झारखंड डीजल संकट : झारखंड में पेट्रोल और डीजल संकट अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिलों में ईंधन की भारी कमी के कारण परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई जगहों पर पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं, जबकि कई पंपों पर “नो स्टॉक” के बोर्ड टांग दिए गए हैं। डीजल की कमी के कारण मालवाहक ट्रक, बसें, स्कूल वाहन और सार्वजनिक परिवहन प्रभावित हो चुके हैं। राज्य के कई हिस्सों में जरूरी सामानों की आपूर्ति भी प्रभावित होने लगी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, झारखंड के कई रूटों पर 10 में से लगभग 6 पेट्रोल पंप बंद हो चुके हैं या सीमित मात्रा में ईंधन दे रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ा है। ट्रक ऑपरेटरों और बस मालिकों का कहना है कि पर्याप्त डीजल नहीं मिलने के कारण कई गाड़ियां खड़ी करनी पड़ रही हैं।
रांची में सबसे ज्यादा असर
राजधानी रांची में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक बताए जा रहे हैं। शहर के प्रमुख पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। कई लोगों को घंटों इंतजार के बाद भी पेट्रोल या डीजल नहीं मिल पा रहा। कुछ पंपों पर केवल पेट्रोल उपलब्ध है तो कहीं सिर्फ डीजल। कई जगहों पर सीमित मात्रा में तेल दिया जा रहा है ताकि ज्यादा लोगों तक सप्लाई पहुंच सके।
लोग बोतलों, ड्रम और गैलन में तेल भरकर जमा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ती जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदने की अपील की है।
क्यों आया यह संकट?
रिपोर्ट्स के अनुसार इस संकट के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि तेल कंपनियों ने अब क्रेडिट सिस्टम खत्म कर दिया है और एडवांस पेमेंट के बाद ही सप्लाई दी जा रही है। इससे छोटे और मध्यम पेट्रोल पंप संचालकों को परेशानी हो रही है। बताया जा रहा है कि कई पंप मालिकों पर पहले से ही करोड़ों रुपये का बकाया है। नकद भुगतान की नई व्यवस्था के कारण वे पर्याप्त मात्रा में स्टॉक नहीं खरीद पा रहे। वहीं दूसरी ओर, लोगों में फैले डर और पैनिक बाइंग ने हालात और खराब कर दिए हैं।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि HPCL और BPCL की सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण इंडियन ऑयल के पंपों पर दबाव अचानक बढ़ गया है।
ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित
डीजल संकट का सबसे बड़ा असर परिवहन क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है। कई ट्रक ड्राइवरों ने माल ढुलाई रोक दी है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों का कहना है कि यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो जरूरी वस्तुओं की सप्लाई भी बाधित हो सकती है। सब्जियां, फल, दूध और अन्य सामानों की कीमतें बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
स्कूल बसों और निजी बस ऑपरेटरों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ बस मालिकों ने सीमित सेवा शुरू कर दी है जबकि कुछ रूटों पर गाड़ियां बंद कर दी गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर और ज्यादा देखा जा रहा है क्योंकि वहां सार्वजनिक परिवहन पहले से ही कमजोर है।
आम लोगों की बढ़ी परेशानी
ईंधन संकट का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ने लगा है। नौकरीपेशा लोग ऑफिस पहुंचने के लिए परेशान हैं, जबकि डिलीवरी बॉय, ऑटो चालक और छोटे व्यवसायी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। कई लोगों ने शिकायत की कि घंटों लाइन में लगने के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
रांची के कुछ पेट्रोल पंपों पर महिलाएं और बुजुर्ग भी लंबी कतारों में खड़े दिखाई दिए। कई लोगों का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा।
हाई कोर्ट में वर्चुअल सुनवाई की मांग
ईंधन संकट का असर अब न्यायिक व्यवस्था तक पहुंच गया है। झारखंड हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश से वर्चुअल सुनवाई शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों और ईंधन की कमी के कारण वकीलों और पक्षकारों को कोर्ट पहुंचने में दिक्कत हो रही है। यह पहली बार है जब झारखंड में ईंधन संकट के कारण न्यायिक कार्यवाही प्रभावित होने की नौबत आई है।
सरकार और प्रशासन अलर्ट मोड में
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गए हैं। खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री इरफान अंसारी ने मुख्यमंत्री से पेट्रोल पंपों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने की मांग की है ताकि भीड़ और संभावित विवादों को रोका जा सके।
रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने भी लोगों से अपील की है कि वे ईंधन का अनावश्यक भंडारण न करें और अफवाहों से बचें। प्रशासन लगातार तेल कंपनियों के संपर्क में है और सप्लाई सामान्य करने की कोशिश की जा रही है।
जमशेदपुर और अन्य जिलों में भी हालात खराब
केवल रांची ही नहीं, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद और अन्य जिलों में भी ईंधन संकट तेजी से बढ़ रहा है। जमशेदपुर में करीब 40 प्रतिशत पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म होने की खबर है। कई पंपों ने डीजल और पेट्रोल की बिक्री पर सीमा तय कर दी है। कुछ जगहों पर एक वाहन को सीमित मात्रा में ही ईंधन दिया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक सप्लाई पहुंच सके। इसके बावजूद कई लोग तेल जमा करने के लिए बार-बार लाइन में लग रहे हैं।
आर्थिक असर भी शुरू
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहा तो राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। उद्योग, निर्माण कार्य, परिवहन और व्यापार सभी प्रभावित हो सकते हैं। छोटे व्यापारियों और दुकानदारों का कहना है कि माल की सप्लाई प्रभावित होने लगी है।
ईंधन संकट से सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और दैनिक कमाई करने वाले लोगों पर पड़ रहा है। डिलीवरी सेवा, ई-कॉमर्स और निजी परिवहन से जुड़े हजारों लोग सीधे प्रभावित हुए हैं।
क्या जल्द सामान्य होंगे हालात?
तेल कंपनियों और प्रशासन का दावा है कि जल्द ही सप्लाई सामान्य कर दी जाएगी। हालांकि फिलहाल हालात सामान्य होते नजर नहीं आ रहे। लोगों में अब भी डर बना हुआ है और यही डर पैनिक बाइंग को बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सप्लाई चेन में सुधार और लोगों में भरोसा बहाल नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में संकट और गंभीर हो सकता है।
निष्कर्ष
झारखंड में बढ़ता डीजल और पेट्रोल संकट अब केवल ईंधन की कमी का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की परिवहन व्यवस्था, व्यापार, शिक्षा और दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाला बड़ा संकट बनता जा रहा है। लंबी कतारें, बंद पेट्रोल पंप और ठप होती ट्रांसपोर्ट व्यवस्था ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब सभी की नजर सरकार और तेल कंपनियों पर है कि वे इस संकट से राज्य को कितनी जल्दी बाहर निकाल पाते हैं।







