झारखंड में मनरेगा कर्मियों का बड़ा फैसला : झारखंड में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) से जुड़े हजारों कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। राज्यभर के मनरेगा कर्मियों ने घोषणा की है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं करती है तो 12 मार्च 2026 से वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इस फैसले से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे कई विकास कार्यों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ की बैठक रांची के मोरहाबादी ऑक्सीजन पार्क में आयोजित की गई, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरकार की ओर से अब तक लंबित समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, इसलिए आंदोलन को और तेज करना जरूरी हो गया है। इसी के तहत 12 मार्च से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की घोषणा की गई।
तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के बाद बड़ा फैसला
मनरेगा कर्मियों ने सीधे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के बजाय पहले चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाया। 9 मार्च से 11 मार्च तक राज्यभर में तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की गई, जिसके दौरान प्रखंड और जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया गया। इन प्रदर्शनों में ग्राम रोजगार सेवक, कनीय अभियंता, सहायक अभियंता, लेखा सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी जैसे विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
इस दौरान कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने की कोशिश की। उनका कहना है कि वर्षों से वे ग्रामीण विकास योजनाओं को सफल बनाने के लिए मेहनत कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई।
क्या हैं मनरेगा कर्मियों की प्रमुख मांगें
मनरेगा कर्मचारियों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग सेवा का स्थायीकरण है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लगभग दो दशकों से योजना में काम कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला।
इसके अलावा उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान
- सेवा का स्थायीकरण और स्पष्ट नियमितीकरण नीति
- समान कार्य के लिए समान वेतन संरचना
- ग्रेड पे लागू करना
- सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था (स्वास्थ्य बीमा, पेंशन आदि)
- सेवा के दौरान मृत्यु होने पर आश्रितों को आर्थिक सहायता
कर्मचारियों का कहना है कि कई महीनों से उनका मानदेय बकाया है, जिसके कारण उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। कुछ कर्मचारियों को रोजमर्रा के खर्च और कार्यस्थल तक आने-जाने में भी कठिनाई हो रही है।
5000 से अधिक कर्मियों के शामिल होने की संभावना
संघ के अनुसार, इस आंदोलन में राज्यभर के लगभग 5000 से अधिक मनरेगा कर्मी शामिल हो सकते हैं। यह सभी कर्मचारी विभिन्न स्तरों पर योजना के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि ये कर्मचारी हड़ताल पर चले जाते हैं, तो ग्रामीण विकास से जुड़े कई काम प्रभावित हो सकते हैं।मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण, तालाब खुदाई, जल संरक्षण, मिट्टी कार्य, पौधारोपण और अन्य विकास कार्य किए जाते हैं। इन कार्यों की निगरानी और संचालन में मनरेगा कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में उनकी हड़ताल से योजना का क्रियान्वयन प्रभावित हो सकता है।
जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन
तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के दौरान झारखंड के कई जिलों में मनरेगा कर्मियों ने धरना-प्रदर्शन किया। धनबाद, कोडरमा, रांची और अन्य जिलों में कर्मचारियों ने अपने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया।धरना कार्यक्रम में कर्मचारियों ने कहा कि वे सरकार से टकराव नहीं चाहते, बल्कि अपनी समस्याओं का न्यायसंगत समाधान चाहते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए जल्द सकारात्मक पहल करे।
सरकार पर उदासीनता का आरोप
मनरेगा कर्मचारी संघ के नेताओं का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को लेकर उदासीन रवैया अपना रही है। उनका कहना है कि कई बार सरकार से बातचीत और समझौते हुए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2024 में सरकार के साथ कुछ मुद्दों पर सहमति बनी थी, लेकिन अब तक उन पर अमल नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों में निराशा और आक्रोश बढ़ गया है।
ग्रामीण विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर
यदि 12 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होती है, तो झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कई योजनाओं का काम ठप हो सकता है। मनरेगा योजना ग्रामीण गरीबों को रोजगार देने और ग्रामीण आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की एक महत्वपूर्ण योजना है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना से जुड़े कर्मचारी काम बंद कर देते हैं, तो पंचायत स्तर पर चल रहे कई विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इससे ग्रामीण मजदूरों को मिलने वाले रोजगार के अवसर भी कम हो सकते हैं।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
मनरेगा कर्मचारी संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संघ के नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों के लिए है।उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द ही सकारात्मक पहल करती है तो बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सकता है। लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ, तो राज्यभर में हड़ताल जारी रहेगी और आंदोलन और तेज किया जा सकता है।
निष्कर्ष
झारखंड में मनरेगा कर्मियों की प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। हजारों कर्मचारियों की नाराजगी और उनकी लंबित मांगों ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है। यदि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जल्द संवाद स्थापित नहीं होता, तो इसका असर न केवल कर्मचारियों बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं और लाखों ग्रामीण मजदूरों पर भी पड़ सकता है।अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस आंदोलन को कैसे संभालती है और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किस प्रकार किया जाता है।




