JPSC-JSSC Protest: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन 10 अगस्त 2026 को एक बार फिर चर्चा में आ गया। विधानसभा मार्च के दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी खराब स्वास्थ्य के बावजूद एंबुलेंस से आंदोलन में पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार वह लगातार नौ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
देवेंद्र नाथ महतो के एंबुलेंस से विधानसभा मार्च में पहुंचने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद आंदोलन को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े उनके मुद्दों का स्थायी समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
नौ दिन से भूख हड़ताल पर हैं देवेंद्र नाथ महतो
JPSC-JSSC भर्ती विवाद के बीच देवेंद्र नाथ महतो ने भूख हड़ताल शुरू की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 10 अगस्त को उनकी भूख हड़ताल का नौवां दिन था। लगातार भूख हड़ताल के कारण उनकी सेहत पर असर पड़ने की खबरें सामने आई हैं।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान उनका वजन करीब 10.5 किलोग्राम कम हुआ है। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद उन्होंने आंदोलन से पीछे हटने के बजाय विधानसभा मार्च में शामिल होने का फैसला किया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब हजारों छात्र JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ रांची में प्रदर्शन कर रहे हैं।
एंबुलेंस से विधानसभा मार्च में पहुंचे
10 अगस्त को छात्रों ने विधानसभा की ओर मार्च शुरू किया। इसी दौरान देवेंद्र नाथ महतो भी एंबुलेंस के जरिए आंदोलन स्थल तक पहुंचे। रिपोर्टों में बताया गया कि स्वास्थ्य संबंधी स्थिति खराब होने के बावजूद उन्होंने छात्रों के मार्च में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
उनकी मौजूदगी को आंदोलनकारी छात्रों ने अपने आंदोलन के समर्थन और मांगों को लेकर दृढ़ता के तौर पर देखा। बाद में सामने आए वीडियो और रिपोर्टों में उन्हें छात्रों के बीच अपनी बात रखते हुए भी देखा गया।
देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार से छात्रों की मांगों पर निर्णय लेने की अपील की और संकेत दिया कि वह अपनी मांगों से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।
क्या है JPSC-JSSC विवाद?
झारखंड में पिछले कई दिनों से विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारी अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगों में कुछ परीक्षाओं को रद्द करने, कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने जैसे मुद्दे शामिल हैं। इस मामले को लेकर सरकार और छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन सभी मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले में स्पष्ट और ठोस निर्णय होना चाहिए।
विधानसभा मार्च क्यों किया गया?
छात्र संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगों को मजबूती से रखने के लिए विधानसभा मार्च का ऐलान किया था। 10 अगस्त को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची में एकत्र हुए और विधानसभा की ओर बढ़े।
प्रशासन की ओर से विधानसभा क्षेत्र के आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कई जगहों पर बैरिकेडिंग की गई थी ताकि प्रदर्शनकारी विधानसभा के प्रतिबंधित क्षेत्र तक न पहुंच सकें।
लेकिन प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हुई।
पुलिस ने किया वाटर कैनन का इस्तेमाल
विधानसभा मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी और पुलिस आमने-सामने आ गए। कई रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
इस घटनाक्रम के दौरान रांची में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। प्रशासन की प्राथमिकता विधानसभा परिसर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना रही।
वाटर कैनन के इस्तेमाल के बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुए।
देवेंद्र नाथ महतो की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण हुई?
JPSC-JSSC आंदोलन में देवेंद्र नाथ महतो आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वह लंबे समय से छात्र आंदोलन से जुड़े रहे हैं और मौजूदा भर्ती परीक्षा विवाद में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है।
उनकी भूख हड़ताल और खराब स्वास्थ्य के बावजूद आंदोलन में मौजूदगी ने छात्रों के आंदोलन को और अधिक ध्यान आकर्षित कराया है।
हालांकि, भूख हड़ताल के कारण स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को देखते हुए चिकित्सा और सुरक्षा से जुड़े पहलू भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। किसी भी लंबे उपवास की स्थिति में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की निगरानी जरूरी होती है।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत पर नजर
आंदोलन के बीच सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी रहा है। रिपोर्टों के अनुसार बातचीत के कई दौर हो चुके हैं, लेकिन आंदोलनकारी अपनी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय चाहते हैं।
सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर चर्चा और समाधान की कोशिश की जा रही है। वहीं छात्र संगठनों का कहना है कि केवल बातचीत पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपनी मांगों पर स्पष्ट निर्णय चाहिए।
यही वजह है कि बातचीत के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हुआ और छात्रों ने विधानसभा मार्च का रास्ता अपनाया।
छात्रों के भविष्य से जुड़ा है विवाद
JPSC और JSSC की परीक्षाएं झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन परीक्षाओं के जरिए अलग-अलग सरकारी पदों पर नियुक्तियां होती हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता से मेहनत करने वाले उम्मीदवारों का भरोसा प्रभावित होता है। इसलिए वे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, सरकार और प्रशासन के सामने आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में बातचीत के जरिए समाधान निकालना दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
आंदोलन का अगला कदम क्या होगा?
विधानसभा मार्च और देवेंद्र नाथ महतो की एंबुलेंस से मौजूदगी के बाद अब सभी की नजर आंदोलन के अगले चरण पर है।
यदि सरकार और छात्र संगठनों के बीच प्रमुख मांगों पर सहमति बनती है तो आंदोलन खत्म होने की संभावना बन सकती है। लेकिन यदि मांगों पर समाधान नहीं निकलता है तो छात्र संगठन आंदोलन आगे बढ़ाने का फैसला कर सकते हैं।
इस बीच देवेंद्र नाथ महतो की स्वास्थ्य स्थिति भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। लगातार भूख हड़ताल के कारण उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ी है और आंदोलन के साथ-साथ उनकी चिकित्सा स्थिति पर भी नजर बनी हुई है।
निष्कर्ष
JPSC-JSSC Protest के बीच 10 अगस्त का विधानसभा मार्च झारखंड छात्र आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा। स्वास्थ्य खराब होने और लगातार नौ दिनों की भूख हड़ताल के बावजूद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो एंबुलेंस से विधानसभा मार्च में पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान उनका वजन करीब 10.5 किलोग्राम कम हुआ है।
वहीं हजारों अभ्यर्थियों के विधानसभा की ओर मार्च करने के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। अब इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से क्या कोई ठोस समाधान निकलता है या आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होगा।
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