Jharkhand CM School of Excellence : झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में राज्यभर में 100 नए मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (CM School of Excellence) स्थापित करने की महत्वाकांक्षी घोषणा की थी। इन स्कूलों का उद्देश्य सरकारी शिक्षा व्यवस्था को निजी स्कूलों के स्तर तक पहुंचाना और ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। लेकिन योजना की घोषणा के कई महीने बाद भी लगभग 400 करोड़ रुपये की आवश्यक धनराशि उपलब्ध नहीं हो पाई है, जिसके कारण परियोजना की प्रगति लगभग ठप पड़ गई है।
यह स्थिति तब सामने आई है जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार राज्य में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दे रहे हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि राज्य में CM स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाकर 5,000 तक ले जाने की कार्ययोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
क्या है CM स्कूल ऑफ एक्सीलेंस योजना?
मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस झारखंड सरकार की एक महत्वाकांक्षी शिक्षा परियोजना है। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को निजी विद्यालयों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं, डिजिटल लर्निंग सिस्टम, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और अंग्रेजी माध्यम आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाती है।
राज्य में फिलहाल 80 CM स्कूल ऑफ एक्सीलेंस संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों को लेकर सरकार का दावा है कि यहां पढ़ने वाले छात्र शैक्षणिक परिणामों के साथ-साथ खेल, विज्ञान और अन्य गतिविधियों में भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
बजट में हुई थी बड़ी घोषणा
फरवरी 2026 में पेश किए गए झारखंड बजट में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 100 नए CM स्कूल ऑफ एक्सीलेंस खोलने की घोषणा की थी। सरकार का लक्ष्य था कि इन नए स्कूलों में 2027-28 शैक्षणिक सत्र से CBSE आधारित शिक्षा व्यवस्था शुरू की जाए।
इस घोषणा को राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना गया था। शिक्षा विभाग ने इसके लिए कई जिलों में स्कूलों की पहचान भी शुरू कर दी थी। लेकिन अब वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण पूरा कार्यक्रम धीमा पड़ गया है।
400 करोड़ रुपये की जरूरत
सूत्रों के अनुसार, 100 नए स्कूल ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने के लिए लगभग 400 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। इस राशि का उपयोग भवन निर्माण, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल उपकरण, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, फर्नीचर और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में किया जाना है।
हालांकि अभी तक इस परियोजना के लिए आवश्यक राशि जारी नहीं की गई है। परिणामस्वरूप कई जिलों में प्रस्तावित कार्य प्रारंभ नहीं हो पाए हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि जल्द धनराशि उपलब्ध नहीं हुई तो अगले शैक्षणिक सत्र तक इन स्कूलों को तैयार करना मुश्किल हो सकता है।
छात्रों और अभिभावकों की बढ़ी उम्मीदें
CM स्कूल ऑफ एक्सीलेंस योजना ने ग्रामीण और गरीब परिवारों के छात्रों में नई उम्मीद जगाई है। इन स्कूलों में आधुनिक सुविधाओं के साथ अंग्रेजी माध्यम और प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुकूल शिक्षा मिलने से बड़ी संख्या में छात्र इन संस्थानों में दाखिला लेना चाहते हैं।
रांची, धनबाद, बोकारो, जमशेदपुर और अन्य जिलों के कई अभिभावकों का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों में निजी विद्यालयों जैसी शिक्षा मिलेगी तो उन्हें महंगी फीस वाले स्कूलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
पहले चरण की सफलता से बढ़ा भरोसा
राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस परियोजना का विस्तार शुरू किया था। पहले चरण में 80 स्कूलों को विकसित किया गया। इन संस्थानों में CBSE पैटर्न, स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
सरकार का दावा है कि इन स्कूलों के परिणामों में लगातार सुधार देखने को मिला है। कई छात्रों ने बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसी सफलता को देखते हुए सरकार ने स्कूलों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया।
5,000 स्कूलों का बड़ा लक्ष्य
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल ही में अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के हर पंचायत स्तर तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए CM स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की संख्या 5,000 तक बढ़ाने की योजना को गति दी जाए। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी छात्र केवल आर्थिक स्थिति के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य सरकार इस लक्ष्य को हासिल कर लेती है तो झारखंड की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है।
वित्तीय चुनौती बनी सबसे बड़ी बाधा
हालांकि शिक्षा क्षेत्र में सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं सराहनीय हैं, लेकिन वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। 100 नए स्कूलों के लिए आवश्यक 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था नहीं होने से परियोजना की समयसीमा प्रभावित हो सकती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल ऑफ एक्सीलेंस जैसी योजनाएं केवल घोषणाओं से सफल नहीं होंगी। इनके लिए समय पर वित्तीय सहायता, प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति, आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता और सतत निगरानी आवश्यक है।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और वित्त विभाग पर टिकी हैं। यदि जल्द ही आवश्यक धनराशि जारी होती है तो 100 नए CM स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का सपना समय पर पूरा हो सकता है। लेकिन यदि फंडिंग में देरी जारी रही तो शिक्षा सुधार की यह महत्वाकांक्षी योजना लंबे समय तक अधर में लटक सकती है।
झारखंड के लाखों छात्रों और अभिभावकों को उम्मीद है कि सरकार जल्द समाधान निकालेगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का यह अभियान रफ्तार पकड़ेगा। आखिरकार, शिक्षा ही वह आधार है जिस पर राज्य के भविष्य की मजबूत नींव रखी जा सकती है।







