राँची (झारखंड): राजधानी राँची के बरियातू पहाड़ स्थित फायरिंग रेंज में शनिवार दोपहर अचानक भीषण आग लगने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आग की लपटें इतनी तेज़ थीं कि दूर-दूर तक आसमान में काले धुएँ का गुबार साफ दिखाई देने लगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, फायरिंग रेंज परिसर में लंबे समय से जमा बड़ी संख्या में पुराने टायरों में आग लगी, जिसने कुछ ही पलों में विकराल रूप धारण कर लिया।
दोपहर में उठा धुआँ, मिनटों में भड़की आग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार दोपहर रेंज के एक हिस्से से अचानक धुआँ उठता नजर आया। शुरुआत में लोगों ने इसे मामूली घटना समझा, लेकिन देखते ही देखते टायरों के ढेर ने आग पकड़ ली। टायरों में लगी आग आमतौर पर बेहद खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि इनके जलने से निकलने वाला धुआँ अत्यंत जहरीला होता है। यही वजह रही कि कुछ ही मिनटों में पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।
काले धुएँ से फैली दहशत, लोगों ने घरों के दरवाज़े किए बंद
जलते टायरों से निकले काले और घने धुएँ ने आसपास के रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। लोगों ने सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और घुटन की शिकायत की। एहतियातन कई घरों में लोगों ने दरवाजे-खिड़कियाँ बंद कर लीं, जबकि कुछ लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर निकल गए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि धुएँ की वजह से दृश्यता भी काफी कम हो गई थी।
सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग सक्रिय
घटना की सूचना मिलते ही सदर थाना की पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुँची। दमकलकर्मियों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया। आग की भयावहता को देखते हुए अतिरिक्त दमकल वाहन भी बुलाए गए। घंटों की मशक्कत के बाद आग को सीमित क्षेत्र में रोकने में सफलता मिली, हालांकि पूरी तरह बुझाने में समय लगा।
टायरों की आग बुझाना क्यों है मुश्किल
विशेषज्ञों के अनुसार, टायरों में लगी आग बुझाना सामान्य आग की तुलना में कहीं अधिक कठिन होता है। टायर रबर और रासायनिक पदार्थों से बने होते हैं, जो लंबे समय तक जलते रहते हैं और पानी से आसानी से नहीं बुझते। कई बार ऐसे मामलों में फोम या मिट्टी का इस्तेमाल करना पड़ता है। इसके अलावा, टायरों के जलने से निकलने वाली गैसें स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होती हैं।
राहत की बात: कोई हताहत नहीं
इस भीषण घटना के बावजूद राहत की सबसे बड़ी खबर यह रही कि अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। पुलिस प्रशासन ने बताया कि समय रहते इलाके को सुरक्षित कर लिया गया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि, धुएँ के कारण कुछ लोगों को असहजता जरूर हुई, जिन्हें प्राथमिक उपचार की सलाह दी गई।
आग लगने के कारणों की जांच शुरू
फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि तेज़ गर्मी, किसी प्रकार की चिंगारी या लापरवाही के चलते टायरों में आग लगी हो सकती है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मामले की जांच में जुट गए हैं। यह भी देखा जा रहा है कि फायरिंग रेंज परिसर में इतने बड़े पैमाने पर पुराने टायर क्यों और किस उद्देश्य से रखे गए थे।
पर्यावरण पर भी पड़ा असर
इस आग का असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचा। टायरों से निकलने वाला धुआँ हवा को गंभीर रूप से प्रदूषित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे धुएँ में कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसें होती हैं, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती हैं। पर्यावरणविदों ने प्रशासन से अपील की है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ।
स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराज़गी
घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराज़गी भी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुराने टायरों को हटाया गया होता या उचित सुरक्षा व्यवस्था की गई होती, तो इतनी बड़ी घटना से बचा जा सकता था। कई लोगों ने फायरिंग रेंज के आसपास सुरक्षा मानकों की समीक्षा की मांग की है।
प्रशासन ने दिए सख्त निर्देश
प्रशासन ने घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि फायरिंग रेंज और अन्य संवेदनशील इलाकों में पड़े ज्वलनशील पदार्थों की सूची तैयार की जाए और उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से हटाया जाए। साथ ही, भविष्य में आग जैसी आपदाओं से निपटने के लिए आपातकालीन व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की बात कही गई है।
निष्कर्ष
बरियातू पहाड़ स्थित फायरिंग रेंज में लगी यह भीषण आग एक बड़ी चेतावनी है कि थोड़ी सी लापरवाही कैसे बड़े हादसे का रूप ले सकती है। हालांकि इस बार कोई जान-माल की हानि नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने प्रशासन, स्थानीय लोगों और पर्यावरण सभी के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उम्मीद है कि जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँगे।




