गोइलकेरा–मनोहरपुर सड़क निर्माण : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में गोइलकेरा–मनोहरपुर सड़क निर्माण में लगातार हो रही देरी अब स्थानीय लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। करीब आठ वर्षों से अधूरी पड़ी इस सड़क को लेकर ग्रामीणों का धैर्य जवाब देने लगा है। बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क निर्माण विभाग के कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए जल्द निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की। ग्रामीणों ने अधिकारियों को 10 सूत्रीय मांगपत्र सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
यह सड़क पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा, मनोहरपुर, आमजरण, कैरम, मिंडीसोया और आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। सड़क अधूरी रहने से हजारों लोगों को रोजाना आवागमन में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
क्या है पूरा मामला?
ग्रामीणों के अनुसार गोइलकेरा–मनोहरपुर मुख्य मार्ग से विभिन्न गांवों को जोड़ने वाली लगभग 7.33 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण करीब 4.56 करोड़ रुपये की लागत से होना था। निर्माण कार्य कई वर्ष पहले शुरू हुआ, लेकिन विभिन्न कारणों से बीच में ही रुक गया। आज भी सड़क पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी है।
बरसात के दिनों में सड़क की स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। जगह-जगह गड्ढे, कीचड़ और जलभराव के कारण लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। वाहन चालकों को दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण विभागीय कार्यालय पहुंचे और अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से केवल आश्वासन मिल रहा है, लेकिन सड़क निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं बनने से बच्चों की पढ़ाई, मरीजों के इलाज, किसानों की खेती और व्यापारिक गतिविधियों पर सीधा असर पड़ रहा है। कई बार गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी परेशानी होती है।
आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा असर
गोइलकेरा और मनोहरपुर क्षेत्र के अधिकांश लोग कृषि, मजदूरी और छोटे व्यापार पर निर्भर हैं। खराब सड़क के कारण किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और खर्च करना पड़ता है।
स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों को रोजाना कठिन रास्ते से गुजरना पड़ता है। बारिश के मौसम में कई बार वाहन नहीं चल पाते, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
महिलाओं और बुजुर्गों को भी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में दिक्कत होती है। कई गांवों में एंबुलेंस के समय पर नहीं पहुंच पाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
10 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा
ग्रामीणों ने अधिकारियों को मांगपत्र सौंपते हुए कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—
- सड़क निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाए।
- निर्धारित समय सीमा में सड़क पूरी की जाए।
- निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।
- निर्माण में हुई देरी की जांच कराई जाए।
- जिम्मेदार अधिकारियों एवं ठेकेदार पर कार्रवाई की जाए।
- निर्माण कार्य की नियमित निगरानी की जाए।
- सड़क निर्माण की समयसीमा सार्वजनिक की जाए।
- ग्रामीणों को निर्माण की प्रगति की जानकारी दी जाए।
- अधूरे कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
- भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
विभाग ने दिया भरोसा
प्रदर्शन के दौरान विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि सड़क निर्माण से जुड़ी बाधाओं को दूर कर जल्द कार्य शुरू कराया जाएगा। साथ ही निर्माण कार्य की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीन पर निर्माण कार्य शुरू होता हुआ दिखाई देना चाहिए।
क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी है सड़क
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं होती, बल्कि आर्थिक विकास की रीढ़ होती है। अच्छी सड़क बनने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
गोइलकेरा–मनोहरपुर सड़क बनने से आसपास के कई गांवों के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी और क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
सरकार से ग्रामीणों की अपेक्षा
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ग्रामीण विकास और आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने की बात करती है। ऐसे में वर्षों से अधूरी पड़ी सड़क परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए।
लोगों का मानना है कि यदि समय पर सड़क निर्माण पूरा हो जाए तो पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है।
निष्कर्ष
गोइलकेरा–मनोहरपुर सड़क निर्माण में हुई लंबी देरी अब स्थानीय लोगों के लिए गंभीर समस्या बन चुकी है। सड़क की बदहाल स्थिति का असर शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार सहित जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ रहा है। विभाग ने जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन अब ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह आश्वासन कब धरातल पर उतरता है। यदि समय रहते निर्माण पूरा हो जाता है तो पश्चिमी सिंहभूम के हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।







