Jharkhand Sand Mining News : झारखंड में लंबे समय से चल रहे बालू संकट से लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने बालू की बढ़ती कीमतों और निर्माण कार्यों पर पड़ रहे असर को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। पहले चरण में राज्य के छह बालू घाटों को खनन की मंजूरी दे दी गई है, जबकि 29 अन्य घाटों के लिए भी प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। सरकार का दावा है कि इन घाटों के शुरू होते ही बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में भी गिरावट आएगी।
झारखंड में क्यों पैदा हुआ बालू संकट
पिछले कई महीनों से झारखंड में बालू की भारी कमी देखने को मिल रही थी। राज्य के कई जिलों में बालू की कीमतें तीन गुना तक बढ़ गई थीं। निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे थे और आम लोगों को मकान बनाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
विशेषज्ञों के अनुसार बालू घाटों की लीज प्रक्रिया लंबित रहने और कानूनी अड़चनों के कारण खनन पूरी तरह प्रभावित हुआ। कई जगहों पर अवैध खनन भी बढ़ गया, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
छह बालू घाटों से शुरू होगा खनन
सरकार ने फिलहाल रांची, बोकारो और जमशेदपुर समेत कई इलाकों के छह घाटों को संचालन की मंजूरी दी है। इन घाटों से जल्द वैध बालू उठाव शुरू होने की संभावना है।
खनन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे बाजार में बालू की सप्लाई बढ़ेगी और निर्माण कार्यों को गति मिलेगी। सरकार का लक्ष्य आने वाले कुछ दिनों में 29 और घाटों की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें भी चालू करना है।
नई सैंड माइनिंग नियमावली से बदलेगी व्यवस्था
राज्य सरकार ने हाल ही में “झारखंड सैंड माइनिंग संशोधन नियमावली 2026” लागू की है। नई नियमावली के तहत बालू घाटों के आवंटन, भुगतान और लीज प्रक्रिया में कई बड़े बदलाव किए गए हैं।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से खनन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी होगी। नियमावली के अनुसार अब लीज डीड होने के बाद ही खनन की अनुमति मिलेगी और ग्रामसभा की सहमति भी जरूरी होगी।
सरकार को होगा करोड़ों का फायदा
नई नियमावली लागू होने के बाद सरकार को भी बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 229 बालू घाटों के आवंटन से सरकार को लगभग 473 करोड़ रुपये की तत्काल आय हो सकती है।सरकार का अनुमान है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर साल करीब 2000 करोड़ रुपये तक की रॉयल्टी प्राप्त हो सकती है। अधिकारियों का मानना है कि इससे राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और विकास योजनाओं को गति मिलेगी।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद खुला रास्ता
झारखंड में बालू घाटों के आवंटन पर पहले कानूनी रोक लगी हुई थी। हाईकोर्ट ने पेसा नियम लागू नहीं होने के कारण बालू घाटों की नीलामी और आवंटन पर रोक लगा दी थी।हालांकि जनवरी 2026 में सरकार द्वारा PESA Rules 2025 लागू करने की जानकारी देने के बाद हाईकोर्ट ने रोक हटा दी। इसके बाद राज्य में दोबारा वैध बालू खनन का रास्ता साफ हुआ।
बालू महंगा होने से प्रभावित हुआ निर्माण कार्य
बालू संकट का सबसे ज्यादा असर निर्माण उद्योग पर पड़ा। कई जिलों में एक ट्रैक्टर बालू की कीमत 6000 से 7000 रुपये तक पहुंच गई थी। छोटे मकान बनाने वाले लोगों के लिए यह बड़ी समस्या बन गई।
निर्माण कंपनियों और ठेकेदारों का कहना था कि बालू की कमी के कारण कई परियोजनाएं रुक गई थीं। मजदूरों को भी काम नहीं मिल पा रहा था। अब घाट शुरू होने से स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
अवैध खनन पर सरकार की सख्ती
राज्य सरकार ने अवैध बालू खनन और तस्करी पर भी सख्त कार्रवाई की बात कही है। अधिकारियों को नियमित जांच और निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
खनन विभाग का कहना है कि वैध घाट शुरू होने के बाद अवैध कारोबार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम और ई-परमिट व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा फायदा
नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में भी निर्माण कार्य तेज होने की संभावना है। पंचायत स्तर पर सड़कों, घरों और सरकारी भवनों के निर्माण में बालू की उपलब्धता अहम भूमिका निभाती है।
ग्रामीण इलाकों के लोगों का कहना है कि लंबे समय से बालू की कमी के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना समेत कई काम प्रभावित हो रहे थे। अब घाट शुरू होने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
झारखंड सरकार द्वारा छह बालू घाटों को मंजूरी देना और 29 अन्य घाटों की प्रक्रिया तेज करना राज्य के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। इससे बालू संकट कम होने, कीमतों में गिरावट आने और निर्माण कार्यों को गति मिलने की संभावना है।
नई सैंड माइनिंग नियमावली और कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद सरकार अब खनन व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में यदि सभी प्रस्तावित घाट शुरू हो जाते हैं तो राज्य में बालू की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है।







