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17 मई को 5 घंटे थम जाएगी Ola-Uber और Swiggy-Zomato की रफ्तार , गिग वर्कर्स ने क्यों बुलाया बड़ा बंद | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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गिग वर्कर्स हड़ताल : देशभर में बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बीच गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स ने बड़ा आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया है। गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने 17 मई रविवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक पांच घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है। इस दौरान Ola, Uber, Rapido, Swiggy, Zomato, Bistro, Zepto और Blinkit जैसी ऐप आधारित सेवाएं प्रभावित रहेंगी।

यूनियन का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद डिलीवरी पार्टनर और कैब ड्राइवरों की आमदनी पर सीधा असर पड़ा है। बढ़ते खर्च के मुकाबले कंपनियों की ओर से मिलने वाला भुगतान पर्याप्त नहीं है। ऐसे में अब गिग वर्कर्स न्यूनतम सर्विस रेट तय करने और किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

5 घंटे ठप रहेंगी ऐप आधारित सेवाएं

यूनियन के अनुसार 17 मई को निर्धारित हड़ताल के दौरान हजारों ड्राइवर और डिलीवरी पार्टनर काम बंद रखेंगे। इसका असर बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों तक देखने को मिल सकता है। दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक लोगों को ऑनलाइन फूड डिलीवरी, ग्रॉसरी डिलीवरी और ऐप बेस्ड टैक्सी सेवाओं में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

विशेष रूप से रविवार होने के कारण फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म और कैब सेवाओं की मांग ज्यादा रहती है। ऐसे में यह हड़ताल लाखों ग्राहकों को प्रभावित कर सकती है। कई जगहों पर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बाजारों में यात्रियों को दिक्कतें आने की आशंका जताई जा रही है।

क्या हैं गिग वर्कर्स की प्रमुख मांगें?

गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने कंपनियों और सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे बड़ी मांग यह है कि डिलीवरी और कैब सेवाओं के लिए न्यूनतम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का सर्विस रेट तय किया जाए।

वर्कर्स का कहना है कि मौजूदा भुगतान मॉडल में ईंधन, वाहन मेंटेनेंस और अन्य खर्च निकालने के बाद उनके पास बहुत कम आय बचती है। यूनियन के मुताबिक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद कंपनियां किराया नहीं बढ़ा रही हैं।

यूनियन की मुख्य मांगें:

  • न्यूनतम 20 रुपये प्रति किलोमीटर सर्विस रेट
  • पेट्रोल-डीजल कीमत बढ़ने पर किराए में स्वतः संशोधन
  • इंसेंटिव सिस्टम में सुधार
  • वर्कर्स के लिए बीमा और सामाजिक सुरक्षा
  • मनमाने अकाउंट ब्लॉक करने पर रोक
  • लंबी दूरी के ऑर्डर पर अतिरिक्त भुगतान

बढ़ती महंगाई से बढ़ा दबाव

गिग वर्कर्स का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में पेट्रोल, डीजल, वाहन मरम्मत और रोजमर्रा के खर्च तेजी से बढ़े हैं। वहीं दूसरी ओर कंपनियों की ओर से मिलने वाले इंसेंटिव और बोनस में कटौती की जा रही है।

कई डिलीवरी पार्टनर का कहना है कि पहले जहां एक दिन में अच्छी कमाई हो जाती थी, अब ज्यादा घंटे काम करने के बाद भी आय कम हो गई है। कुछ वर्कर्स ने आरोप लगाया कि कंपनियां एल्गोरिदम के जरिए भुगतान कम कर रही हैं।

एक डिलीवरी एजेंट ने बताया कि,
“पेट्रोल महंगा हो गया है, लेकिन प्रति ऑर्डर मिलने वाला पैसा लगभग वही है। कई बार 10-12 किलोमीटर दूर डिलीवरी करनी पड़ती है, लेकिन कमाई बहुत कम होती है।”

कंपनियों पर बढ़ रहा दबाव

इस हड़ताल के ऐलान के बाद ऐप आधारित कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि अभी तक Ola, Uber, Swiggy, Zomato और अन्य कंपनियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स हड़ताल में शामिल होते हैं, तो कंपनियों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। क्योंकि हाल के वर्षों में ऑनलाइन डिलीवरी और कैब सेवाएं शहरी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं।

कौन होते हैं गिग वर्कर्स?

गिग वर्कर्स वे लोग होते हैं जो किसी कंपनी के स्थायी कर्मचारी नहीं होते, बल्कि ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सेवाएं प्रदान करते हैं। जैसे:

  • कैब ड्राइवर
  • फूड डिलीवरी एजेंट
  • ग्रॉसरी डिलीवरी पार्टनर
  • लॉजिस्टिक्स और कुरियर वर्कर्स

भारत में पिछले कुछ वर्षों में गिग इकोनॉमी तेजी से बढ़ी है। लाखों युवा आज Ola, Uber, Swiggy और Zomato जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए रोजगार पा रहे हैं। लेकिन इनके काम के घंटे, आय और सामाजिक सुरक्षा को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?

हड़ताल के दौरान सबसे ज्यादा असर आम ग्राहकों पर पड़ सकता है। लोगों को:

  • ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने में दिक्कत
  • कैब बुकिंग में लंबा इंतजार
  • ग्रॉसरी डिलीवरी में देरी
  • किराए में अस्थायी बढ़ोतरी

जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हड़ताल सफल रही तो कंपनियां अस्थायी रूप से “सर्ज प्राइसिंग” भी लागू कर सकती हैं, जिससे किराया और डिलीवरी चार्ज बढ़ सकते हैं।

सोशल मीडिया पर समर्थन

गिग वर्कर्स की हड़ताल को सोशल मीडिया पर भी समर्थन मिल रहा है। कई लोग वर्कर्स की मांगों को जायज बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऐप कंपनियों की कमाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन जमीन पर काम करने वाले डिलीवरी एजेंट और ड्राइवरों को पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा।

हालांकि कुछ लोगों ने चिंता जताई कि हड़ताल से आम जनता को परेशानी होगी, खासकर उन लोगों को जो रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ऐप सेवाओं पर निर्भर हैं।

सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग

यूनियन ने सरकार से भी हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि गिग वर्कर्स के लिए स्पष्ट नियम और न्यूनतम वेतन जैसी व्यवस्था होनी चाहिए। कई श्रमिक संगठनों ने भी गिग वर्कर्स को श्रमिक अधिकार देने की मांग उठाई है।

हाल के वर्षों में केंद्र और कुछ राज्य सरकारों ने गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर चर्चा शुरू की है, लेकिन अभी तक व्यापक स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है।

निष्कर्ष

17 मई को प्रस्तावित यह हड़ताल केवल किराया बढ़ाने की मांग नहीं बल्कि गिग वर्कर्स के अधिकारों और बेहतर कार्य परिस्थितियों की लड़ाई भी मानी जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और घटती आय के बीच लाखों डिलीवरी एजेंट और ड्राइवर आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।

अब देखना होगा कि कंपनियां और सरकार इस हड़ताल पर क्या रुख अपनाती हैं और क्या गिग वर्कर्स की मांगों पर कोई समाधान निकल पाता है। फिलहाल इतना तय है कि रविवार को कुछ घंटों के लिए देश के कई शहरों में ऐप आधारित सेवाओं की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

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Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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