCO Collection भी इसी व्यापक प्रयास से जुड़ा हुआ है।
इस पहल में बच्चों की किताबों को महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है, क्योंकि बचपन से ही भाषा के प्रति जुड़ाव विकसित होता है। यदि बच्चों को अपनी भाषा में गुणवत्तापूर्ण साहित्य मिलता है, तो पढ़ने की आदत के साथ-साथ भाषा के प्रति उनका जुड़ाव भी मजबूत हो सकता है।
किन पुस्तकों को IBBY-UNESCO Collection में शामिल किया जाता है?
IBBY और UNESCO ने इस संग्रह के लिए कुछ विशेष मानदंड निर्धारित किए हैं।
इसके तहत बच्चों और युवाओं के लिए लिखी गई विभिन्न प्रकार की किताबें शामिल हो सकती हैं। इनमें:
- Picture Books
- Novels
- Biographies
- Graphic Novels
- Non-fiction Books
जैसी श्रेणियां शामिल हैं।
पुस्तक का मूल प्रकाशन Indigenous या endangered language में होना चाहिए या वह ऐसी bilingual book होनी चाहिए जिसमें कम से कम एक Indigenous या endangered language शामिल हो। चयन के लिए पुस्तक की साहित्यिक एवं चित्रात्मक गुणवत्ता और UNESCO के सिद्धांतों के अनुरूप होना भी महत्वपूर्ण है।
किताबों के माध्यम से भाषा संरक्षण पर जोर
भाषा संरक्षण के लिए केवल सरकारी दस्तावेज पर्याप्त नहीं होते। किसी भाषा का वास्तविक जीवन में इस्तेमाल और नई पीढ़ी द्वारा उसका उपयोग भी महत्वपूर्ण है।
बच्चों की कहानी-पुस्तकें इसमें विशेष भूमिका निभा सकती हैं। एक बच्चा जब अपनी भाषा में कहानी पढ़ता है, तो वह शब्दों के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, पात्रों और जीवन के अनुभवों से भी जुड़ता है।
इसी वजह से IBBY-UNESCO Collection में बच्चों की किताबों को विशेष महत्व दिया गया है।
झारखंड के विद्यार्थियों की पुस्तक का चयन इस दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है।
झारखंड की शिक्षा व्यवस्था के लिए भी संदेश
इस उपलब्धि का असर केवल साहित्य तक सीमित नहीं है। यह झारखंड में मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में शिक्षा को लेकर भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।
बच्चों की शिक्षा में स्थानीय भाषाओं का उपयोग उनके सीखने के अनुभव को अधिक सहज बना सकता है। जब स्थानीय भाषा और आधुनिक शिक्षा सामग्री के बीच संबंध बनाया जाता है, तो विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ शिक्षा से जुड़ने का अवसर मिलता है।
KGBV के विद्यार्थियों की रचनात्मकता का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आना यह भी दिखाता है कि स्कूलों में केवल पारंपरिक विषयों की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि लेखन, कहानी, कला और स्थानीय संस्कृति से जुड़े कार्यों को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को मिलेगा प्रोत्साहन
इस उपलब्धि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विद्यार्थियों की रचनात्मकता है।
एक छात्र या छात्रा द्वारा अपनी भाषा में कहानी लिखना उसके लिए केवल academic activity नहीं होती। इससे लेखन क्षमता, कल्पनाशक्ति, भाषा ज्ञान और आत्मविश्वास विकसित हो सकता है।
जब ऐसी रचना को राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है, तो अन्य विद्यार्थियों को भी अपनी भाषा में लिखने के लिए प्रेरणा मिल सकती है।
झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण हो सकता है कि उनकी स्थानीय भाषा और उनकी कहानियां भी वैश्विक साहित्य का हिस्सा बन सकती हैं।
IBBY-UNESCO Collection का अंतरराष्ट्रीय महत्व
IBBY के अनुसार इस Collection को औपचारिक रूप से 40th IBBY World Congress में Ottawa, Canada में 6 से 9 अगस्त 2026 के दौरान प्रस्तुत किया जाना निर्धारित था। इसके साथ एक catalogue भी जारी किया जाना है। Collection को आगे अंतरराष्ट्रीय book fairs और travelling exhibitions के माध्यम से प्रदर्शित करने की योजना भी है।
इसका अर्थ है कि चुनी गई पुस्तकों को केवल एक सूची में शामिल नहीं किया जा रहा, बल्कि उन्हें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बच्चों के साहित्य, भाषाई विविधता और Indigenous cultures के संदर्भ में प्रस्तुत करने का अवसर मिल सकता है।
दुनिया के सामने पहुंचेगी झारखंड की स्थानीय कहानी
झारखंड की पहचान केवल प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। राज्य की सबसे बड़ी सांस्कृतिक विशेषताओं में इसकी जनजातीय परंपराएं, लोककथाएं, भाषाएं, संगीत और कला भी शामिल हैं।
संथाली भाषा की इस पुस्तक को वैश्विक Collection में जगह मिलना झारखंड की इसी सांस्कृतिक विविधता को अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक पहुंचाने का माध्यम बन सकता है।
विशेष रूप से बच्चों के साहित्य के माध्यम से किसी क्षेत्र की संस्कृति को समझना आसान होता है। कहानी के पात्रों और घटनाओं के माध्यम से पाठक किसी समुदाय के जीवन और सोच को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
Indigenous Languages को बचाने में बच्चों की किताबों की भूमिका
किसी भाषा के कमजोर होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। नई पीढ़ी का भाषा से कम जुड़ाव, शिक्षा और रोजगार में दूसरी भाषाओं का अधिक उपयोग और लिखित सामग्री की कमी इनमें शामिल हो सकते हैं।
ऐसे में बच्चों के लिए अच्छी किताबों का निर्माण बेहद उपयोगी हो सकता है।
यदि बच्चों को स्कूल, घर और पुस्तकालयों में अपनी भाषा की किताबें मिलें, तो भाषा का इस्तेमाल केवल बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा। वह पढ़ने और लिखने की भाषा के रूप में भी विकसित हो सकती है।
IBBY-UNESCO Collection इसी दिशा में एक अंतरराष्ट्रीय पहल है।
झारखंड के लिए सकारात्मक खबर
झारखंड में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी खबरों के बीच KGBV विद्यार्थियों की यह उपलब्धि एक सकारात्मक खबर के रूप में सामने आई है।
एक ओर जहां राज्य के युवा रोजगार और शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है।
“Rimil Aar Chasha Hodo” का चयन यह संदेश देता है कि स्थानीय भाषाओं में तैयार की गई रचनात्मक सामग्री को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थान मिल सकता है।
आगे क्या उम्मीद?
इस तरह की उपलब्धि के बाद झारखंड में संथाली और अन्य स्थानीय भाषाओं में बच्चों के लिए अधिक किताबें तैयार करने की दिशा में काम बढ़ सकता है।
स्कूलों में स्थानीय भाषा आधारित कहानी लेखन, कविता, चित्रकला और लोककथा संग्रह जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
इसके अलावा स्थानीय लेखकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को जोड़कर बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण साहित्य तैयार करने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
अगर ऐसी किताबों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्कूल लाइब्रेरी और स्थानीय पुस्तक मेलों तक पहुंचाया जाए, तो इनका लाभ और अधिक बच्चों तक पहुंच सकता है।
झारखंड की संस्कृति को वैश्विक मंच
“Rimil Aar Chasha Hodo” का IBBY-UNESCO Collection के लिए चयन झारखंड की स्थानीय भाषा, विद्यार्थियों की रचनात्मकता और Indigenous literature के लिए महत्वपूर्ण खबर है।
यह उपलब्धि केवल एक पुस्तक के चयन की कहानी नहीं है। यह इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय भाषा में लिखी गई बच्चों की कहानी भी अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंच तक पहुंच सकती है।
UNESCO और IBBY की पहल के व्यापक उद्देश्य भाषाई विविधता, Indigenous identities और बच्चों के साहित्य को बढ़ावा देना हैं। इस संदर्भ में झारखंड की संथाली पुस्तक का चयन राज्य के विद्यार्थियों और स्थानीय भाषाओं के लिए उत्साह बढ़ाने वाला कदम माना जा सकता है।
आधिकारिक जानकारी
IBBY-UNESCO Collection – Official IBBY
UNESCO – Indigenous Languages Initiative
निष्कर्ष
झारखंड के KGBV विद्यार्थियों की संथाली भाषा की कहानी-पुस्तक “Rimil Aar Chasha Hodo” को IBBY-UNESCO के वैश्विक Collection के लिए चुना जाना राज्य के लिए गर्व की बात है। इससे विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता के साथ-साथ संथाली भाषा और झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को भी अंतरराष्ट्रीय मंच मिला है।
यह पहल यह भी बताती है कि भाषा का संरक्षण केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि किताबों, कहानियों, बच्चों और शिक्षा के माध्यम से भी किया जा सकता है। आने वाले वर्षों में ऐसी पहलें संथाली सहित अन्य स्थानीय भाषाओं के साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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