झारखंड के पलामू जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक शादी का भोज सैकड़ों ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया। जिले के सतबरवा प्रखंड के बोहिता गांव स्थित पोखर पार टोला में फूड प्वाइजनिंग की बड़ी घटना सामने आई है। शादी के भोज में शामिल होने के बाद 100 से अधिक ग्रामीण अचानक बीमार पड़ गए। बीमारों में महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी शामिल हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।
बताया जा रहा है कि बीमार पड़े लोगों में से करीब 10 की हालत गंभीर है। गंभीर मरीजों को तुरंत इलाज के लिए लेस्लीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मेदिनीनगर के अस्पतालों में भेजा गया है। वहीं बाकी मरीजों का इलाज गांव में बनाए गए अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में किया जा रहा है।
स्कूल में बनाया गया अस्थायी इलाज केंद्र
एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही मेडिकल टीम तत्काल गांव पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। मरीजों की संख्या काफी अधिक होने के कारण गांव के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय पोखर पार टोला को अस्थायी इलाज केंद्र में बदल दिया गया।
यहां डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम लगातार मरीजों की जांच और उपचार में जुटी हुई है। कई मरीजों को स्कूल के बरामदे और कक्षाओं में जमीन पर लिटाकर प्राथमिक उपचार दिया गया। गांव में अचानक इतने लोगों के बीमार पड़ने से पूरे इलाके में डर और घबराहट का माहौल बन गया।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा टीम भी भेजी जा सकती है।
शादी के भोज के बाद बिगड़ने लगी लोगों की तबीयत
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, बोहिता गांव के पोखर पार टोला निवासी हरिशंकर चंद्रवंशी के घर उनके बेटे की शादी थी। बुधवार को बारात के दिन दोपहर बाद गांव के लोगों के लिए भोज का आयोजन किया गया था। इस भोज में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए थे।
भोज में पूरी, सब्जी और बुंदिया परोसी गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि बारात जाने के बाद धीरे-धीरे भोज में शामिल कई लोगों की तबीयत खराब होने लगी। शुरू में लोगों को हल्की उल्टी और पेट दर्द की शिकायत हुई, लेकिन देर रात तक स्थिति गंभीर होती चली गई।
रात होते-होते कई लोगों को तेज उल्टी, दस्त और पेट में दर्द की शिकायत होने लगी। धीरे-धीरे बीमार लोगों की संख्या बढ़ती चली गई, जिससे पूरे गांव में चिंता का माहौल बन गया।
रात भर बिगड़ती रही स्थिति
रात बीतने के साथ ही गांव में बीमार लोगों की संख्या लगातार बढ़ती गई। गुरुवार सुबह तक 100 से ज्यादा ग्रामीण फूड प्वाइजनिंग के लक्षणों से पीड़ित हो चुके थे। इसके बाद गांव के लोगों ने तत्काल जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी।सूचना मिलते ही लेस्लीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मेडिकल टीम गांव पहुंची और बीमार लोगों का इलाज शुरू किया। डॉक्टरों ने मरीजों की जांच कर उन्हें दवाइयां दीं और आवश्यक उपचार किया।जिन मरीजों की हालत ज्यादा गंभीर थी, उन्हें एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांव में कैंप कर रही है और मरीजों की निगरानी कर रही है।
जनप्रतिनिधि भी पहुंचे गांव
घटना की सूचना मिलते ही कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय नेता भी गांव पहुंच गए। राज्य स्तरीय दिशा कमेटी के सदस्य अवधेश सिंह चेरो ने गांव पहुंचकर हालात का जायजा लिया और बीमार लोगों के परिजनों से बातचीत की।उन्होंने बताया कि एक साथ इतने लोगों के बीमार पड़ने से गांव में काफी डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की और मरीजों का इलाज शुरू किया।उन्होंने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि घटना की जांच कर यह पता लगाया जाए कि आखिर भोजन में ऐसी क्या गड़बड़ी हुई, जिससे इतने लोग बीमार हो गए।
राहत और इलाज के काम में जुटे कई लोग
इस घटना के बाद गांव में राहत और उपचार का काम तेजी से शुरू किया गया। स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण मिलकर बीमार लोगों की मदद कर रहे हैं।
मौके पर प्रखंड प्रमुख रीमा देवी के पति युगल किशोर राम, उप प्रमुख कामाख्या नारायण यादव, जिला परिषद सदस्य के पति और विधायक प्रतिनिधि अजय उरांव, आशीष सिन्हा, सांसद प्रतिनिधि मनोज गुप्ता, विजय पाठक और धीरज कुमार सहित कई लोग मौजूद रहे और राहत कार्य में सहयोग किया।
इन सभी लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ मिलकर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और दवाइयों की व्यवस्था कराने में मदद की।
फूड प्वाइजनिंग की आशंका
डॉक्टरों का मानना है कि शादी के भोज में परोसे गए भोजन के खराब हो जाने या दूषित हो जाने के कारण यह घटना हुई हो सकती है। हालांकि भोजन के नमूने जांच के लिए भेजे जाने की भी संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म मौसम या भोजन को लंबे समय तक खुले में रखने से उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे फूड प्वाइजनिंग की समस्या हो सकती है।
प्रशासन कर रहा मामले की निगरानी
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और ज्यादातर मरीजों की हालत स्थिर है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से कई मरीजों की हालत में सुधार हो रहा है। डॉक्टरों की टीम गांव में ही कैंप कर रही है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज दिया जा सके।
निष्कर्ष
पलामू के बोहिता गांव में हुई यह घटना ग्रामीण इलाकों में बड़े सामूहिक भोज के दौरान खाद्य सुरक्षा के महत्व को उजागर करती है। शादी और सामाजिक कार्यक्रमों में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी सैकड़ों लोगों की सेहत पर भारी पड़ सकती है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। प्रशासन द्वारा मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर इस बड़ी फूड प्वाइजनिंग घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था।




