Jharkhand Rajya Sabha Election 2026 : झारखंड में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अपने वरिष्ठ नेता और लातेहार विधायक बैद्यनाथ राम को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित कर राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। इस घोषणा के साथ ही कांग्रेस और झामुमो के बीच चल रही अंदरूनी खींचतान भी खुलकर सामने आने लगी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाकर झामुमो ने न केवल अनुसूचित जाति समुदाय को मजबूत संदेश दिया है, बल्कि गठबंधन राजनीति में अपनी ताकत का भी प्रदर्शन किया है।
कौन हैं बैद्यनाथ राम?
Baidyanath Ram झारखंड की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वे वर्तमान में लातेहार विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। राजनीतिक जीवन की शुरुआत भाजपा से करने वाले बैद्यनाथ राम बाद में झामुमो में शामिल हुए और पार्टी के प्रमुख दलित चेहरों में गिने जाने लगे।
उन्होंने राज्य सरकार में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारियां निभाई हैं और संगठन के भीतर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। झामुमो नेतृत्व लंबे समय से उन्हें राज्यस्तरीय राजनीति में बड़ी भूमिका देने पर विचार कर रहा था।
कांग्रेस और JMM के बीच क्यों बढ़ा तनाव?
राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के रूप में Pranav Jha का नाम आगे बढ़ाया। लेकिन कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद झामुमो ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई और कहा कि यह फैसला उन्हें विश्वास में लिए बिना लिया गया।
इसके बाद झामुमो ने दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया। पार्टी ने मुख्यमंत्री Hemant Soren को उम्मीदवारों के चयन का अधिकार भी दिया था।
अब बैद्यनाथ राम के नाम की घोषणा के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या झामुमो कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगा या दोनों दल अलग-अलग रणनीति अपनाएंगे।
राज्यसभा चुनाव का गणित क्या कहता है?
झारखंड से इस बार राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है। इनमें एक सीट झामुमो संस्थापक और पूर्व राज्यसभा सांसद Shibu Soren के निधन के कारण रिक्त हुई है, जबकि दूसरी सीट भाजपा नेता दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हो रही है।
विधानसभा में वर्तमान संख्या बल के आधार पर झामुमो गठबंधन की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। हालांकि दूसरी सीट के लिए वरीयता मतों का खेल निर्णायक भूमिका निभा सकता है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार गठबंधन के भीतर किसी भी प्रकार की असहमति चुनाव को रोचक बना सकती है।
दलित प्रतिनिधित्व पर झामुमो का फोकस
बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाना केवल चुनावी फैसला नहीं माना जा रहा है। इसे दलित समुदाय को साधने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। झामुमो लंबे समय से आदिवासी, पिछड़ा और दलित सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यसभा में बैद्यनाथ राम की संभावित एंट्री झामुमो को राष्ट्रीय राजनीति में भी सामाजिक प्रतिनिधित्व का नया चेहरा दे सकती है।
भाजपा की रणनीति पर भी नजर
राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा भी सक्रिय है और पार्टी ने संभावित उम्मीदवारों के नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिए हैं। हालांकि विधानसभा में संख्या बल के लिहाज से भाजपा को अतिरिक्त समर्थन जुटाने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे में झामुमो, कांग्रेस, राजद और अन्य दलों के रुख पर पूरे चुनाव की दिशा निर्भर करेगी।
आगे क्या?
राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है और नामांकन प्रक्रिया के साथ राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ रही है। बैद्यनाथ राम की उम्मीदवारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि झामुमो इस चुनाव में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के मूड में है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस और झामुमो के बीच अंतिम समझौता होता है या मुकाबला और दिलचस्प बनता है।







