रांची।
रांची में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान Sanjay Seth, केंद्र राज्य रक्षा मंत्री एवं रांची सांसद, ने नगर निगम चुनाव को लेकर चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं, जिसके कारण लोकतंत्र की निष्पक्षता प्रभावित हुई है। संजय सेठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे इस पूरे मामले को लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे।
मतदाताओं को दूर-दराज के बूथ दिए गए
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय सेठ ने कहा कि चुनाव आयोग और प्रशासन ने मतदाताओं को उनके घर के पास मतदान केंद्र उपलब्ध कराने के बजाय, कई स्थानों पर चार किलोमीटर तक दूर बूथ आवंटित कर दिए। इसका सीधा असर मतदान प्रतिशत पर पड़ा और बड़ी संख्या में लोग वोट डालने नहीं पहुंच सके।
उन्होंने कहा,
“लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत मतदाता होता है, लेकिन जब मतदाता को ही वोट डालने से वंचित कर दिया जाए, तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।”
मेयर प्रत्याशी रोशनी खलखो के चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद
संजय सेठ ने भाजपा की मेयर प्रत्याशी Roshni Khalkho का उल्लेख करते हुए एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रोशनी खलखो का चुनाव चिन्ह “बिस्कुट” था, लेकिन बैलेट पेपर में जानबूझकर ऐसा ही दिखने वाला एक और चिन्ह शामिल किया गया।
उनके अनुसार,
“इस तरह के मिलते-जुलते चिन्ह रखकर मतदाताओं को भ्रमित किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि हजारों वोट गलत जगह चले गए।”
‘सोची-समझी साजिश’ का आरोप
संजय सेठ ने आरोप लगाया कि यह सब सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया, ताकि भाजपा प्रत्याशी को नुकसान पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और बुजुर्ग मतदाता, जो चुनाव चिन्ह के आधार पर वोट डालते हैं, वे सबसे ज्यादा भ्रमित हुए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव चिन्हों के चयन और स्वीकृति की स्पष्ट प्रक्रिया है, तो फिर एक जैसे दिखने वाले चिन्ह बैलेट पेपर में कैसे शामिल किए गए?
मतगणना के समय पर भी उठे सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय सेठ ने मतगणना की प्रक्रिया और समय को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मतगणना में अनावश्यक देरी हुई और कई स्थानों पर पारदर्शिता का अभाव दिखा।
उनका कहना था कि मतगणना के दौरान एजेंटों को पूरी जानकारी नहीं दी गई और कई चरणों में भ्रम की स्थिति बनी रही। उन्होंने मांग की कि मतगणना प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कानूनी लड़ाई का संकेत
संजय सेठ ने साफ कहा कि भाजपा लोकतंत्र में विश्वास रखने वाली पार्टी है, लेकिन अगर चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा:
“अगर जरूरत पड़ी, तो हम इस पूरे मामले को अदालत तक ले जाएंगे। यह सिर्फ एक पार्टी का नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सवाल है।”
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा इस मुद्दे को लेकर सभी संवैधानिक विकल्पों पर विचार कर रही है।
चुनाव आयोग और प्रशासन पर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय सेठ ने चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि हर मतदाता तक मतदान की सुविधा पहुंचे और चुनाव चिन्हों में किसी प्रकार का भ्रम न हो।
उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण दे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे।
भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी
नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष होती, तो परिणाम अलग हो सकते थे।
भाजपा नेताओं का दावा है कि जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत समर्थन मिला था, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से वोटों का सही तरीके से उपयोग नहीं हो सका।
लोकतंत्र पर पड़ता असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह स्थानीय निकाय चुनावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। नगर निगम जैसे चुनाव सीधे आम नागरिकों से जुड़े होते हैं और इनमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी लोकतंत्र को कमजोर करती है।
आगे की रणनीति
संजय सेठ ने संकेत दिए कि भाजपा इस मुद्दे को लेकर:
- चुनाव आयोग से औपचारिक शिकायत
- तथ्य और आंकड़ों के साथ रिपोर्ट तैयार
- जरूरत पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा
खटखटाएगी।
निष्कर्ष
रांची नगर निगम चुनाव को लेकर उठे ये आरोप सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि चुनावी सुधार और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय बनते जा रहे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि चुनाव आयोग और प्रशासन इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या निष्पक्ष जांच होती है।
फिलहाल, संजय सेठ के बयान ने झारखंड की राजनीति में हलचल तेज कर दी है और आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
Disclaimer
यह समाचार एवं वीडियो प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयानों और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित वक्ता के निजी/राजनीतिक मत हैं। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता। किसी भी प्रकार की त्रुटि या बदलाव के लिए पोर्टल जिम्मेदार नहीं होगा।




