Homeरांची न्यूज़CBSE पुनर्मूल्यांकन पोर्टल दोबारा नहीं खुलेगा, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की; छात्रों...

CBSE पुनर्मूल्यांकन पोर्टल दोबारा नहीं खुलेगा, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की; छात्रों को नहीं मिली राहत | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

- Advertisement -spot_img

CBSE पुनर्मूल्यांकन पोर्टल 2026 : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम जारी होने के बाद पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पुनर्मूल्यांकन पोर्टल को दोबारा खोलने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पोर्टल को फिर से खोलने से पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया प्रभावित होगी और लाखों छात्रों के कॉलेज प्रवेश पर भी असर पड़ सकता है।

इस फैसले के बाद उन छात्रों को झटका लगा है जो तकनीकी समस्याओं के कारण पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन नहीं कर पाए थे। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन छात्रों को वास्तविक परेशानी हुई है, वे व्यक्तिगत रूप से कानूनी उपाय अपना सकते हैं।

क्या था पूरा मामला?

CBSE ने कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों को उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन, फोटोकॉपी प्राप्त करने और पुनर्मूल्यांकन के लिए निर्धारित समय दिया था। इसी दौरान कई छात्रों ने दावा किया कि पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतें आ रही थीं।

छात्रों के अनुसार कई बार वेबसाइट खुल नहीं रही थी, आवेदन प्रक्रिया बीच में रुक जा रही थी और कुछ मामलों में भुगतान होने के बावजूद आवेदन दर्ज नहीं हो रहा था। इन शिकायतों के आधार पर छात्र संगठनों ने मांग की कि पुनर्मूल्यांकन पोर्टल को दोबारा खोला जाए ताकि प्रभावित छात्र आवेदन कर सकें।

इसी मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी।

हाईकोर्ट ने क्यों ठुकराई मांग?

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि CBSE की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से संचालित होती है। यदि पोर्टल को फिर से खोला जाता है तो पूरी प्रक्रिया में देरी होगी और इसका असर लाखों छात्रों पर पड़ेगा।

कोर्ट ने माना कि पुनर्मूल्यांकन के बाद संशोधित परिणाम जारी करने, विश्वविद्यालयों को जानकारी भेजने और प्रवेश प्रक्रिया को अपडेट करने में अतिरिक्त समय लगेगा। इससे देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की एडमिशन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

अदालत ने कहा कि सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया को दोबारा शुरू करना उचित नहीं होगा।

CBSE ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान CBSE ने अदालत को बताया कि पुनर्मूल्यांकन पोर्टल निर्धारित समय तक पूरी तरह सक्रिय था और लाखों छात्रों ने सफलतापूर्वक आवेदन भी किए।

बोर्ड के अनुसार पोर्टल पर लगातार तकनीकी निगरानी रखी जा रही थी और किसी बड़े स्तर की तकनीकी विफलता की पुष्टि नहीं हुई। CBSE ने यह भी कहा कि कई शिकायतें प्रक्रिया की जानकारी के अभाव या पात्रता नियमों को लेकर भ्रम के कारण सामने आई थीं।

बोर्ड का दावा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर बड़ी संख्या में छात्रों ने सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया, जिससे यह साबित होता है कि पोर्टल सामान्य रूप से कार्य कर रहा था।

छात्रों की मुख्य शिकायतें क्या थीं?

पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान छात्रों द्वारा कई तरह की समस्याएं बताई गईं। इनमें शामिल हैं—

  • पोर्टल का बार-बार बंद होना
  • लॉगिन संबंधी तकनीकी समस्याएं
  • भुगतान के बाद आवेदन दर्ज न होना
  • “रोल नंबर नहीं मिला” जैसे संदेश दिखना
  • उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी डाउनलोड करने में परेशानी

कई अभिभावकों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से CBSE से समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी। उनका कहना था कि तकनीकी कारणों से कई छात्र अपने अधिकार से वंचित रह गए।

प्रभावित छात्रों के लिए क्या विकल्प हैं?

हालांकि हाईकोर्ट ने पोर्टल दोबारा खोलने से इनकार कर दिया है, लेकिन अदालत ने प्रभावित छात्रों के लिए एक रास्ता खुला रखा है।

कोर्ट ने कहा कि यदि किसी छात्र के पास यह साबित करने के पर्याप्त प्रमाण हैं कि तकनीकी कारणों से वह आवेदन नहीं कर पाया, तो वह व्यक्तिगत रूप से संबंधित कानूनी मंच या न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे छात्रों को स्क्रीनशॉट, भुगतान रसीद, ईमेल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने चाहिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे अपनी बात साबित कर सकें।

कॉलेज प्रवेश पर क्यों पड़ सकता था असर?

देशभर के विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान बोर्ड परीक्षा परिणामों के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया संचालित करते हैं। यदि पुनर्मूल्यांकन पोर्टल को दोबारा खोला जाता तो परिणाम संशोधन की प्रक्रिया लंबी हो सकती थी।

इसके कारण:

  • विश्वविद्यालयों की मेरिट सूची प्रभावित होती
  • काउंसलिंग कार्यक्रमों में देरी होती
  • सीट आवंटन प्रक्रिया प्रभावित होती
  • लाखों छात्रों का शैक्षणिक सत्र देर से शुरू होता

इन्हीं कारणों को अदालत ने महत्वपूर्ण माना और याचिका को स्वीकार नहीं किया।

शिक्षा विशेषज्ञों की राय

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता दोनों जरूरी हैं। यदि किसी छात्र को तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ता है तो उसके लिए अलग शिकायत निवारण तंत्र मजबूत होना चाहिए।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भविष्य में CBSE को पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त तकनीकी सहायता और हेल्पलाइन सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए ताकि छात्रों को ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

आगे क्या होगा?

फिलहाल CBSE की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी। जिन छात्रों ने समय सीमा के भीतर आवेदन किया है, उनके मामलों की जांच और मूल्यांकन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

वहीं जिन छात्रों ने आवेदन नहीं किया या तकनीकी समस्याओं का दावा किया है, उनके लिए व्यक्तिगत कानूनी विकल्प खुले रहेंगे। इस मामले में आगे की सुनवाई या नई याचिकाओं पर भी नजर बनी रहेगी।

निष्कर्ष

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि CBSE पुनर्मूल्यांकन पोर्टल 2026 को दोबारा नहीं खोला जाएगा। अदालत ने लाखों छात्रों के हित और उच्च शिक्षा संस्थानों की प्रवेश प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए याचिका खारिज कर दी। हालांकि प्रभावित छात्रों को व्यक्तिगत स्तर पर न्याय पाने का अवसर अभी भी उपलब्ध है। यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में समयबद्ध प्रक्रियाओं और प्रशासनिक संतुलन के महत्व को भी दर्शाता है।

हमारे सोशल मीडिया से जुड़ें
18,600FansLike
2,607FollowersFollow
1,236FollowersFollow
1,347SubscribersSubscribe
और पढ़ें
कैटेगरीज़
जुड़ी खबरें
ब्रेकिंग न्यूज़
- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here