रांची पशु तस्करी : झारखंड की राजधानी रांची में पुलिस ने पशु तस्करी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में तस्करों ने पुलिस और स्थानीय लोगों को भ्रमित करने के लिए बेहद चौंकाने वाला तरीका अपनाया था। वाहनों पर धार्मिक नारे लिखकर पशुओं की अवैध तस्करी की जा रही थी। पुलिस की सतर्कता और गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में बड़ी संख्या में मवेशियों को जब्त किया गया और कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस घटना ने एक बार फिर राज्य में पशु तस्करी के बढ़ते नेटवर्क और उसके तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गुप्त सूचना पर पुलिस की छापेमारी
जानकारी के अनुसार रांची जिले के ओरमांझी थाना क्षेत्र में पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि इरबा गांव के मदरसा मोहल्ला इलाके में बड़ी संख्या में मवेशियों को अवैध रूप से रखा गया है। इन पशुओं को ट्रकों और पिकअप वाहनों में लादकर दूसरे राज्यों में भेजने की तैयारी चल रही थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम सक्रिय हो गई और तुरंत छापेमारी की योजना बनाई।पुलिस जब मौके पर पहुंची तो वहां कई वाहन खड़े मिले, जिनमें मवेशियों को भरकर ले जाने की तैयारी की जा रही थी। छापेमारी के दौरान पुलिस ने कुल 41 मवेशियों को जब्त किया और उन्हें कब्जे में ले लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इन पशुओं को पश्चिम बंगाल भेजने की तैयारी की जा रही थी।
धार्मिक नारों का इस्तेमाल कर रहे थे तस्कर
इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि तस्करों ने वाहनों पर धार्मिक नारे लिख रखे थे। कुछ गाड़ियों पर “जय माता दी” और “जय बजरंगबली” जैसे नारे लिखे गए थे। पुलिस का मानना है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि रास्ते में जांच के दौरान किसी को शक न हो और वाहन आसानी से निकल जाएं।विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका इसलिए अपनाया गया क्योंकि कई बार धार्मिक नारों वाले वाहनों को लोग श्रद्धा के कारण रोकने से बचते हैं। तस्करों ने इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाकर अपने अवैध कारोबार को अंजाम देने की कोशिश की।
चार वाहन जब्त, कई आरोपियों पर मामला दर्ज
छापेमारी के दौरान पुलिस ने पशुओं से भरे चार वाहनों को भी जब्त किया। पुलिस की कार्रवाई के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। मौके से कुछ लोग फरार हो गए, जबकि कई आरोपियों की पहचान कर ली गई है।
पुलिस ने इस मामले में कुल आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें स्थानीय गांवों के कई लोग शामिल बताए जा रहे हैं। आरोपियों पर पशु तस्करी और पशु क्रूरता से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
जब्त मवेशियों को गौशाला भेजा गया
पुलिस द्वारा जब्त किए गए सभी मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है। जानकारी के मुताबिक इन्हें फिलहाल हुटूप स्थित गौशाला में रखा गया है, जहां उनकी देखभाल की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि इन पशुओं को अवैध रूप से ले जाया जा रहा था और उनके साथ अमानवीय व्यवहार भी किया जा रहा था। इसलिए उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थान पर भेजना जरूरी था।
ईद से पहले बढ़ जाती है तस्करी की गतिविधि
पुलिस जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि इन पशुओं को आगामी त्योहारों के दौरान दूसरे राज्यों में बेचने के लिए भेजा जा रहा था। कई मामलों में देखा गया है कि त्योहारों के समय पशु तस्करी की घटनाएं बढ़ जाती हैं, क्योंकि उस समय पशुओं की मांग अधिक होती है।
इसी कारण तस्कर ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मवेशियों को इकट्ठा कर ट्रकों और पिकअप वाहनों में भरकर सीमावर्ती राज्यों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
पिछले 10 दिनों में तीसरी बड़ी कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार ओरमांझी इलाके में पिछले कुछ दिनों से पशु तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पिछले 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है।
इससे पहले भी पुलिस ने कई वाहनों को पकड़कर उनमें भरे पशुओं को जब्त किया था। इन कार्रवाइयों से यह संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में पशु तस्करी का नेटवर्क काफी सक्रिय है और लगातार निगरानी की जरूरत है।
कई इलाकों से संचालित होता है नेटवर्क
स्थानीय सूत्रों के अनुसार रांची के आसपास के कई क्षेत्रों से पशु तस्करी का नेटवर्क संचालित होता है। इनमें ओरमांझी, रातू, कांके, पिठोरिया, ठाकुरगांव, अनगड़ा और बुढ़मू जैसे इलाके शामिल बताए जाते हैं।
तस्कर इन इलाकों से पशुओं को इकट्ठा करते हैं और फिर कंटेनर, ट्रक या पिकअप वैन के जरिए उन्हें दूसरे राज्यों में भेज देते हैं। अक्सर यह तस्करी रात के समय की जाती है ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके।
पुलिस ने बढ़ाई निगरानी
इस घटना के बाद पुलिस ने पशु तस्करी पर रोक लगाने के लिए निगरानी और कड़ी कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हाईवे और प्रमुख मार्गों पर विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा।
इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में भी पुलिस और खुफिया तंत्र को सक्रिय किया गया है ताकि इस तरह की गतिविधियों की जानकारी समय रहते मिल सके।
कानून के तहत कड़ी कार्रवाई संभव
पशु तस्करी के मामलों में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अलावा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जाती है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपियों को जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
पुलिस का कहना है कि इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस रैकेट के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
समाज के लिए चेतावनी
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला ही नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है। तस्करों ने धार्मिक नारों का इस्तेमाल करके लोगों की आस्था का दुरुपयोग करने की कोशिश की। इससे यह स्पष्ट होता है कि अपराधी अपने अवैध कारोबार को छिपाने के लिए किस हद तक जा सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए समाज और प्रशासन दोनों को सतर्क रहना होगा। लोगों को भी किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देनी चाहिए।
निष्कर्ष
रांची में पशु तस्करी रैकेट का खुलासा पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। 41 मवेशियों की बरामदगी और कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने से इस अवैध कारोबार पर कुछ हद तक लगाम लगने की उम्मीद है।हालांकि यह भी साफ है कि पशु तस्करी का नेटवर्क अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसलिए पुलिस को लगातार कार्रवाई जारी रखनी होगी और समाज को भी जागरूक होकर ऐसी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठानी होगी।




