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एमजीएम अस्पताल में पानी संकट पर DC का बड़ा एक्शन रोज 15 टैंकर भेजने का आदेश, एजेंसी पर FIR की चेतावनी | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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Jamshedpur News : जमशेदपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल एमजीएम अस्पताल इन दिनों पेयजल संकट को लेकर चर्चा में है। भीषण गर्मी के बीच अस्पताल परिसर में पानी की कमी से मरीजों और उनके परिजनों को हो रही परेशानी को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब कड़ा रुख अपनाया है। पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी श्री राजीव रंजन ने एमजीएम अस्पताल की पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करते हुए स्पष्ट कहा है कि अस्पताल में पानी की कमी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्पताल में प्रतिदिन 15 टैंकर के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि मरीजों, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और परिजनों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही उन्होंने पाइपलाइन निर्माण कार्य में देरी पर नाराजगी जताते हुए संबंधित एजेंसी को सख्त चेतावनी दी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 जून तक पाइपलाइन कार्य पूरा नहीं हुआ तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब झारखंड समेत पूरे पूर्वी भारत में भीषण गर्मी का असर देखा जा रहा है और कई इलाकों में पानी की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। ऐसे में अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में पेयजल संकट प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

एमजीएम अस्पताल में क्यों बढ़ा पानी संकट?

एमजीएम अस्पताल जमशेदपुर और आसपास के जिलों के हजारों मरीजों के लिए प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में ओपीडी, इमरजेंसी, वार्ड, शौचालय और अन्य विभागों में लगातार पानी की आवश्यकता होती है।

लेकिन पिछले कुछ समय से अस्पताल में पेयजलापूर्ति प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही थीं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना था कि कई वार्डों और शौचालयों में नियमित पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। गर्मी बढ़ने के साथ स्थिति और गंभीर होती गई।

इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और उपायुक्त स्तर पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

उपायुक्त ने दिए सख्त निर्देश

समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने कहा कि अस्पताल में पानी की कमी अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अस्पताल परिसर में किसी भी मरीज या उनके परिजनों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

उपायुक्त ने उप नगर आयुक्त जेएनएसी को निर्देश दिया कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्रतिदिन 15 टैंकर से जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सभी वार्डों, इमरजेंसी, ओपीडी, शौचालय और अन्य आवश्यक स्थानों पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध रहना चाहिए।

इसके साथ ही जलापूर्ति व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए गए। प्रशासन चाहता है कि किसी भी विभाग में पानी की कमी की शिकायत नहीं मिले।

पाइपलाइन कार्य में देरी पर नाराजगी

बैठक के दौरान अस्पताल में चल रहे पाइपलाइन बिछाने के कार्य की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल में स्थायी जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है।

हालांकि उपायुक्त ने कार्य की धीमी गति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कामों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उपायुक्त ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 15 जून तक पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा नहीं हुआ तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

प्रशासन के इस सख्त रुख से साफ संकेत मिल रहे हैं कि अब सरकारी परियोजनाओं में देरी करने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई हो सकती है।

मरीजों और परिजनों को मिल सकती है राहत

एमजीएम अस्पताल में पानी की समस्या के कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। कई लोगों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता था।

शौचालयों और वार्डों में पानी की कमी के कारण साफ-सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही थी। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही थी।

अब प्रशासन द्वारा रोजाना 15 टैंकर से पानी उपलब्ध कराने के फैसले से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

गर्मी के मौसम में बढ़ जाती है चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में अस्पतालों में पानी की मांग कई गुना बढ़ जाती है। मरीजों को ज्यादा पानी की जरूरत होती है, वहीं साफ-सफाई बनाए रखने के लिए भी अधिक जलापूर्ति आवश्यक होती है।

यदि अस्पताल में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होगा तो मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार स्वच्छ पेयजल संक्रमण रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए अस्पतालों में निर्बाध जलापूर्ति बेहद जरूरी है।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

जिला प्रशासन अब पूरे मामले की नियमित निगरानी कर रहा है। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्पताल में पानी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए।

उन्होंने कहा कि टैंकर आपूर्ति में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अस्पताल में केवल स्वच्छ और सुरक्षित पानी ही उपलब्ध कराया जाए।

प्रशासन ने यह भी कहा कि यदि कहीं पानी की कमी की शिकायत मिलती है तो तुरंत कार्रवाई की जाए।

एजेंसी पर बढ़ा दबाव

पाइपलाइन कार्य कर रही एजेंसी पर अब दबाव बढ़ गया है। प्रशासन ने 15 जून की समयसीमा तय कर दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई सरकारी परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं होने के कारण जनता को परेशानी झेलनी पड़ती है। ऐसे में प्रशासन की सख्ती से काम में तेजी आने की संभावना है।

यदि समयसीमा के भीतर पाइपलाइन कार्य पूरा हो जाता है तो एमजीएम अस्पताल में पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।

बैठक में मौजूद रहे कई अधिकारी

इस समीक्षा बैठक में उप विकास आयुक्त, एसडीएम धालभूम, निदेशक एनईपी, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, एमजीएम उपाधीक्षक, सहायक नगर आयुक्त मानगो नगर निगम, अभियंता और कार्यदायी एजेंसी के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक में सभी विभागों को समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश दिए गए ताकि समस्या का जल्द समाधान हो सके।

स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

एमजीएम अस्पताल में पेयजल संकट ने सरकारी अस्पतालों की आधारभूत सुविधाओं को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में पानी, बिजली और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं का मजबूत होना बेहद जरूरी है।

यदि ऐसी सुविधाओं में कमी होगी तो मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना मुश्किल हो जाएगा।

जनता को प्रशासन से उम्मीद

जमशेदपुर के लोगों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद एमजीएम अस्पताल में पानी की समस्या जल्द खत्म होगी।

लोगों का कहना है कि एमजीएम अस्पताल पूर्वी सिंहभूम और आसपास के कई जिलों के गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सबसे बड़ा सहारा है। ऐसे में वहां मूलभूत सुविधाओं का बेहतर होना बेहद जरूरी है।

प्रशासनिक सख्ती बनी चर्चा का विषय

उपायुक्त द्वारा पाइपलाइन कार्य पूरा नहीं होने पर एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन इसी तरह जवाबदेही तय करे तो सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में तेजी लाई जा सकती है।

फिलहाल एमजीएम अस्पताल में पानी संकट को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। अब लोगों की नजर 15 जून की समयसीमा और पाइपलाइन कार्य की प्रगति पर बनी हुई है।

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Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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