जमीन सर्वे पर बवाल : झारखंड के लातेहार जिले में जमीन सर्वे को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जिले के सदर थाना क्षेत्र के केमा (कैमा) गांव में प्रस्तावित कोल ब्लॉक परियोजना के लिए हो रहे जमीन सर्वे के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखा टकराव हो गया। इस दौरान आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद आठ पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को आत्मरक्षा में कई राउंड फायरिंग करनी पड़ी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
ड्रोन सर्वे का ग्रामीणों ने किया विरोध
जानकारी के अनुसार, केमा गांव के आसपास प्रस्तावित तुबिद कोल ब्लॉक परियोजना के लिए जमीन का सर्वे किया जा रहा था। इस सर्वे के लिए निजी कंपनी की टीम ड्रोन कैमरे की मदद से इलाके का निरीक्षण कर रही थी। जैसे ही ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, वे बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए और सर्वे का विरोध शुरू कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ग्राम सभा की अनुमति के उनके क्षेत्र में ड्रोन के जरिए सर्वे कराया जा रहा था। इससे लोगों में भारी नाराजगी फैल गई। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया और ग्रामीणों ने सर्वे कार्य को रोकने की कोशिश की।
बताया जा रहा है कि इसी दौरान मौके पर मौजूद पुलिस टीम को ग्रामीणों ने घेर लिया और थाना प्रभारी समेत कुल आठ पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया। ग्रामीणों ने पुलिस को कुछ समय तक वहीं रोके रखा और उनके साथ बहस व धक्का-मुक्की भी हुई।
पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई। ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव भी किया, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। दूसरी ओर, पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया।
स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाता देख पुलिस को आत्मरक्षा में हवाई फायरिंग करनी पड़ी। फायरिंग के बाद भीड़ धीरे-धीरे तितर-बितर हो गई और पुलिसकर्मियों को ग्रामीणों के कब्जे से मुक्त कराया गया।
इस घटना में कई ग्रामीणों के भी घायल होने की खबर है। घायल लोगों को इलाज के लिए लातेहार सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
पहले भी हो चुका है विरोध
स्थानीय लोगों के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब जमीन सर्वे का विरोध हुआ है। करीब एक महीने पहले भी इसी इलाके में ड्रोन से सर्वे कराने की कोशिश की गई थी, तब भी ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था।
उस समय ग्रामीणों ने सर्वे में इस्तेमाल किए जा रहे ड्रोन को जब्त कर लिया था और सर्वे कार्य को रोक दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक ग्राम सभा की सहमति नहीं मिलती, तब तक किसी भी कंपनी या प्रशासन को जमीन सर्वे करने का अधिकार नहीं है।
अनुसूचित क्षेत्र और पेसा कानून का मुद्दा
केमा गांव और आसपास का इलाका अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। ऐसे क्षेत्रों में पेसा (PESA) कानून लागू होता है, जिसके तहत किसी भी विकास परियोजना या जमीन अधिग्रहण से पहले ग्राम सभा की अनुमति लेना जरूरी होता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और कंपनी ने इस नियम का पालन नहीं किया और सीधे ड्रोन सर्वे शुरू कर दिया। इससे लोगों में आक्रोश फैल गया।
ग्रामीण नेताओं का कहना है कि यदि उनकी सहमति के बिना जमीन सर्वे या खनन परियोजना लागू की जाती है तो इससे उनकी जमीन, जंगल और आजीविका पर खतरा पैदा हो सकता है।
प्रशासन की बढ़ी चिंता
घटना की जानकारी मिलते ही जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है।
लातेहार पुलिस के अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आखिर ग्रामीणों का विरोध इतना उग्र क्यों हुआ और किस परिस्थिति में पुलिसकर्मियों को बंधक बनाया गया।
प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी प्रकार की हिंसा या अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इलाके में तनाव का माहौल
इस घटना के बाद केमा गांव और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल बना हुआ है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर गांव में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी है।
स्थानीय लोगों में भी घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे ग्रामीणों के अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद की कमी रहती है तो ऐसे विवाद आगे भी सामने आ सकते हैं।
खनन परियोजनाओं को लेकर बढ़ते विवाद
झारखंड खनिज संपदा से भरपूर राज्य है और यहां कई कोल ब्लॉक और खनन परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। लेकिन इन परियोजनाओं को लेकर अक्सर स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच विवाद देखने को मिलता है।
ग्रामीणों का कहना है कि खनन परियोजनाओं से उनकी जमीन छिन जाती है और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ता है। वहीं प्रशासन और कंपनियां इसे क्षेत्र के विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़कर देखती हैं।
इसी वजह से कई बार जमीन अधिग्रहण और सर्वे कार्य के दौरान विरोध और टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है।
आगे क्या हो सकता है
लातेहार की इस घटना के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इलाके में शांति बहाल करना और ग्रामीणों का भरोसा जीतना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्राम सभा और स्थानीय समुदाय के साथ संवाद स्थापित किया जाए तो इस तरह के विवादों को कम किया जा सकता है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे। जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
हालांकि प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल इलाके में शांति बनाए रखना और स्थिति को सामान्य करना है।
Disclaimer
यह समाचार विभिन्न स्थानीय रिपोर्ट्स और प्रशासनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। घटना से संबंधित जांच जारी है, इसलिए आगे की जानकारी आने पर तथ्यों में बदलाव संभव है।




