झारखंड SIR प्रक्रिया : झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। पार्टी ने मांग की है कि जिन मतदाताओं के नामों में Anomaly (विसंगति) या Unmapped स्थिति पहले से चिन्हित हो चुकी है, उनसे गणना (Enumeration) चरण के दौरान ही आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए जाएं। इससे मतदाताओं को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बन सकेगी।
JMM के महासचिव विनोद कुमार पांडेय द्वारा 15 जून 2026 को भेजे गए इस पत्र में निर्वाचन आयोग से वर्तमान व्यवस्था पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
झारखंड में मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत निर्वाचन आयोग मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों, डुप्लीकेट नामों, मृत मतदाताओं के नाम और अन्य विसंगतियों को चिन्हित कर सुधार करने का कार्य करता है।
हाल ही में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा स्पष्ट किया गया था कि मैपिंग और गणना चरण के दौरान सामान्य मतदाताओं से कोई दस्तावेज नहीं लिया जाएगा। केवल गणना प्रपत्र भरवाया जाएगा और बाद में यदि किसी मामले में विसंगति पाई जाती है तो संबंधित मतदाता को नोटिस जारी कर दस्तावेज मांगे जाएंगे।
इसी व्यवस्था को लेकर JMM ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि जिन मतदाताओं के मामलों में पहले से ही Anomaly या Unmapped स्थिति सामने आ चुकी है, उनसे प्रारंभिक चरण में ही दस्तावेज लेना अधिक व्यवहारिक होगा।
JMM ने क्या सुझाव दिए?
पत्र में कहा गया है कि यदि पूर्व-गणना या मैपिंग प्रक्रिया के दौरान किसी मतदाता के रिकॉर्ड में विसंगति की पहचान हो चुकी है, तो गणना चरण में ही आवश्यक प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लिए जाने चाहिए। इससे बाद में नोटिस जारी करने और दोबारा सत्यापन की आवश्यकता कम होगी।
पार्टी का तर्क है कि इस कदम से मतदाताओं और निर्वाचन अधिकारियों दोनों को लाभ मिलेगा तथा प्रशासनिक बोझ भी कम होगा।
मतदाताओं को मिलेगी राहत
JMM ने अपने पत्र में कहा है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत पहले गणना प्रपत्र जमा कराया जाएगा और बाद में यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो नोटिस जारी किया जाएगा। इससे बड़ी संख्या में मतदाताओं के बीच भ्रम और आशंका का माहौल बन सकता है।
विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, दूर-दराज इलाकों और कम जागरूकता वाले समुदायों में यह संदेश फैल सकता है कि उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। ऐसे में यदि प्रारंभिक चरण में ही दस्तावेज जमा कर लिए जाएं तो लोगों में विश्वास बढ़ेगा और अफवाहों पर भी रोक लगेगी।
निर्वाचन अधिकारियों का काम होगा आसान
पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि चिन्हित मामलों में पहले से दस्तावेज उपलब्ध हो जाएं तो बाद में जिला निर्वाचन पदाधिकारी (DEO), निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (AERO) और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को अलग-अलग नोटिस जारी करने, सुनवाई आयोजित करने और दोबारा सत्यापन करने की आवश्यकता कम पड़ेगी।
इससे सीमित संसाधनों और समय में अधिक प्रभावी ढंग से कार्य किया जा सकेगा तथा लंबित मामलों की संख्या भी घटेगी।
प्रवासी मतदाताओं के लिए बड़ी राहत
JMM ने अपने पत्र में विशेष रूप से प्रवासी श्रमिकों, विद्यार्थियों और राज्य से बाहर रहने वाले मतदाताओं का मुद्दा उठाया है।
झारखंड के लाखों लोग रोजगार, शिक्षा और व्यवसाय के कारण राज्य से बाहर रहते हैं। यदि उन्हें बाद में नोटिस भेजकर दस्तावेज जमा करने या सुनवाई में शामिल होने के लिए बुलाया जाता है, तो उन्हें दोबारा राज्य आना पड़ सकता है। इससे आर्थिक बोझ बढ़ेगा और कई पात्र मतदाता प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाएंगे।
पार्टी का कहना है कि गणना चरण में ही दस्तावेज लेने से ऐसे मतदाताओं को बार-बार आने-जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उनके मताधिकार की सुरक्षा बेहतर तरीके से हो सकेगी।
SIR प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग
पत्र में कहा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण का मूल उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है। यदि प्रारंभिक स्तर पर ही अधिकांश विसंगतियों का समाधान कर लिया जाए, तो बाद के चरणों में आपत्तियों, नोटिसों और पुनः सत्यापन की आवश्यकता कम हो जाएगी।
इससे पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न हो सकेगी। साथ ही राजनीतिक दलों और निर्वाचन अधिकारियों के बीच अनावश्यक विवाद की संभावनाएं भी घटेंगी।
पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
JMM ने अपने पत्र में कहा है कि लोकतंत्र की मजबूती का आधार यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक केवल प्रक्रियात्मक कठिनाइयों, सूचना के अभाव या प्रशासनिक विलंब के कारण अपने मताधिकार से वंचित न हो।
पार्टी का मानना है कि जिन मामलों में पहले से Anomaly या Unmapped स्थिति की पहचान हो चुकी है, वहां मतदाताओं को प्रारंभिक चरण में ही दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर देना अधिक न्यायसंगत और लोकतांत्रिक कदम होगा।
निर्वाचन आयोग से पुनर्विचार की अपील
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने निर्वाचन आयोग से अनुरोध किया है कि कम-से-कम उन मामलों में, जहां पूर्व-गणना चरण में Anomaly या Unmapped स्थिति पहले ही चिन्हित हो चुकी है, वहां गणना चरण के दौरान ही आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने की अनुमति दी जाए।
साथ ही पार्टी ने यह भी कहा है कि यदि आयोग इस संबंध में कोई वैकल्पिक व्यवस्था या नई प्रक्रिया लागू करने जा रहा है, तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए ताकि मतदाताओं, राजनीतिक दलों और निर्वाचन अधिकारियों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
निष्कर्ष
झारखंड में चल रही SIR प्रक्रिया के बीच JMM का यह पत्र चुनावी और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी ने मतदाता सुविधा, प्रशासनिक दक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा को आधार बनाते हुए निर्वाचन आयोग से नियमों में व्यावहारिक बदलाव की मांग की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्वाचन आयोग इस सुझाव पर क्या निर्णय लेता है और SIR अभियान के आगामी चरणों में क्या नई व्यवस्था सामने आती है।







