रांची। झारखंड सरकार ने प्रशासनिक कार्यों की निगरानी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विभागीय समीक्षा बैठकों के कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। मुख्यमंत्री Hemant Soren के निर्देश पर जुलाई माह के लिए विभागवार समीक्षा बैठकों का नया शेड्यूल जारी किया गया है। सरकार का उद्देश्य विभिन्न विभागों की प्रगति का नियमित आकलन करना, लंबित योजनाओं की स्थिति जानना तथा विकास कार्यों में तेजी लाना है।
राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताहों से मुख्यमंत्री लगातार अलग-अलग विभागों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। हाल ही में स्वास्थ्य, उद्योग, खान एवं भू-तत्व, भवन निर्माण, श्रम, नियोजन, परिवहन तथा राजस्व विभागों की कार्यप्रणाली और योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई थी। इन बैठकों में योजनाओं की प्रगति, बजट खर्च, लाभुकों तक पहुंच और लंबित मामलों पर विशेष चर्चा हुई।
क्यों बदला गया कार्यक्रम?
सरकार का मानना है कि कई विभागों में योजनाओं के क्रियान्वयन की गति अपेक्षित स्तर पर नहीं है। कुछ परियोजनाएं वर्षों से लंबित हैं, जबकि कई योजनाओं का लाभ दूरदराज के इलाकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में विभागीय समीक्षा बैठकों के नए कार्यक्रम के जरिए अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने और कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
मुख्यमंत्री पहले भी मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं कि वे विभागीय योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन करें, लाभुकों से फीडबैक लें और लंबित योजनाओं को शीघ्र पूरा कराने की दिशा में काम करें। सरकार की प्राथमिकता है कि विकास योजनाओं का लाभ राज्य के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
जुलाई में किन विभागों की होगी समीक्षा?
नए शेड्यूल के तहत जुलाई महीने में कई महत्वपूर्ण विभागों की समीक्षा बैठकें प्रस्तावित की गई हैं। इनमें ग्रामीण विकास, पेयजल एवं स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, पर्यटन, उद्योग, परिवहन, राजस्व, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण, नगर विकास और श्रम विभाग जैसे प्रमुख विभाग शामिल हैं।
बैठकों में विभागीय सचिव, प्रधान सचिव, आयुक्त, परियोजना निदेशक तथा संबंधित जिलों के अधिकारी भी शामिल होंगे। समीक्षा के दौरान योजनाओं की वर्तमान स्थिति, वित्तीय प्रगति, लक्ष्य प्राप्ति और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा होगी।
लंबित परियोजनाओं पर रहेगा फोकस
सरकार विशेष रूप से उन परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है जो लंबे समय से अधूरी हैं या जिनकी प्रगति धीमी है। समीक्षा बैठकों में अधिकारियों से यह भी पूछा जाएगा कि परियोजनाओं में देरी के कारण क्या हैं और उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने पूर्व की बैठकों में स्पष्ट किया था कि योजनाओं के कार्यान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से लक्ष्य पूरा करने और नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
जिलों से मांगी जाएगी रिपोर्ट
नए कार्यक्रम के तहत सभी जिलों से विभागवार अद्यतन रिपोर्ट भी मांगी जाएगी। जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे योजनाओं की प्रगति, बजट उपयोग, लाभुकों की संख्या और जमीनी चुनौतियों से संबंधित विस्तृत जानकारी समय पर उपलब्ध कराएं।
इससे सरकार को राज्यभर की वास्तविक स्थिति समझने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि नियमित समीक्षा से योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।
विकास कार्यों को गति देने की रणनीति
झारखंड सरकार वर्तमान में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, सड़क निर्माण और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री हाल के दिनों में लगातार विभागीय बैठकों के माध्यम से इन क्षेत्रों की प्रगति का आकलन कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि विभागीय समीक्षा बैठकों का नियमित आयोजन प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। इससे योजनाओं में आ रही बाधाओं की पहचान समय रहते हो जाती है और समाधान की दिशा में तत्काल कदम उठाए जा सकते हैं।
अधिकारियों को मिलेगा स्पष्ट रोडमैप
नए शेड्यूल के साथ प्रत्येक विभाग को आगामी महीनों के लिए स्पष्ट लक्ष्य और प्राथमिकताएं भी निर्धारित की जाएंगी। इससे अधिकारियों को यह समझने में आसानी होगी कि सरकार किन क्षेत्रों पर अधिक फोकस कर रही है और उन्हें किन कार्यों को प्राथमिकता देनी है।
सरकार की कोशिश है कि सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो और योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली प्रशासनिक बाधाओं को दूर किया जा सके। इसके लिए विभागों को समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए जा रहे हैं।
जनता को मिल सकता है सीधा लाभ
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विभागीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से योजनाओं की निगरानी प्रभावी ढंग से की जाती है, तो इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की गुणवत्ता में सुधार आने की संभावना बढ़ेगी।
झारखंड सरकार का यह कदम प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जुलाई के लिए जारी नए समीक्षा कार्यक्रम से यह संकेत मिलता है कि सरकार विकास योजनाओं की प्रगति पर लगातार नजर बनाए रखना चाहती है और तय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए गंभीर है।







