रांची: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को रांची में चयनित अभ्यर्थियों ने तिरंगा यात्रा निकाली। JSSC-CGL समेत संबंधित भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने और नियुक्तियों पर पड़े असर का विरोध कर रहे अभ्यर्थियों ने मोरहाबादी मैदान से यात्रा शुरू की और अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचे। इस दौरान राजधानी की कई प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ और लंबे समय तक जाम की स्थिति बनी रही।
तिरंगा यात्रा के दौरान अभ्यर्थियों ने अपनी नियुक्तियां रद्द करने के फैसले को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक मेहनत कर परीक्षा पास की और मेरिट के आधार पर चयनित हुए। उनका तर्क है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में कहीं अनियमितता हुई है तो जांच कर वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बिना किसी व्यक्तिगत गलती के चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
मोरहाबादी से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकली तिरंगा यात्रा
गुरुवार की शाम चयनित JPSC-JSSC अभ्यर्थी तिरंगा लेकर मोरहाबादी मैदान से निकले। यात्रा का प्रमुख उद्देश्य सरकार के उस फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराना था, जिसके कारण चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों के सामने नौकरी को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई है।
तिरंगा यात्रा अल्बर्ट एक्का चौक की ओर बढ़ी। यहां बड़ी संख्या में अभ्यर्थी एकत्र हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने नियुक्ति रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग दोहराई।
यह प्रदर्शन उस समय हुआ जब JPSC-JSSC भर्ती विवाद पहले ही राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ा मुद्दा बन चुका है। पिछले कई सप्ताह से छात्र और अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे थे।
मेन रोड समेत कई प्रमुख सड़कों पर लगा जाम
तिरंगा यात्रा का असर रांची के यातायात पर भी पड़ा। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार मेन रोड, कचहरी रोड, कोकर रोड और करमटोली जाने वाले रास्तों पर यातायात प्रभावित हुआ। मेन रोड पर स्थिति काफी गंभीर रही और कई वाहन लंबे समय तक फंसे रहे। कोकर रोड पर लालपुर की तरफ भी जाम की स्थिति बताई गई। सर्कुलर रोड और कचहरी रोड पर भी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
अल्बर्ट एक्का चौक पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के एकत्र होने के कारण सामान्य यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।
रांची जैसे व्यस्त शहर में मेन रोड, लालपुर, कचहरी रोड और आसपास के मार्गों पर यातायात प्रभावित होने से इसका असर दूसरे जुड़े हुए रास्तों पर भी पड़ सकता है। इसलिए ऐसे प्रदर्शनों के दौरान यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग की जानकारी महत्वपूर्ण हो जाती है।
क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं चयनित अभ्यर्थी?
चयनित अभ्यर्थियों का मुख्य विरोध उनकी नियुक्तियों को प्रभावित करने वाले फैसलों को लेकर है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी, मेहनत की और मेरिट के आधार पर चयन हासिल किया।
कई चयनित अभ्यर्थी पहले ही संबंधित विभागों में काम कर रहे थे। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया को रद्द किए जाने या नियुक्तियों पर कार्रवाई होने से उनके सामने नौकरी और भविष्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसी भर्ती प्रक्रिया में यदि गड़बड़ी साबित होती है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। लेकिन पूरी प्रक्रिया को रद्द करने से उन अभ्यर्थियों को नुकसान हो सकता है जिन्होंने अपनी मेहनत के आधार पर सफलता हासिल की है।
यही कारण है कि चयनित अभ्यर्थी अब सरकार से अपने मामले पर अलग से विचार करने और नियुक्तियों को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं।
JSSC-CGL विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार विवाद चल रहा है। छात्रों और अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता और जांच को लेकर सवाल उठाए थे।
इसके बाद राज्य सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने सहित कई भर्ती प्रक्रियाओं के संबंध में बड़े फैसले लिए। 17 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की थी। सरकार ने आउटसोर्स एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं और उसके जारी परिणामों को भी रद्द करने का निर्णय बताया। साथ ही भर्ती परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए समिति की बात सामने आई।
सरकार के इस फैसले से एक ओर आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक पूरी हुई, वहीं दूसरी ओर पहले से चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों के सामने नई समस्या पैदा हो गई।
चयनित अभ्यर्थियों का क्या कहना है?
तिरंगा यात्रा में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी मेहनत और मेरिट को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि उन्होंने परीक्षा पास करने के लिए लंबे समय तक तैयारी की और चयन के बाद सरकारी सेवा में योगदान देना शुरू किया।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि यदि किसी स्तर पर पेपर लीक, अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी व्यक्तियों पर कार्रवाई हो। लेकिन निर्दोष अभ्यर्थियों को इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों के लिए नियुक्ति समाप्त होने का मतलब केवल नौकरी का नुकसान नहीं, बल्कि कई वर्षों की तैयारी और करियर योजना पर भी असर पड़ सकता है।
पहले भी सचिवालय के बाहर हुआ था प्रदर्शन
JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों ने 18 अगस्त को रांची स्थित राज्य सचिवालय के बाहर भी प्रदर्शन किया था। रिपोर्टों के अनुसार नियुक्त सरकारी कर्मचारियों ने धरना दिया और परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अपनी नियुक्तियों के भविष्य को लेकर सरकार से स्पष्टता और न्याय की मांग की थी।
इससे स्पष्ट है कि JPSC-JSSC विवाद अब दो अलग-अलग पक्षों के बीच दिखाई दे रहा है। एक तरफ वे छात्र हैं जो कथित अनियमितताओं के कारण परीक्षाओं को रद्द कर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ वे अभ्यर्थी हैं जो परीक्षा पास करके नियुक्त हो चुके हैं और अपनी नौकरी बचाने की मांग कर रहे हैं।
हाईकोर्ट के फैसले से क्या बदला?
इसी बीच 20 अगस्त को झारखंड हाईकोर्ट ने कुछ नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है। उपलब्ध रिपोर्टों में JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर से जुड़ी नियुक्तियों पर रोक का उल्लेख है। इसका मतलब यह है कि संबंधित मामलों में अदालत के अगले आदेश तक नियुक्तियों को रद्द करने की कार्रवाई पर तत्काल राहत मिली है।
हालांकि इसे सभी JSSC-JPSC नियुक्तियों पर अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं और नियुक्तियों की कानूनी स्थिति अलग हो सकती है। अभ्यर्थियों को संबंधित कोर्ट आदेश और आधिकारिक अधिसूचनाओं को ही अंतिम आधार मानना चाहिए।
आंदोलन का आगे क्या होगा?
JPSC-JSSC विवाद में सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद 17 अगस्त को सरकार ने JSSC-CGL समेत कुछ भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया था। इसके बाद आंदोलन कर रहे छात्रों ने अपनी रणनीति बदली। 19 अगस्त को छात्र आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने और सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए समय देने की खबर सामने आई।
दूसरी ओर, नियुक्त अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी रहा। उनका मुख्य मुद्दा अब अपनी नौकरी और नियुक्ति को बचाना है।
ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार, भर्ती आयोग और न्यायपालिका के फैसले इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।
रांची में यातायात पर प्रदर्शन का असर
रांची में बड़े प्रदर्शन होने पर अल्बर्ट एक्का चौक, मेन रोड, लालपुर, कचहरी रोड, सर्कुलर रोड और आसपास के इलाकों में यातायात पर असर पड़ सकता है। 20 अगस्त की तिरंगा यात्रा के दौरान भी कई मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं।
स्थानीय वाहन चालकों के लिए जरूरी है कि वे प्रदर्शन वाले क्षेत्रों से गुजरने से पहले traffic updates देखें और संभव हो तो वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। खासकर कार्यालय समय और शाम के समय इन इलाकों में यात्रा करने वालों को अतिरिक्त समय लेकर निकलना उपयोगी हो सकता है।
अभ्यर्थियों के लिए क्या महत्वपूर्ण है?
JPSC-JSSC मामले से जुड़े उम्मीदवारों को सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट सूचनाओं से सावधान रहना चाहिए। परीक्षा रद्द होने, नियुक्ति समाप्त होने, नई परीक्षा होने या कोर्ट के आदेश से जुड़ी किसी भी खबर की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से करनी चाहिए।
अभ्यर्थियों को अपने आवेदन, admit card, result, scorecard, document verification और appointment letter जैसे दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। यदि मामला अदालत में है तो संबंधित आदेश और केस की स्थिति को भी ध्यान से देखना चाहिए।
सरकार के सामने क्या चुनौती है?
सरकार के सामने अब दो महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। पहली चुनौती भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर छात्रों का विश्वास बहाल करना है। दूसरी चुनौती उन अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना है जिन्होंने पहले की भर्ती प्रक्रिया में सफलता हासिल कर नौकरी प्राप्त की है।
यदि किसी परीक्षा में वास्तव में अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। लेकिन साथ ही ऐसे उम्मीदवारों के अधिकारों और कानूनी स्थिति पर भी विचार करना होगा जिन्होंने अपनी ओर से किसी गलत प्रक्रिया में भाग नहीं लिया।
यही संतुलन JPSC-JSSC भर्ती विवाद के समाधान में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Official Websites
JSSC: JSSC की आधिकारिक वेबसाइट
JPSC: JPSC की आधिकारिक वेबसाइट
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट
Jharkhand Government: झारखंड सरकार का आधिकारिक पोर्टल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थियों ने 20 अगस्त 2026 को रांची में क्यों तिरंगा यात्रा निकाली?
चयनित अभ्यर्थियों ने अपनी नियुक्तियों को रद्द किए जाने के विरोध में तिरंगा यात्रा निकाली और सरकार से नियुक्ति रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग की। यात्रा मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक गई, जिसके कारण मेन रोड समेत कई प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ।
रांची में किन सड़कों पर जाम लगा?
मेन रोड, कचहरी रोड, कोकर रोड, सर्कुलर रोड और करमटोली की ओर जाने वाले रास्तों पर यातायात प्रभावित हुआ।
JSSC-CGL अभ्यर्थियों की मुख्य मांग क्या है?
अभ्यर्थी नियुक्तियां रद्द करने का फैसला वापस लेने और यदि भर्ती में अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।
क्या JSSC-JPSC नियुक्तियों पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई है?
20 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने कुछ संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने की सरकारी कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई है। हालांकि हर भर्ती और नियुक्ति की कानूनी स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए संबंधित आधिकारिक आदेश देखना जरूरी है।
निष्कर्ष
रांची में 20 अगस्त को JPSC-JSSC के चयनित अभ्यर्थियों की तिरंगा यात्रा ने भर्ती विवाद को एक बार फिर शहर की सड़कों और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया। मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकली यात्रा के दौरान मेन रोड, कचहरी रोड, कोकर रोड, सर्कुलर रोड और आसपास के रास्तों पर यातायात प्रभावित हुआ।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि उनकी नियुक्तियां रद्द करने का फैसला वापस लिया जाए और यदि भर्ती प्रक्रिया में कहीं गड़बड़ी हुई है तो केवल जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। दूसरी तरफ, परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों की मांग निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने की रही है।
अब सरकार की अगली कार्रवाई और अदालतों में चल रही सुनवाई इस मामले के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगी। उम्मीदवारों को किसी भी नए फैसले के लिए JSSC, JPSC, झारखंड सरकार और झारखंड हाईकोर्ट के आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करना चाहिए।
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