SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक विभागों को प्रदेश चुनाव समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाने का फैसला
रांची, 28 जनवरी 2026।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सामाजिक न्याय, समावेशिता और संवैधानिक मूल्यों को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी निर्णय लिया है। पार्टी ने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यक (Minority) विभागों के प्रदेश अध्यक्षों को प्रदेश चुनाव समिति (Pradesh Election Committee – PEC) में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल करने का निर्णय किया है। इस फैसले को कांग्रेस की सामाजिक न्याय की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि यह निर्णय न केवल संगठनात्मक दृष्टि से बल्कि लोकतांत्रिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा वंचित, शोषित और हाशिये पर खड़े समाज के वर्गों की आवाज़ को मजबूती देने का कार्य किया है और यह निर्णय उसी परंपरा को आगे बढ़ाने वाला है।
शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में लिया गया फैसला
यह निर्णय माननीय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, श्री के. राजू सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में लिया गया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि चुनावी निर्णय प्रक्रिया में समाज के सभी वर्गों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जाए, तो लोकतंत्र अधिक मजबूत और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनता है।
उम्मीदवार चयन प्रक्रिया होगी अधिक समावेशी
इस निर्णय के तहत अब SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक विभागों के प्रदेश अध्यक्ष विधानसभा चुनावों सहित अन्य चुनावों में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। प्रदेश चुनाव समिति में उनकी भागीदारी से जमीनी हकीकत, सामाजिक संतुलन और वास्तविक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में सामाजिक विविधता को लेकर जो आलोचनाएँ होती रही हैं, इस फैसले से उन पर काफी हद तक विराम लगेगा। जिन वर्गों की जनसंख्या राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, उनकी सीधी भागीदारी से पार्टी का संगठनात्मक आधार भी और मजबूत होगा।
सामाजिक न्याय की नीति का जीवंत प्रमाण
सतीश पौल मुंजनी ने कहा कि यह कदम कांग्रेस पार्टी की उस नीति का जीवंत प्रमाण है, जो भारत के संविधान के मूल मूल्यों—समता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व—पर आधारित है। कांग्रेस का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक सामाजिक न्याय और समान अवसर की लड़ाई से जुड़ा रहा है। दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा कांग्रेस की वैचारिक प्रतिबद्धता का अहम हिस्सा रही है।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल एक संगठनात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि यह संदेश देता है कि कांग्रेस पार्टी सत्ता की राजनीति से अधिक समाज की राजनीति को प्राथमिकता देती है।
वंचित वर्गों की आवाज़ को मिलेगा निर्णायक मंच
प्रदेश चुनाव समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल होने से इन विभागों के अध्यक्ष अब केवल सलाहकार नहीं रहेंगे, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में उनकी राय को गंभीरता से सुना जाएगा। इससे वंचित और पिछड़े वर्गों से आने वाले योग्य, ईमानदार और संघर्षशील नेताओं को टिकट मिलने की संभावनाएँ बढ़ेंगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला कांग्रेस को जमीनी स्तर पर नई ऊर्जा देगा और उन वर्गों के बीच भरोसा मजबूत करेगा, जो लंबे समय से राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग करते रहे हैं।
प्रदेश नेतृत्व ने जताया आभार
इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष साहू, अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष केदार पासवान, अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मंजूर अंसारी तथा आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जोसाई मार्डी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला कांग्रेस पार्टी की नीयत और नीति दोनों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
इन नेताओं ने भरोसा जताया कि वे इस जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करेंगे तथा समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज़ को पार्टी के निर्णयों तक पहुंचाएंगे।
झारखंड की राजनीति में दूरगामी प्रभाव
झारखंड जैसे राज्य में, जहां SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक वर्गों की बड़ी आबादी है, इस निर्णय के दूरगामी राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि इससे कांग्रेस पार्टी का जनाधार मजबूत होगा और संगठन को नई दिशा मिलेगी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक विभागों के प्रदेश अध्यक्षों को प्रदेश चुनाव समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाना कांग्रेस पार्टी का एक साहसिक, दूरदर्शी और ऐतिहासिक निर्णय है। यह फैसला न केवल पार्टी संगठन को मजबूत करेगा, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में सामाजिक न्याय और समावेशी राजनीति की अवधारणा को भी नई ऊंचाई देगा।
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि कांग्रेस पार्टी आज भी संविधान के मूल्यों और सामाजिक न्याय की विचारधारा के साथ मजबूती से खड़ी है।




