झारखंड को बदनाम करने की साजिश का आरोप, पूर्व मुख्यमंत्री पद की गरिमा को ठेस
रांची, बाबूलाल मरांडी का बयान। हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड में आयोजित जनसुनवाई को लेकर दिए गए बयान पर झारखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के बयान को भड़काऊ, गैर-जिम्मेदाराना और तथ्यों से परे करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने आरोप लगाया कि बाबूलाल मरांडी ने झारखंड को देश-विदेश स्तर पर बदनाम करने की सुपारी अपने राजनीतिक आकाओं से ले ली है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर बिना पूरी जानकारी और तथ्यों की पुष्टि किए इस तरह के बयान देना न केवल राजनीतिक दुर्भावना को दर्शाता है, बल्कि यह एक पूर्व मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी झारखंड की छवि को नुकसान पहुंचाने का सुनियोजित प्रयास प्रतीत होती है।
वैश्विक मंच पर झारखंड की सकारात्मक छवि गढ़ने की कोशिश
सोनाल शांति ने कहा कि बाबूलाल मरांडी का बयान ऐसे समय में आया है, जब राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झारखंड की सकारात्मक छवि प्रस्तुत करने में जुटे हुए हैं। राज्य सरकार निवेश, विकास, सामाजिक समरसता और आदिवासी हितों को केंद्र में रखकर झारखंड के लिए एक नई विकास गाथा लिखने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड को प्रगति के रास्ते पर ले जाने की भूमिका तैयार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बाबूलाल मरांडी अपने बयानों से राज्य की नकारात्मक तस्वीर पेश कर विकास की इस प्रक्रिया में अड़ंगा लगाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी मानसिकता रखने वाले लोग झारखंड के भविष्य और जनता की भलाई नहीं सोच सकते।
राजनीतिक भाषा और मर्यादा पर सवाल
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि बाबूलाल मरांडी हाल के दिनों में लगातार जिस भाषा और लहजे का प्रयोग एक निर्वाचित मुख्यमंत्री के लिए कर रहे हैं, वह न तो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है और न ही किसी वरिष्ठ नेता को शोभा देती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इससे भाजपा द्वारा उन्हें दिए गए उनके तथाकथित “राजनीतिक संस्कार” साफ झलकते हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा के कई नेता अब तथ्य आधारित राजनीति छोड़कर केवल उकसाने वाली बयानबाजी के सहारे जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसका सीधा नुकसान राज्य की छवि और सामाजिक सौहार्द को हो रहा है।
जनसुनवाई में हमला नहीं, संवादहीनता बनी वजह
बड़कागांव जनसुनवाई मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए सोनाल शांति ने कहा कि जनसुनवाई स्थल पर किसी प्रकार का संगठित या आपराधिक हमला नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि कोल कंपनियों की संवादहीनता और स्थानीय ग्रामीणों की आशंकाओं को गंभीरता से न लिए जाने के कारण तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई थी।
उन्होंने बताया कि गोंदलपुरा कोल ब्लॉक से संबंधित जनसुनवाई के दौरान ग्रामीण जमीन अधिग्रहण के विरोध में जनसुनवाई स्थगित करने की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों का कहना था कि उनकी समस्याओं और आपत्तियों को सुने बिना जबरन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसी असंतोष के कारण स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हुई।
प्रशासन की तत्परता से टली बड़ी घटना
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए हालात पर नियंत्रण पा लिया। किसी भी प्रकार की बड़ी अप्रिय घटना नहीं घटी और शांति व्यवस्था बनाए रखी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे सुनियोजित हिंसा या अपराध से जोड़ना सरासर गलत और भ्रामक है।
ग्रामीणों को ‘नकाबपोश गुंडा’ बताने का आरोप
सोनाल शांति ने आरोप लगाया कि बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में ग्रामीण महिला और पुरुषों को “नकाबपोश गुंडे” बताकर झारखंड के ग्रामीण समाज का घोर अपमान किया है। उन्होंने कहा कि यह बयान भाजपा नेताओं की ग्रामीण और आदिवासी विरोधी सोच को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि झारखंड के ग्रामीण मेहनतकश लोग हैं, जो अपनी जमीन, जंगल और जल की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते हैं। उन्हें अपराधी करार देना निंदनीय है। भाजपा नेताओं में ग्रामीणों के प्रति घृणा इस कदर बढ़ गई है कि उन्हें आम नागरिक और अपराधियों में फर्क तक नजर नहीं आ रहा।
लोकतंत्र में जनसुनवाई का महत्व
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जनसुनवाई लोकतंत्र का एक अहम स्तंभ है, जहां आम नागरिकों को अपनी बात रखने और आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार होता है। इसे साजिश या अराजकता से जोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। कांग्रेस पार्टी हमेशा जनभावनाओं के साथ खड़ी रही है और आगे भी रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड की जनता सब देख और समझ रही है। झूठे आरोपों और भड़काऊ बयानों से सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता।
झारखंड की छवि से समझौता नहीं
अंत में सोनाल शांति ने कहा कि कांग्रेस पार्टी झारखंड की छवि, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। राज्य को बदनाम करने की किसी भी कोशिश का राजनीतिक और वैचारिक स्तर पर डटकर जवाब दिया जाएगा।




