पलामू डायन-बिसाही विवाद : झारखंड के पलामू जिले में अंधविश्वास एक बार फिर हिंसा का कारण बन गया। चैनपुर थाना क्षेत्र के हरभोंगा गांव में डायन-बिसाही (जादू-टोना) के आरोप को लेकर दो परिवारों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला खूनी संघर्ष में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडों और पारंपरिक हथियारों से जमकर मारपीट हुई, जिसमें छह लोग घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए मेदिनीनगर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है और पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, हरभोंगा गांव में लंबे समय से दो परिवारों के बीच आपसी विवाद चल रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, हाल के दिनों में एक परिवार ने दूसरे परिवार पर डायन-बिसाही और जादू-टोना करने का आरोप लगाया था। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कई बार कहासुनी भी हुई थी।
बुधवार को विवाद अचानक बढ़ गया और दोनों परिवार आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते बहस मारपीट में बदल गई। दोनों पक्षों के लोगों ने लाठी-डंडों और अन्य सामानों से एक-दूसरे पर हमला कर दिया। घटना के दौरान गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
छह लोग हुए घायल
हिंसक झड़प में कुल छह लोग घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने तत्काल घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। गंभीर रूप से घायल लोगों को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेदिनीनगर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया गया।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, घायलों में एक व्यक्ति की हालत गंभीर बनी हुई है, जबकि अन्य का इलाज जारी है। डॉक्टरों की टीम लगातार सभी घायलों की निगरानी कर रही है।
पुलिस ने संभाली स्थिति
घटना की सूचना मिलते ही चैनपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त निगरानी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने दोनों पक्षों के लोगों से पूछताछ की और घटनास्थल का निरीक्षण भी किया।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों की पहचान के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन एहतियात के तौर पर पुलिस की नजर बनी हुई है।
अंधविश्वास आज भी बना हुआ है बड़ी समस्या
यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि आधुनिक दौर में भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास और कुरीतियां समाज के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। डायन-बिसाही के नाम पर होने वाली घटनाएं झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अशिक्षा, सामाजिक जागरूकता की कमी और पारंपरिक मान्यताओं के कारण लोग आज भी वैज्ञानिक सोच की बजाय अंधविश्वास पर अधिक भरोसा कर लेते हैं। कई बार निजी दुश्मनी, जमीन विवाद और पारिवारिक झगड़ों को भी डायन-बिसाही का रूप देकर हिंसा को बढ़ावा दिया जाता है।
झारखंड में डायन प्रथा के खिलाफ कानून
झारखंड सरकार ने डायन प्रथा और उससे जुड़े अपराधों पर रोक लगाने के लिए विशेष कानून बनाए हैं। इसके बावजूद कई इलाकों में आज भी महिलाओं और परिवारों को डायन बताकर प्रताड़ित करने, सामाजिक बहिष्कार करने और हिंसा करने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। लोगों को जागरूक करने, शिक्षा का स्तर बढ़ाने और वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए लगातार अभियान चलाने की जरूरत है।
ग्रामीणों में दहशत का माहौल
घटना के बाद हरभोंगा गांव में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की हिंसक घटनाएं गांव के सामाजिक माहौल को खराब करती हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और गांव में शांति बनाए रखने की मांग की है।
कई ग्रामीणों ने बताया कि अंधविश्वास को लेकर होने वाले विवाद अक्सर बड़े संघर्ष का रूप ले लेते हैं। इसलिए प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर ऐसे मामलों को समय रहते रोकने की आवश्यकता है।
सामाजिक जागरूकता की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि अंधविश्वास से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए स्कूल स्तर से ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना होगा। साथ ही पंचायतों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन को मिलकर गांवों में जागरूकता अभियान चलाने होंगे।
यदि समाज में शिक्षा और जागरूकता का स्तर बढ़ेगा तो लोग बीमारी, दुर्घटना या अन्य समस्याओं के लिए किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने की बजाय वास्तविक कारणों को समझने का प्रयास करेंगे। इससे डायन-बिसाही जैसी कुप्रथाओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
निष्कर्ष
पलामू के चैनपुर थाना क्षेत्र के हरभोंगा गांव में हुई यह घटना केवल दो परिवारों के बीच विवाद नहीं है, बल्कि यह समाज में व्याप्त अंधविश्वास की गंभीर समस्या को भी सामने लाती है। डायन-बिसाही जैसे आरोप आज भी लोगों की जान और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बने हुए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है। वहीं, यह घटना समाज को जागरूकता, शिक्षा और वैज्ञानिक सोच अपनाने का संदेश भी देती है।







