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हादसों के बाद भी नहीं सुधरे लोग , झारखंड में बोटिंग के दौरान लाइफ जैकेट से क्यों दूर भाग रहे हैं पर्यटक | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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Jharkhand Boating Safety : झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों—डैम, झीलों और जलाशयों—पर बोटिंग का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। लेकिन इसके साथ ही एक गंभीर खतरा भी सामने आ रहा है: सुरक्षा नियमों की अनदेखी। हाल ही में सामने आई रिपोर्टों ने यह स्पष्ट किया है कि बार-बार हादसों के बावजूद पर्यटक और नाव संचालक दोनों ही सुरक्षा मानकों, खासकर लाइफ जैकेट पहनने के नियमों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।यह स्थिति केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक संभावित आपदा का संकेत है।

हादसों से सबक नहीं, लापरवाही जारी

झारखंड में पहले भी कई दर्दनाक नाव हादसे हो चुके हैं। 17 जुलाई 2022 को पंचखेरो डैम में नाव पलटने से एक ही परिवार के आठ लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना ने राज्यभर में बोटिंग सुरक्षा पर सवाल खड़े किए थे। लेकिन हालात आज भी बहुत अलग नहीं हैं।रिपोर्ट बताती है कि कई पर्यटक केवल औपचारिकता निभाने के लिए लाइफ जैकेट पहनते हैं या उसे सही तरीके से बांधते भी नहीं हैं। ऐसे में दुर्घटना होने पर जैकेट बेकार साबित होती है।यह लापरवाही दो स्तर पर देखी जा रही है—

  • पर्यटक खुद सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज कर रहे हैं
  • नाव संचालक भी सख्ती से नियम लागू नहीं कर रहे

लाइफ जैकेट: नियम या सिर्फ दिखावा?

झारखंड के कई पर्यटन स्थलों पर लाइफ जैकेट की व्यवस्था तो है, लेकिन उसका उपयोग प्रभावी नहीं है। कई मामलों में पर्यटक इसे पहनना ही नहीं चाहते, और अगर पहनते भी हैं तो ढंग से नहीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, लाइफ जैकेट तभी काम करती है जब:

  • वह सही फिटिंग की हो
  • ठीक से बांधी गई हो
  • गुणवत्ता अच्छी हो

लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। कई जगहों पर जैकेट की गुणवत्ता पर भी सवाल उठते रहे हैं।

देशभर में दिख रहा है यही पैटर्न

झारखंड की स्थिति कोई अलग नहीं है। हाल ही में मध्य प्रदेश के जबलपुर के बरगी डैम में हुए एक बड़े बोट हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हादसे में कई लोगों की जान गई और बचे हुए यात्रियों ने आरोप लगाया कि:

  • लाइफ जैकेट समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई
  • मौसम चेतावनी को नजरअंदाज किया गया
  • सुरक्षा नियमों का पालन नहीं हुआ

यह घटना बताती है कि भारत में बोटिंग सुरक्षा अक्सर कागजों तक सीमित रह जाती है।

ओवरलोडिंग और स्टंटबाजी: खतरे को न्योता

बोटिंग के दौरान एक और गंभीर समस्या सामने आती है—ओवरलोडिंग और जोखिम भरा व्यवहार।

  • कई नावों में तय क्षमता से ज्यादा लोगों को बैठाया जाता है
  • पर्यटक पानी में स्टंट करते हैं या खड़े होकर फोटो लेते हैं
  • कुछ लोग बिना जैकेट के ही बोटिंग करते हैं

ये सभी चीजें दुर्घटना की संभावना को कई गुना बढ़ा देती हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि नाव हादसों के पीछे दो सबसे बड़े कारण हैं:

  1. लाइफ जैकेट का अभाव या गलत उपयोग
  2. ओवरलोडिंग

प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल

झारखंड में पर्यटन विभाग समय-समय पर सुरक्षा दिशानिर्देश जारी करता है। पहले भी राज्य में बोटिंग स्थलों पर सुरक्षा ऑडिट की बात सामने आई थी, जिसमें यह पाया गया कि कई जगहों पर लाइफ जैकेट की भारी कमी थी और नावों की स्थिति भी खराब थी।हालांकि नियम तो मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।प्रशासन की जिम्मेदारी है कि:

  • बिना लाइफ जैकेट के किसी को नाव में बैठने न दिया जाए
  • नावों की नियमित जांच हो
  • ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई हो
  • प्रशिक्षित लाइफगार्ड मौजूद हों

क्यों जरूरी है लाइफ जैकेट?

लाइफ जैकेट केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन रक्षक उपकरण है।

इसके फायदे:

  • पानी में गिरने पर व्यक्ति को तैरने में मदद मिलती है
  • बेहोशी की स्थिति में भी सिर पानी से ऊपर रहता है
  • बचाव दल को व्यक्ति को पहचानने में आसानी होती है

एक छोटी सी लापरवाही जानलेवा बन सकती है।

पर्यटकों की मानसिकता: “कुछ नहीं होगा” का खतरा

सबसे बड़ी समस्या लोगों की सोच है।
कई पर्यटक यह मान लेते हैं कि:

  • “हमें तैरना आता है”
  • “कुछ नहीं होगा”
  • “बस थोड़ी देर की बात है”

लेकिन हादसे बिना चेतावनी के होते हैं।
और जब होते हैं, तो प्रतिक्रिया देने का समय नहीं मिलता।

क्या समाधान है?

इस समस्या का समाधान केवल नियम बनाने से नहीं होगा, बल्कि सख्ती से पालन कराने से होगा।

जरूरी कदम:

  • लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य किया जाए (No Jacket, No Ride)
  • भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान
  • सुरक्षा जागरूकता अभियान
  • सीसीटीवी और निगरानी व्यवस्था
  • प्रशिक्षित स्टाफ और लाइफगार्ड की तैनाती

निष्कर्ष: चेतावनी को नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी

झारखंड में बोटिंग पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा जोखिम भी बढ़ रहे हैं। हादसों के बाद भी अगर लापरवाही जारी रहती है, तो भविष्य में और बड़ी त्रासदियां हो सकती हैं।

लाइफ जैकेट पहनना कोई विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत है।
जब तक पर्यटक और प्रशासन दोनों इसे गंभीरता से नहीं लेंगे, तब तक “मनोरंजन” का यह साधन “मौत का सफर” बनता रहेगा।

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Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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