झारखंड विधानसभा का बजट सत्र शुरू — झारखंड की सियासत और विकास की दिशा तय करने वाला विधानसभा बजट सत्र औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। राजधानी रांची स्थित झारखंड विधानसभा में आरंभ हुए इस सत्र में वित्तीय वर्ष 2026–27 का आम बजट प्रस्तुत किया जाएगा। सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से हुई, जिसमें सरकार की उपलब्धियों, नीतिगत प्राथमिकताओं और आगामी योजनाओं का खाका रखा गया। यह सत्र न केवल बजट पर चर्चा का मंच है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, सामाजिक न्याय, कानून-व्यवस्था और शासन-प्रणाली से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब भी यहीं तलाशे जाएंगे।
बजट सत्र की रूपरेखा और प्रमुख तिथि-गत कार्यक्रम
- 18 फरवरी 2026 – बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत; राज्यपाल का अभिभाषण
- 19 फरवरी – धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा
- 20 फरवरी – चालू वित्त वर्ष 2025-26 का तृतीय अनुपूरक व्यय पेश
- 24 फरवरी – वित्तीय वर्ष 2026-27 का आम बजट सदन में प्रस्तुत
- 25 फरवरी – बजट पर सामान्य चर्चा
- 19 मार्च – बजट सत्र का समापनसत्र
सत्र के दौरान सदन में अनुदान मांगों, वित्तीय प्रस्तावों, और विभिन्न नियमों व विधेयकों पर विस्तृत बहस की जाएगी। प्रक्रिया के दौरान कयास है कि विपक्ष अपनी आलोचनात्मक भूमिका निभाते हुए सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश करेगा।
सर्वदलीय बैठक और सदन की कार्यसूची
सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हुई, जिसमें सत्तापक्ष और विपक्ष ने सदन के सुचारु संचालन पर सहमति जताई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार रचनात्मक बहस के लिए तैयार है और जनता से जुड़े मुद्दों पर खुला संवाद चाहती है। वहीं विपक्ष ने भी यह संकेत दिया कि वह सरकार को जवाबदेह बनाने में कोई कोताही नहीं बरतेगा। सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य टकराव से बचते हुए सार्थक बहस को बढ़ावा देना रहा।
बजट से अपेक्षाएँ: विकास और कल्याण का संतुलन
राज्य की आर्थिक स्थिति, राजस्व संग्रह और केंद्र से मिलने वाले अनुदानों को देखते हुए इस बार के बजट से संतुलित विकास की उम्मीद की जा रही है। सरकार का फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार सृजन, शिक्षा-स्वास्थ्य में निवेश बढ़ाने और बुनियादी ढांचे को गति देने पर बताया जा रहा है।
- कृषि और ग्रामीण विकास: सिंचाई, बीज-उर्वरक, किसानों की आय बढ़ाने और विपणन सुविधाओं पर जोर।
- शिक्षा: स्कूल-इन्फ्रास्ट्रक्चर, शिक्षक प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति और डिजिटल लर्निंग।
- स्वास्थ्य: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की मजबूती, जिला अस्पतालों का उन्नयन और दवाओं की उपलब्धता।
- रोजगार: कौशल विकास, स्टार्टअप्स और स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन।
विपक्ष के प्रमुख मुद्दे
विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, धान खरीद, न्यूनतम समर्थन मूल्य, नियुक्तियों में पारदर्शिता और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरेंगे। उनका कहना है कि बजट घोषणाओं के साथ-साथ ज़मीनी अमल पर भी स्पष्ट रोडमैप सामने आना चाहिए।
डिजिटल और पेपरलेस कार्यवाही: आधुनिक विधानसभा की ओर कदम
इस बजट सत्र की एक बड़ी खासियत डिजिटल (पेपरलेस) कार्यवाही है। राष्ट्रीय ई-विधान (NeVA) प्रणाली के जरिए सदन की प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। विधायक अब टैबलेट/डिजिटल डिवाइस पर कार्यसूची, प्रश्न, बजट दस्तावेज और संशोधन प्रस्ताव देख सकेंगे।
इसके फायदे स्पष्ट हैं—कागज की बचत, त्वरित सूचना-प्रवाह, पारदर्शिता और समय की दक्षता। हालांकि, कुछ वरिष्ठ सदस्यों के लिए डिजिटल प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई है, ताकि सभी सदस्य समान रूप से इस बदलाव का लाभ उठा सकें।
विधायी कामकाज और संभावित विधेयक
बजट सत्र में वित्तीय कार्यों के साथ-साथ कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा संभव है। इनमें प्रशासनिक सुधार, सामाजिक कल्याण, स्थानीय निकायों की भूमिका और सेवा-वितरण को बेहतर बनाने से जुड़े प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं। सरकार का दावा है कि विधायी प्राथमिकताएँ जनता की आवश्यकताओं और विकास लक्ष्यों के अनुरूप होंगी।
राज्य की आर्थिक तस्वीर और राजस्व चुनौतियाँ
झारखंड की अर्थव्यवस्था खनिज संसाधनों पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में राजस्व संग्रह, जीएसटी, खनन रॉयल्टी और केंद्रीय अनुदानों का प्रबंधन बजट की दिशा तय करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्व बढ़ाने के साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखना चुनौती है। सरकार यदि पूंजीगत व्यय बढ़ाती है तो दीर्घकाल में विकास को गति मिल सकती है, बशर्ते परियोजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध हो।
सामाजिक न्याय और समावेशी विकास
बजट से आदिवासी और पिछड़े वर्गों, महिलाओं और युवाओं के लिए लक्षित कार्यक्रमों की अपेक्षा है। स्वयं सहायता समूह, महिला उद्यमिता, पोषण और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में विशेष प्रावधान राज्य के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत कर सकते हैं। समावेशी विकास की कसौटी पर बजट की घोषणाएँ और उनका अमल दोनों परखें जाएंगे।
सदन की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपरा
हर बजट सत्र लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक होता है। सत्ता और विपक्ष की बहस, सवाल-जवाब और सहमति-असहमति के बीच ही बेहतर नीतियाँ निकलती हैं। इस सत्र में भी उम्मीद है कि तीखी बहस के बावजूद सदन की गरिमा बनी रहेगी और जनहित सर्वोपरि रहेगा।
निष्कर्ष
झारखंड विधानसभा का यह बजट सत्र आर्थिक दिशा, सामाजिक प्राथमिकताओं और प्रशासनिक सुधारों के लिहाज से निर्णायक साबित हो सकता है। डिजिटल कार्यवाही के साथ आधुनिकता की ओर कदम, और विकास-कल्याण के संतुलन की कोशिश—दोनों इस सत्र की पहचान हैं। अब निगाहें 24 फरवरी को पेश होने वाले बजट और उस पर होने वाली बहस पर टिकी हैं, जो बताएगी कि राज्य सरकार आने वाले वर्ष में झारखंड को किस राह पर ले जाना चाहती है।


