Vocational Instructors Protest : झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर लोक भवन के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे प्रशिक्षकों का आरोप है कि उन्हें पिछले 13 महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है, जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। उन्होंने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से जल्द भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल प्रशिक्षकों ने कहा कि वे वर्षों से सरकारी स्कूलों में छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, लेकिन उन्हें समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है। इससे उनके परिवारों पर गंभीर आर्थिक असर पड़ा है।
लोक भवन के बाहर जुटे बड़ी संख्या में प्रशिक्षक
राज्य के विभिन्न जिलों से आए व्यावसायिक प्रशिक्षक लोक भवन के बाहर एकत्र हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने बैनर और तख्तियां लेकर सरकार का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।
प्रशिक्षकों का कहना था कि कई बार विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी कारण उन्हें सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
13 महीने से नहीं मिला मानदेय
प्रदर्शनकारियों के अनुसार उन्हें पिछले 13 महीनों से मानदेय नहीं मिला है। कई प्रशिक्षकों ने बताया कि घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई, चिकित्सा खर्च और दैनिक जरूरतों को पूरा करना कठिन हो गया है।
कुछ प्रशिक्षकों ने कहा कि उन्हें कर्ज लेकर घर चलाना पड़ रहा है। वहीं कई लोग आर्थिक दबाव के कारण मानसिक तनाव का भी सामना कर रहे हैं।
छात्रों के भविष्य से जुड़ा है मामला
व्यावसायिक प्रशिक्षक स्कूलों में विभिन्न ट्रेड और कौशल आधारित विषयों की शिक्षा देते हैं। सरकार का उद्देश्य छात्रों को रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराना है ताकि वे भविष्य में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें।
प्रशिक्षकों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो इसका असर छात्रों की पढ़ाई और कौशल विकास कार्यक्रमों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि वे शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित नहीं करना चाहते, लेकिन अपनी जायज मांगों के लिए आवाज उठाना जरूरी है।
सरकार से तत्काल भुगतान की मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि 13 महीनों का लंबित मानदेय जल्द जारी किया जाए। साथ ही भविष्य में समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि मानदेय भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए ताकि बार-बार ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।
विभागीय स्तर पर समाधान की उम्मीद
प्रदर्शन के दौरान प्रशिक्षकों ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो वे अपना आंदोलन समाप्त करने को तैयार हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझेगी और जल्द समाधान निकालेगी।
हालांकि प्रदर्शन के दौरान स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण रही और प्रशिक्षकों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।
रोजगार और सम्मान दोनों का सवाल
व्यावसायिक प्रशिक्षकों का कहना है कि यह केवल मानदेय का मामला नहीं, बल्कि उनके सम्मान और भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। वे शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान देने का काम करते हैं।
उनका मानना है कि यदि उन्हें समय पर भुगतान मिले तो वे और बेहतर तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।
निष्कर्ष
लोक भवन के बाहर हुआ यह प्रदर्शन झारखंड के व्यावसायिक प्रशिक्षकों की बढ़ती नाराजगी को दर्शाता है। 13 महीनों से लंबित मानदेय के कारण प्रशिक्षक आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। अब सभी की नजर सरकार और शिक्षा विभाग पर है कि वे इस मुद्दे का समाधान कब और कैसे निकालते हैं। यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।







