Jharkhand Economic Survey 2025-26 : झारखंड सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने राज्य की अर्थव्यवस्था की एक सशक्त और आशावादी तस्वीर सामने रखी है। सर्वेक्षण के अनुसार, झारखंड की आर्थिक विकास दर कई प्रमुख संकेतकों में राष्ट्रीय औसत से बेहतर रही है। यह रिपोर्ट न केवल राज्य के आर्थिक आकार में वृद्धि को दर्शाती है, बल्कि आम नागरिकों की आय, उपभोग क्षमता और जीवन स्तर में आए सुधार की भी पुष्टि करती है।
वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत इस सर्वेक्षण में बताया गया कि बीते एक दशक में झारखंड की अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय प्रगति की है और अब राज्य तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो रहा है।
दस वर्षों में दोगुनी हुई राज्य की अर्थव्यवस्था
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2011-12 को आधार वर्ष मानें तो झारखंड का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) अब दोगुने से अधिक हो चुका है।
- 2011-12 में जहां राज्य का GSDP सीमित स्तर पर था,
- वहीं 2024-25 तक यह तेज़ी से बढ़ा है और
- 2025-26 में इसके ₹5.50 लाख करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है।
यह वृद्धि दर्शाती है कि झारखंड अब केवल खनिज-आधारित अर्थव्यवस्था नहीं रहा, बल्कि सेवाओं, उद्योग और बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ एक विविध आर्थिक ढांचे की ओर बढ़ चुका है।
राष्ट्रीय औसत से बेहतर आर्थिक विकास दर
देश की अर्थव्यवस्था जहां 2025-26 में लगभग 7 से 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, वहीं झारखंड की आर्थिक वृद्धि दर इससे अधिक रहने की बात आर्थिक सर्वेक्षण में कही गई है।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि झारखंड एक युवा राज्य है और लंबे समय तक इसे पिछड़े राज्यों की श्रेणी में गिना जाता रहा है। अब यह आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि राज्य विकास की मुख्यधारा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
पहली बार प्रति व्यक्ति आय ₹1 लाख के पार
झारखंड के लिए एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि प्रति व्यक्ति आय पहली बार ₹1 लाख से अधिक हो गई है।
- आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार,
वर्तमान मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय लगभग ₹1.16 लाख तक पहुंच चुकी है। - आने वाले वर्ष में इसके ₹1.30 से ₹1.35 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।
प्रति व्यक्ति आय में यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि आर्थिक विकास का लाभ धीरे-धीरे आम लोगों तक पहुंच रहा है। इससे उपभोग, बचत और निवेश तीनों में बढ़ोतरी की संभावना बनती है।
सेवा क्षेत्र बना विकास का सबसे बड़ा आधार
झारखंड की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र अब सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा है।
- 2011-12 में जहां सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 38 प्रतिशत थी,
- वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर 45 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।
परिवहन, व्यापार, संचार, बैंकिंग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है। खासकर शहरी क्षेत्रों में सेवा क्षेत्र ने रोज़गार सृजन को गति दी है।
कृषि: आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
हालांकि राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि की हिस्सेदारी धीरे-धीरे घट रही है, फिर भी यह ग्रामीण झारखंड की जीवनरेखा बनी हुई है।
- कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों का योगदान लगभग 12 प्रतिशत के आसपास है।
- सरकार की योजनाएं—जैसे सिंचाई विस्तार, बीज वितरण और किसान सहायता—कृषि उत्पादन को स्थिर बनाए रखने में मदद कर रही हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण में माना गया है कि यदि कृषि में तकनीक और मूल्य-संवर्धन को बढ़ावा दिया जाए, तो यह क्षेत्र फिर से तेज़ गति पकड़ सकता है।
उद्योग और खनन क्षेत्र की भूमिका
झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और इसका औद्योगिक क्षेत्र अब भी अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
- खनन, स्टील, बिजली और विनिर्माण उद्योगों ने
- राज्य के राजस्व,
- निर्यात और
- रोज़गार सृजन में योगदान दिया है।
सरकार का फोकस अब केवल कच्चे खनिज के दोहन पर नहीं, बल्कि मूल्य-संवर्धित उद्योगों को बढ़ावा देने पर है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार बढ़ सके।
महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता
आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि राज्य में महंगाई दर नियंत्रित रही है।
- आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया।
- इससे आम जनता की क्रय शक्ति को सहारा मिला है।
साथ ही, सरकार ने राजकोषीय घाटे को संतुलन में रखते हुए विकास कार्यों पर खर्च बढ़ाया है, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
सामाजिक क्षेत्र में बढ़ता निवेश
झारखंड सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर खर्च में लगातार वृद्धि की है।
- स्कूल और कॉलेजों के बुनियादी ढांचे में सुधार
- स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
- गरीब और आदिवासी वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाएं
इन सभी प्रयासों का असर दीर्घकाल में मानव संसाधन विकास पर पड़ने की उम्मीद है।
आगे की राह: अवसर और चुनौतियां
अवसर:
- तेज़ी से बढ़ता सेवा क्षेत्र
- बुनियादी ढांचे में निवेश
- युवा आबादी और कौशल विकास की संभावनाएं
चुनौतियां:
- बेरोज़गारी की समस्या
- कृषि क्षेत्र में आय की असमानता
- कुछ क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश की कमी
आर्थिक सर्वेक्षण मानता है कि यदि नीतिगत सुधारों को सही दिशा में लागू किया गया, तो झारखंड अगले कुछ वर्षों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
निष्कर्ष
झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 यह स्पष्ट करता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत नींव पर आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय औसत से बेहतर विकास दर, बढ़ती प्रति व्यक्ति आय और संतुलित क्षेत्रीय विकास झारखंड को एक नई पहचान दे रहे हैं।
अब आवश्यकता है कि इस विकास की गति को बनाए रखते हुए इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जाए, ताकि झारखंड वास्तव में समावेशी और टिकाऊ विकास की मिसाल बन सके।




