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राहे-गोमदा जलापूर्ति योजना चार वर्षों से ठप, ग्रामीणों में हाहाकार | Ranchi News | Bhaiyajii News

राहे गोमदा जलापूर्ति योजना | Ranchi News | bhaiyajii NewsA

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पेयजल मंत्री से मिलकर जीर्णोद्धार की उठाई मांग

राहे गोमदा जलापूर्ति योजना – रांची जिले के राहे प्रखंड अंतर्गत गोमदा ग्रामीण जलापूर्ति योजना के पिछले चार वर्षों से बंद पड़े होने के कारण क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेन्द्र प्रसाद से मुलाकात कर योजना के शीघ्र जीर्णोद्धार की मांग की है।

प्रदेश अध्यक्ष ने मंत्री को अवगत कराया कि राहे प्रखंड के राहे, गोमदा और काटेयाडीह—तीनों मौजा मिलाकर लगभग 470 परिवारों ने इस योजना के अंतर्गत कनेक्शन ले रखा है। योजना के बंद हो जाने से ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

1987 में शुरू हुई थी जलापूर्ति योजना

जानकारी के अनुसार, वर्ष 1987 में राहे के उत्तरी हिस्से में प्रवाहित कोकरो नदी पर लघु सिंचाई विभाग द्वारा एक कुएँ का निर्माण कराया गया था। इस कुएँ से डीज़ल पंप के माध्यम से राहे गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति की जाती थी। उस समय यह योजना ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा साबित हुई थी। लगभग 23 वर्षों तक, यानी 2010 तक, यह व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही।

2011 में चौक डैम निर्माण से बढ़ी उम्मीद

वर्ष 2011 में गोमदा ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत उसी कुएँ के नीचे चौक डैम का निर्माण कराया गया। इसके बाद जलापूर्ति की व्यवस्था और सुदृढ़ हुई और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने नल कनेक्शन लिए। लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी।

बरसात में धंसा चौक डैम, योजना पूरी तरह बंद

करीब चार वर्ष पूर्व भारी बारिश के दौरान चौक डैम धंस गया। डैम के धंसने से कुएँ में बड़ी मात्रा में बालू भर गई, जिससे पंपिंग सिस्टम पूरी तरह खराब हो गया। इसके बाद से गोमदा (राहे) जलापूर्ति योजना पूरी तरह ठप हो गई। कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका।

कर्मचारियों की कमी ने बढ़ाई समस्या

जलापूर्ति योजना से जुड़े मानव संसाधन की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है।

  • श्री तापस कुमार बनर्जी वर्ष 1987 से 2018 तक पंप ऑपरेटर के रूप में कार्यरत रहे, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उनकी जगह किसी की नियुक्ति नहीं हुई।
  • दूसरे ऑपरेटर सदाई सिंह का निधन हो गया।
  • बाद में लाल मोहन सिंह ने कुछ समय तक कार्य संभाला, लेकिन पुलिस की नौकरी लगने के बाद उन्होंने भी काम छोड़ दिया।

वर्तमान में योजना के संचालन के लिए एक भी स्थायी या अस्थायी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है, जिससे जलापूर्ति बहाल करने में और बाधा आ रही है।

नल-जल योजना भी नहीं हो सकी लागू

प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, पहले से चल रही इस जलापूर्ति योजना के कारण पंचायत स्तर पर टंकी लगाकर नल-जल योजना भी लागू नहीं की जा सकी। ग्रामीण इसी योजना पर निर्भर थे। योजना बंद होने के बाद अचानक वैकल्पिक व्यवस्था न होने से स्थिति और भयावह हो गई है।

ग्रामीणों में आक्रोश, पानी के लिए रोज़ाना संघर्ष

राहे, गोमदा और काटेयाडीह के ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो जाती है। कई परिवारों को पीने का पानी लाने के लिए रोज़ाना कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराज़गी भी बढ़ती जा रही है।

मंत्री से शीघ्र कार्रवाई का आग्रह

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने मंत्री से आग्रह किया कि ग्रामीणों के हित को देखते हुए गोमदा (राहे) जलापूर्ति योजना का तत्काल तकनीकी सर्वे, चौक डैम की मरम्मत, कुएँ की सफाई तथा कर्मचारियों की नियुक्ति कर जलापूर्ति बहाल की जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल सुविधा का नहीं, बल्कि मूलभूत अधिकार का सवाल है।

सकारात्मक आश्वासन की उम्मीद

मुलाकात के दौरान मंत्री ने मामले को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि वर्षों से चली आ रही इस समस्या का समाधान जल्द निकलेगा और उन्हें फिर से अपने घरों में नल से पानी मिल सकेगा।

बयान

राकेश सिन्हा
महासचिव सह मीडिया प्रभारी
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी

Manish Singh Chandel

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