अवैध शराब तस्करी : झारखंड और बिहार के बीच अवैध शराब की तस्करी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। बिहार में 2016 से शराबबंदी लागू होने के बाद से अवैध शराब की मांग लगातार बढ़ी है, जिसका फायदा उठाकर तस्कर झारखंड और अन्य राज्यों से शराब की आपूर्ति कर रहे हैं। पुलिस और उत्पाद विभाग की लगातार कार्रवाई के बावजूद यह नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर कानून से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
बिहार में शराबबंदी और तस्करी का बढ़ता कारोबार
बिहार सरकार ने 2016 में शराब के निर्माण, बिक्री, परिवहन और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कानून लागू किया था। इस कानून के तहत शराब से जुड़े लगभग सभी गतिविधियों पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
हालांकि इस प्रतिबंध के बाद भी राज्य में शराब की मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई। इसके कारण तस्करों के लिए अवैध व्यापार का बड़ा मौका पैदा हो गया। तस्कर झारखंड, पश्चिम बंगाल और अन्य पड़ोसी राज्यों से शराब लाकर बिहार में ऊंचे दामों पर बेचते हैं। यही वजह है कि सीमा क्षेत्रों में तस्करी का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है।
झारखंड से बिहार तक सक्रिय तस्करी का नेटवर्क
झारखंड पुलिस और उत्पाद विभाग की कई कार्रवाईयों में यह खुलासा हुआ है कि शराब की बड़ी खेप झारखंड से बिहार भेजी जाती है। कई मामलों में पुलिस ने ट्रकों और वाहनों में भारी मात्रा में शराब बरामद की है।
एक कार्रवाई में पुलिस ने रांची और कोडरमा में छापेमारी कर दो ट्रकों से करीब 77 लाख रुपये की अवैध विदेशी शराब जब्त की थी। जांच में पता चला कि यह शराब पश्चिम बंगाल के आसनसोल से लाई गई थी और बिहार भेजी जा रही थी।
इसी तरह बोकारो जिले में झारखंड एटीएस और बिहार निषेध इकाई ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध शराब बनाने और सप्लाई करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। इस छापेमारी में 1500 लीटर से अधिक शराब और 360 लीटर स्पिरिट बरामद की गई, जबकि 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इन मामलों से साफ है कि यह सिर्फ छोटे स्तर का अपराध नहीं बल्कि संगठित गिरोहों द्वारा संचालित बड़ा नेटवर्क है।
तस्करों के नए-नए तरीके
अवैध शराब की तस्करी रोकने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन तस्कर हर बार नए तरीके खोज लेते हैं। कई बार शराब की खेप को छिपाकर ट्रकों, निजी वाहनों और यहां तक कि सरकारी वाहनों के रूप में दिखने वाले वाहनों में भी ले जाया जाता है।
एक मामले में धनबाद के निरसा क्षेत्र में पुलिस ने एक पिकअप वैन को पकड़ा, जिस पर डाक विभाग का लोगो लगा हुआ था। जांच के दौरान वाहन से 175 कार्टन बीयर बरामद हुई। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से इस तरीके से शराब की तस्करी कर रहे थे।
इसके अलावा ट्रेन और बसों के जरिए भी शराब की तस्करी के मामले सामने आते रहते हैं। कई बार छोटे-छोटे पैकेटों में शराब ले जाकर बिहार में ऊंचे दामों पर बेची जाती है।
सीमा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सक्रिय नेटवर्क
झारखंड और बिहार की सीमा से लगे जिले जैसे बोकारो, कोडरमा, गिरिडीह, धनबाद और साहिबगंज तस्करों के लिए सबसे आसान रास्ता बन गए हैं। इन क्षेत्रों से होकर बड़ी मात्रा में शराब बिहार पहुंचती है।
तस्कर अक्सर रात के समय या ग्रामीण रास्तों का इस्तेमाल करते हैं ताकि पुलिस की नजर से बच सकें। कई बार शराब को कोयला या अन्य सामान के नीचे छिपाकर ट्रकों में भेजा जाता है।
स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा
अवैध शराब का कारोबार सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है बल्कि यह लोगों की सेहत के लिए भी बड़ा खतरा है। कई बार अवैध शराब जहरीली साबित होती है और इससे बड़ी संख्या में लोगों की मौत तक हो चुकी है।
2022 में बिहार में जहरीली शराब पीने से 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना ने अवैध शराब के खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध शराब में अक्सर जहरीले रसायन मिलाए जाते हैं, जो मानव शरीर के लिए बेहद घातक होते हैं।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
झारखंड और बिहार दोनों राज्यों की पुलिस अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। झारखंड में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए जिम्मेदार है और समय-समय पर छापेमारी करता रहता है।
हाल के वर्षों में कई बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है और करोड़ों रुपये की शराब जब्त की गई है। इसके बावजूद तस्करी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तस्कर संगठित तरीके से काम करते हैं और कई राज्यों में फैले नेटवर्क के जरिए शराब की आपूर्ति करते हैं। इसलिए इस समस्या से निपटने के लिए अंतर-राज्यीय स्तर पर समन्वय जरूरी है।
निष्कर्ष
झारखंड से बिहार तक फैला अवैध शराब का नेटवर्क कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। बिहार में शराबबंदी के कारण जहां एक ओर सामाजिक सुधार की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर तस्करों ने इसे बड़े अवैध कारोबार में बदल दिया है।
पुलिस और प्रशासन की लगातार कार्रवाई के बावजूद यह नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए सीमा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, खुफिया तंत्र को मजबूत करने और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।
जब तक शराब की अवैध मांग बनी रहेगी, तब तक तस्करी का यह कारोबार पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है। इसलिए कानून के सख्त पालन के साथ-साथ जागरूकता और सामाजिक पहल भी जरूरी है, ताकि अवैध शराब के इस नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।




