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वायरल बॉय ‘धूम’ समेत 6 युवाओं को मिला नया जीवन, नशा मुक्त घोषित कर दिया गया प्रमाणपत्र | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

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जमशेदपुर नशा मुक्त अभियान : अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस के अवसर पर पूर्वी सिंहभूम जिले से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। सोशल मीडिया पर चर्चित ‘वायरल बॉय धूम’ समेत छह युवाओं को सफल उपचार और पुनर्वास के बाद आधिकारिक रूप से नशा मुक्त घोषित किया गया। सभी युवाओं को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया और उन्हें समाज में नशा उन्मूलन के लिए जागरूकता अभियान चलाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

यह पहल केवल छह युवाओं की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है जो अपने किसी सदस्य को नशे की लत से बाहर निकालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

लंबे इलाज और काउंसिलिंग के बाद मिली सफलता

जानकारी के अनुसार वायरल बॉय ‘धूम’ को पिछले वर्ष नशे की गंभीर लत के कारण नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों और काउंसिलरों की लगातार निगरानी में उनका इलाज किया गया। नियमित काउंसिलिंग, दवाइयों और परिवार के सहयोग से उन्होंने नशे की आदत पर पूरी तरह काबू पा लिया।

इसी तरह पांच अन्य युवाओं ने भी पुनर्वास कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया। कार्यक्रम के दौरान सभी को नशा मुक्त होने का प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

ये छह युवा हुए नशा मुक्त घोषित

समारोह में वायरल बॉय धूम के अलावा शाहरुख आलम, सुबहान अंसारी, अंशुमन सिंह, राजीव मिश्रा और रोहन मुखी को भी नशा मुक्त घोषित किया गया। सभी युवाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि नशा जीवन को बर्बाद कर देता है, लेकिन सही इलाज और मजबूत इच्छाशक्ति से इससे बाहर निकला जा सकता है।

उन्होंने युवाओं से किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने की अपील की।

अब समाज को करेंगे जागरूक

कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि नशा मुक्त घोषित किए गए सभी युवाओं को अब सामाजिक जागरूकता अभियान से जोड़ा जाएगा। ये स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में जाकर युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के बारे में बताएंगे।

इनका वास्तविक अनुभव अन्य लोगों को नशे से दूर रहने और जरूरत पड़ने पर इलाज कराने के लिए प्रेरित करेगा।

नशे की लत केवल व्यक्ति नहीं, पूरे परिवार को प्रभावित करती है

विशेषज्ञों का कहना है कि नशे का असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका पूरा परिवार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक संकट से गुजरता है। कई मामलों में नशे के कारण घरेलू हिंसा, सड़क दुर्घटनाएं, अपराध, बेरोजगारी और मानसिक अवसाद जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।

इसी कारण सरकार और सामाजिक संस्थाएं लगातार लोगों को नशे से दूर रहने और समय पर उपचार लेने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस का उद्देश्य

हर वर्ष 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस (International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और नशा मुक्त समाज का निर्माण करना है।

देशभर में इस अवसर पर रैलियां, जागरूकता कार्यक्रम, संगोष्ठियां और नशा मुक्ति अभियान आयोजित किए जाते हैं। जमशेदपुर में आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी कड़ी का हिस्सा था।

बाइक रैली से दिया जाएगा जागरूकता का संदेश

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि नशा मुक्त हुए युवाओं की भागीदारी से शहर में एक विशेष बाइक रैली भी निकाली जाएगी। इस रैली का उद्देश्य लोगों तक यह संदेश पहुंचाना है कि नशे की लत से बाहर निकलना संभव है।

रैली के माध्यम से युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, खेलकूद, शिक्षा और रोजगार की ओर प्रेरित किया जाएगा।

झारखंड में लगातार चल रहा है नशा मुक्ति अभियान

झारखंड सरकार, जिला प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संस्थाएं मिलकर राज्य में नशा मुक्ति अभियान चला रही हैं। स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इसके अलावा नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज, काउंसिलिंग और पुनर्वास की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है ताकि अधिक से अधिक लोग सामान्य जीवन में लौट सकें।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी यह पहल

वायरल बॉय धूम सहित छह युवाओं की यह सफलता उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो नशे की लत से संघर्ष कर रहे हैं। यह साबित करता है कि यदि व्यक्ति स्वयं बदलाव चाहता है और उसे परिवार व समाज का सहयोग मिलता है तो वह किसी भी बुरी आदत से बाहर निकल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नशे के शिकार लोगों को अपराधी नहीं बल्कि मरीज समझने की जरूरत है। समय पर इलाज, सकारात्मक वातावरण और सामाजिक सहयोग से उनका जीवन दोबारा सामान्य बनाया जा सकता है।

निष्कर्ष

जमशेदपुर में वायरल बॉय धूम समेत छह युवाओं का नशा मुक्त घोषित होना केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए सकारात्मक संदेश है। यह पहल बताती है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी अभियान नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। यदि परिवार, समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो नशा मुक्त भारत का सपना साकार किया जा सकता है।

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