झारखंड में आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की बढ़ती सक्रियता पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ नेता अनंत प्रताप देव ने बड़ा और तीखा बयान दिया है। उन्होंने बीजेपी की रणनीति और मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पार्टी 2024 के विधानसभा चुनाव में मिली हार से अब तक उबर नहीं पाई है और इसी सदमे के कारण वह नगर निकाय चुनाव को असामान्य रूप से गंभीरता से ले रही है।
अनंत प्रताप देव का कहना है कि बीजेपी की यह सक्रियता डर और राजनीतिक असुरक्षा का परिणाम है, न कि जनता के मुद्दों के प्रति उसकी वास्तविक प्रतिबद्धता।
“2024 की हार से उबर नहीं पाई बीजेपी”
अनंत प्रताप देव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 2024 के विधानसभा चुनाव में मिली हार ने बीजेपी को गहरा झटका दिया है। यही वजह है कि पार्टी अब हर चुनाव को जीत-हार की लड़ाई के रूप में देख रही है।
उन्होंने कहा,
“बीजेपी 2024 की हार को अभी तक पचा नहीं पाई है। इसी कारण वह नगर निकाय चुनाव को जीवन-मरण का प्रश्न मानकर मैदान में उतर गई है।”
उनके अनुसार, यह डर ही है जो बीजेपी को आक्रामक राजनीति अपनाने और स्थानीय चुनावों को भी राष्ट्रीय या पार्टी वर्चस्व की लड़ाई बनाने के लिए मजबूर कर रहा है।
पंचम बजट सत्र से दूरी, लेकिन नगर चुनाव में पूरी ताकत
अनंत प्रताप देव ने बीजेपी की रणनीति पर सवाल उठाते हुए एक अहम विरोधाभास की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर पंचम बजट सत्र के दौरान विधानसभा में बीजेपी की मौजूदगी तक प्रभावी रूप से नजर नहीं आई, वहीं दूसरी ओर नगर निकाय चुनाव में पार्टी पूरी ताकत झोंक रही है।
उन्होंने कहा,
“जब राज्य के बजट और जनता से जुड़े बड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही थी, तब बीजेपी विधानसभा से नदारद रही। लेकिन नगर निकाय चुनाव आते ही पार्टी को जनता की याद आ गई।”
उनका आरोप है कि बीजेपी की राजनीति अवसरवादी हो चुकी है, जहां जनता के वास्तविक मुद्दों से ज्यादा चुनावी गणित को प्राथमिकता दी जाती है।
“नगर निकाय चुनाव पार्टी नहीं, जनता से जुड़ा मुद्दा”
अनंत प्रताप देव ने जोर देकर कहा कि नगर निकाय चुनाव को पार्टी बनाम पार्टी की लड़ाई बनाना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव शहर की बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छता, जल आपूर्ति, सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और स्थानीय प्रशासन से जुड़ा होता है।
उन्होंने कहा,
“नगर निकाय चुनाव जनता से जुड़ा चुनाव है, न कि किसी पार्टी की सियासी प्रतिष्ठा का सवाल। बीजेपी इसे राजनीतिक युद्ध बना रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।”
उनका मानना है कि स्थानीय निकायों में ऐसे प्रतिनिधियों की जरूरत होती है जो जमीन से जुड़े हों और शहर की समस्याओं को समझते हों, न कि ऐसे नेता जो सिर्फ पार्टी एजेंडे पर काम करें।
जनता अब पहले से ज्यादा जागरूक: अनंत प्रताप देव
अनंत प्रताप देव ने यह भी दावा किया कि अब जनता पहले से कहीं अधिक जागरूक और समझदार हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लोग केवल नारों और बड़े-बड़े वादों से प्रभावित नहीं होते, बल्कि काम और नीतियों के आधार पर फैसला लेते हैं।
उनके अनुसार,
“जनता सब देख रही है। कौन विधानसभा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है और कौन सिर्फ चुनाव के समय सामने आता है – यह अब किसी से छिपा नहीं है।”
उन्होंने भरोसा जताया कि नगर निकाय चुनाव में भी जनता बीजेपी को उसकी राजनीति का जवाब देगी।
“नगर चुनाव में भी बीजेपी को मिलेगी हार”
अपने बयान में अनंत प्रताप देव ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि नगर निकाय चुनाव में भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह विधानसभा चुनाव में जनता ने बीजेपी को नकारा था, उसी तरह स्थानीय चुनाव में भी लोग उसे सबक सिखाएंगे।
उनका कहना है कि विपक्षी दल जनता के मुद्दों को लेकर लगातार मैदान में हैं, जबकि बीजेपी सिर्फ चुनावी समय में सक्रिय दिखती है।
राजनीतिक माहौल हुआ और गरम
अनंत प्रताप देव के इस बयान के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। नगर निकाय चुनाव पहले ही सियासी रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं और ऐसे में इस तरह के तीखे बयान चुनावी माहौल को और गर्म करने वाले हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में नगर निकाय चुनाव को लेकर बयानबाजी और तेज होगी और सभी दल जनता को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक देंगे।
निष्कर्ष
अनंत प्रताप देव का बयान साफ संकेत देता है कि नगर निकाय चुनाव अब सिर्फ स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि राजनीतिक दलों के लिए यह विश्वसनीयता और जनसमर्थन की परीक्षा बनते जा रहे हैं।
उन्होंने जहां बीजेपी की सक्रियता को 2024 की हार से उपजा डर बताया, वहीं जनता की जागरूकता पर भरोसा जताते हुए दावा किया कि फैसला फिर से जनता के पक्ष में ही जाएगा।
अब देखना यह होगा कि नगर निकाय चुनाव में जनता किस पर भरोसा जताती है और किसे सियासी संदेश देती है।




