Ranchi News : रांची के चुटिया थाना क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक युवक की आंख में गोली मार दी गई। इस हमले में युवक की एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। सबसे हैरानी की बात यह है कि घटना के करीब दो महीने बाद अब जाकर पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। इस मामले ने शहर की कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घर के सामने हुआ हमला
मिली जानकारी के अनुसार, युवक अपने घर के बाहर मौजूद था, तभी उस पर अचानक हमला किया गया। आरोप है कि आरोपी ने बेहद करीब से गोली चलाई, जो सीधे युवक की आंख में जा लगी। गोली लगते ही युवक जमीन पर गिर पड़ा और इलाके में अफरा-तफरी मच गई। परिवार के लोग तुरंत उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने काफी प्रयास किया, लेकिन उसकी आंख की रोशनी नहीं बचाई जा सकी।
घटना के बाद पीड़ित परिवार पूरी तरह टूट गया। जिस युवक की आंखों में भविष्य के सपने थे, वह अब जिंदगी भर के लिए एक बड़ी शारीरिक परेशानी का सामना करने को मजबूर हो गया है।
दो महीने तक क्यों नहीं दर्ज हुई FIR?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद प्राथमिकी दर्ज करने में आखिर दो महीने का समय क्यों लग गया। परिवार का आरोप है कि वे लगातार पुलिस के पास न्याय की गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि आरोपी खुलेआम घूमता रहा और पुलिस केवल आश्वासन देती रही। इस देरी ने आरोपी को बच निकलने का मौका दिया और पीड़ित परिवार को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। आखिरकार जब मामला चर्चा में आया, तब जाकर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
आरोपी राजा कुमार पर आरोप
प्राथमिकी में राजा कुमार नामक युवक को आरोपी बनाया गया है। बताया जा रहा है कि आरोपी और पीड़ित के बीच पहले से किसी बात को लेकर विवाद था। हालांकि पुलिस अभी पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना के पीछे की असली वजह जानने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में पहले भी कई बार विवाद और मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस पहले ही सख्ती दिखाती, तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं होती।
डॉक्टरों ने बताया गंभीर मामला
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, गोली सीधे आंख के अंदरूनी हिस्से में लगी थी, जिससे नसों को गंभीर नुकसान पहुंचा। डॉक्टरों ने सर्जरी के जरिए आंख बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
विशेषज्ञों का कहना है कि आंख में गोली लगने जैसे मामलों में तुरंत इलाज बेहद जरूरी होता है, लेकिन कई बार चोट इतनी गहरी होती है कि मरीज की रोशनी वापस नहीं लाई जा सकती।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
पीड़ित युवक के परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं बताई जा रही है। इलाज में लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। अब परिवार को युवक के भविष्य की चिंता सता रही है।
परिजनों का कहना है कि उनका बेटा पहले पूरी तरह स्वस्थ था और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन इस घटना ने उसकी जिंदगी बदल दी।
परिवार ने सरकार और प्रशासन से आर्थिक सहायता तथा आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।
इलाके में बढ़ा आक्रोश
घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर कार्रवाई करती, तो आरोपी के हौसले इतने बुलंद नहीं होते।
इलाके के कई सामाजिक संगठनों ने भी मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों ने प्रशासन से कहा है कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी घटना दोबारा न हो।
रांची में बढ़ते अपराध पर चिंता
हाल के महीनों में रांची में गोलीबारी और हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। कई मामलों में अपराधी खुलेआम हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे आम लोगों के मन में डर का माहौल बनता जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अपराधियों के खिलाफ तेज और सख्त कार्रवाई ही ऐसे मामलों को रोक सकती है। साथ ही पुलिस को शिकायत मिलने पर तुरंत FIR दर्ज करनी चाहिए, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।
पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के तहत सख्त सजा दिलाई जाएगी।
हालांकि स्थानीय लोग पुलिस की इस कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि शुरुआत में ही कार्रवाई होती, तो आरोपी को बचने का मौका नहीं मिलता।
न्याय की उम्मीद
यह मामला सिर्फ एक युवक की आंख की रोशनी जाने का नहीं, बल्कि सिस्टम की धीमी कार्यप्रणाली का भी प्रतीक बन गया है। पीड़ित परिवार अब इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठा है
लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं में तेजी से कार्रवाई होनी चाहिए ताकि अपराधियों में कानून का डर बना रहे और पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय मिल सके।रांची की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक आम लोग अपराध और प्रशासनिक लापरवाही के बीच पिसते रहेंगे।







