झारखंड राज्यसभा चुनाव : झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। चुनावी प्रक्रिया के बीच अब कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रवक्ता सोनाल शांति ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पार्टी ने जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों को एक पूंजीपति के हाथों बेचने का काम किया है। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से राज्य की जनता से माफी मांगने की मांग की है।
सोनाल शांति ने रांची में जारी अपने बयान में कहा कि झारखंड की जनता ने जिन नेताओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनकर विधानसभा भेजा था, उनकी राजनीतिक सौदेबाजी भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि भाजपा ने धनबल को जनबल से ऊपर रखने का प्रयास किया है, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
राज्यसभा चुनाव बना राजनीतिक टकराव का केंद्र
झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं। इस चुनाव में सत्तारूढ़ महागठबंधन और भाजपा दोनों अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसी बीच भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने नामांकन प्रक्रिया के दौरान कई आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालांकि जांच के बाद संबंधित अधिकारियों ने नामांकन को वैध घोषित कर दिया। इसके बाद कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
सोनाल शांति का कहना है कि जिस प्रकार नामांकन को वैध ठहराया गया, उससे कई संदेह पैदा हुए हैं। उन्होंने इसे झारखंड की राजनीति का एक चिंताजनक घटनाक्रम बताया।
भाजपा अध्यक्ष और नेताओं से माफी की मांग
कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को राज्य की जनता के सामने जवाब देना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।
उनका आरोप है कि भाजपा जनता के विश्वास को कमजोर करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी शक्ति होती है, लेकिन भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को दरकिनार कर रही है।
कांग्रेस का दावा है कि भाजपा की राजनीति अब वैचारिक संघर्ष के बजाय राजनीतिक प्रबंधन और प्रभाव के इर्द-गिर्द घूम रही है।
सलमान खुर्शीद को प्रवेश नहीं देने पर उठाए सवाल
सोनाल शांति ने नामांकन प्रक्रिया के दौरान हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार का पक्ष रखने पहुंचे वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद को संबंधित कक्ष में प्रवेश नहीं करने दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी ओर भाजपा से जुड़े लोगों को वहां आने-जाने की अनुमति दी जा रही थी। कांग्रेस का कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यह पता लगाया जाए कि किन अधिकारियों या कर्मचारियों के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया।
महागठबंधन के 56 विधायक एकजुट : कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है और गठबंधन के सभी 56 विधायक एक साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा इसी एकजुटता से परेशान है और लगातार भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।
सोनाल शांति के अनुसार भाजपा यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि गठबंधन में मतभेद हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के सभी विधायक लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा राजनीतिक विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को चुनावी मैदान में राजनीतिक मुकाबला करना चाहिए, न कि आरोपों और दबाव की राजनीति करनी चाहिए।
अधिकारियों और कर्मचारियों को राजनीति से दूर रखने की अपील
कांग्रेस ने अपने बयान में राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों का भी जिक्र किया। सोनाल शांति ने कहा कि झारखंड के प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और महागठबंधन हमेशा प्रशासनिक तंत्र का सम्मान करते हैं और चाहते हैं कि सरकारी कर्मचारी निष्पक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भाजपा नेता अधिकारियों और कर्मचारियों को राजनीतिक विवादों में घसीटने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य का प्रशासनिक ढांचा किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव में नहीं आएगा।
परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर विवाद जारी
राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर राजनीतिक बहस थमने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस का कहना है कि नामांकन को वैध घोषित करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी।
सोनाल शांति ने आरोप लगाया कि नामांकन को वैध ठहराने के लिए पहले से एक राजनीतिक स्क्रिप्ट तैयार की गई थी। उन्होंने कहा कि यदि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप होगा तो जनता का विश्वास कमजोर होगा।
हालांकि चुनाव अधिकारियों ने नामांकन की जांच के बाद उसे नियमों के अनुरूप पाया है। इसके बावजूद विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक और नैतिक प्रश्न के रूप में उठा रहा है।
भाजपा पर एजेंसियों और धनबल के इस्तेमाल का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा पर देशभर में धनबल और एजेंसियों के जरिए राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने और जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने की राजनीति भाजपा की पहचान बनती जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि झारखंड अब तक इस तरह की राजनीति से काफी हद तक बचा हुआ था, लेकिन अब राज्य में भी वही रणनीति अपनाने की कोशिश की जा रही है।
सोनाल शांति ने कहा कि झारखंड की जनता राजनीतिक खरीद-फरोख्त की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेगी।
चुनावी माहौल में बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
राज्यसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। कांग्रेस जहां भाजपा पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा इन आरोपों को विपक्ष की राजनीतिक निराशा बता रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव केवल राज्यसभा की सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड की भविष्य की राजनीति और दलों की ताकत का भी संकेत देगा।
आने वाले दिनों में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। फिलहाल कांग्रेस और भाजपा के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप ने झारखंड की राजनीति को नई बहस दे दी है।







