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रिम्स रांची में खून का गंभीर संकट, मरीजों के परिजन परेशान, डोनर लाने की मजबूरी | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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रिम्स रांची में खून की भारी कमी : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) में इन दिनों खून की भारी किल्लत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि मरीजों को समय पर खून नहीं मिल पा रहा है और उनके परिजनों को डोनर की तलाश में दर-दर भटकना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल मरीजों के इलाज में बाधा बन रही है, बल्कि कई मामलों में जीवन के लिए खतरा भी बनती जा रही है।

ब्लड बैंक में खून की भारी कमी

रिम्स के ब्लड बैंक की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, अस्पताल में खून का स्टॉक लगभग खत्म होने की कगार पर है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन सीधे खून उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं है और मरीजों के परिजनों से पहले डोनर लाने को कहा जा रहा है।ब्लड बैंक में आमतौर पर जहां भीड़ रहती है, वहां इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। कई काउंटर खाली पड़े हैं और जरूरतमंद मरीजों को घंटों इंतजार करने के बाद भी खून नहीं मिल पा रहा है।

मरीजों और परिजनों की बढ़ती परेशानी

इस संकट का सबसे ज्यादा असर मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है। अस्पताल में भर्ती कई गंभीर मरीजों के इलाज में देरी हो रही है क्योंकि समय पर खून उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

एक मरीज के परिजन ने बताया कि उन्हें कैंसर पीड़ित रिश्तेदार के लिए खून की जरूरत थी, लेकिन कई घंटों तक इंतजार करने के बाद भी ब्लड नहीं मिल पाया। वहीं, गर्भवती महिलाओं और दुर्घटना में घायल मरीजों के परिजन भी खून के लिए परेशान नजर आए।

कई लोगों को सोशल मीडिया, रिश्तेदारों और स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से डोनर खोजने पड़ रहे हैं। इससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

डोनर लाने की बाध्यता, हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल

झारखंड हाईकोर्ट ने पहले ही स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी अस्पताल में मरीजों या उनके परिजनों से “खून के बदले खून” (replacement donor) की मांग नहीं की जा सकती। जरूरतमंद मरीज को खून उपलब्ध कराना अस्पताल और ब्लड बैंक की जिम्मेदारी है।

इसके बावजूद, मौजूदा हालात में मरीजों के परिजनों को डोनर लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या जमीनी स्तर पर हाईकोर्ट के आदेश का पालन हो रहा है या नहीं।

क्या है खून की कमी की मुख्य वजह?

विशेषज्ञों और अस्पताल सूत्रों के अनुसार, इस संकट के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं:

1. रक्तदान शिविरों में कमी

हाल के दिनों में स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिससे ब्लड बैंक में आपूर्ति प्रभावित हुई है।

2. जागरूकता की कमी

लोग अभी भी रक्तदान को लेकर पूरी तरह जागरूक नहीं हैं, जिससे नियमित डोनर की संख्या सीमित है।

3. मांग और आपूर्ति में अंतर

झारखंड में खून की जरूरत ज्यादा है, लेकिन उसके मुकाबले संग्रह काफी कम है। राज्य में हर साल लाखों यूनिट खून की जरूरत होती है, जबकि उपलब्धता उससे काफी कम रहती है।

4. मौसमी प्रभाव

गर्मी और त्योहारों के दौरान रक्तदान में गिरावट आम बात है, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है।

गंभीर मरीजों पर बढ़ा खतरा

खून की कमी का सबसे बड़ा असर उन मरीजों पर पड़ता है, जिन्हें नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है। इनमें शामिल हैं:

  1. थैलेसीमिया के मरीज
  2. कैंसर मरीज
  3. गर्भवती महिलाएं
  4. दुर्घटना में घायल लोग

ऐसे मरीजों के लिए समय पर खून नहीं मिलना जानलेवा साबित हो सकता है। पहले भी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ब्लड की कमी के कारण कई बार गंभीर मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

सिस्टम की खामियां उजागर

रिम्स में खून की कमी की यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की कई खामियों को उजागर करती है।

  1. ब्लड बैंक की सीमित क्षमता
  2. नियमित मॉनिटरिंग की कमी
  3. रक्तदान को लेकर कमजोर अभियान
  4. आपातकालीन स्टॉक का अभाव

ये सभी कारण मिलकर इस संकट को और गंभीर बना रहे हैं।

प्रशासन क्या कर रहा है?

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वे स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं और उपलब्ध संसाधनों से मरीजों को खून उपलब्ध कराया जा रहा है।

साथ ही, लोगों से अधिक से अधिक रक्तदान करने की अपील भी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग भी इस दिशा में कदम उठाने की योजना बना रहा है, जिसमें नियमित रक्तदान शिविर आयोजित करने पर जोर दिया जा रहा है।

क्या है समाधान?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल दीर्घकालिक रणनीति से ही संभव है। इसके लिए निम्न कदम जरूरी हैं:

1.नियमित रक्तदान अभियान

हर जिले में नियमित और बड़े स्तर पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएं।

2. युवाओं की भागीदारी

कॉलेज और विश्वविद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाए।

3.डिजिटल ब्लड बैंक नेटवर्क

एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया जाए, जहां जरूरत पड़ने पर तुरंत डोनर उपलब्ध हो सके।

4.मोबाइल ब्लड कलेक्शन यूनिट

ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल यूनिट भेजकर खून का संग्रह बढ़ाया जाए।

समाज की भी जिम्मेदारी

यह केवल सरकार या अस्पताल की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज को भी आगे आना होगा। स्वैच्छिक रक्तदान को एक सामाजिक आंदोलन बनाने की जरूरत है, ताकि किसी भी मरीज को खून के अभाव में परेशानी न झेलनी पड़े।

निष्कर्ष

रिम्स रांची में खून की कमी की मौजूदा स्थिति एक गंभीर चेतावनी है। अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह और बड़ा संकट बन सकता है।हालांकि राहत की बात यह है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में सक्रिय होने लगे हैं, लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब आम लोग भी रक्तदान के लिए आगे आएंगे।

खून की एक यूनिट किसी की जिंदगी बचा सकती है — यह समझना और अपनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

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Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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