झारखंड कृषि निर्यात : झारखंड सरकार राज्य के किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में बड़ी पहल करने जा रही है। राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि झारखंड में कृषि और बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत और आधुनिक एक्सपोर्ट इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना, निर्यात योग्य उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना और झारखंड को कृषि निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान दिलाना है।
यह बात कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के प्रतिनिधिमंडल के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के दौरान कही गई। बैठक में राज्य में कृषि निर्यात की वर्तमान स्थिति, भविष्य की संभावनाओं और आवश्यक बुनियादी ढांचे पर विस्तार से चर्चा हुई।
किसानों की आय बढ़ाने पर रहेगा विशेष फोकस
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड के किसान गुणवत्तापूर्ण फल, सब्जियां, दलहन, अनाज और बागवानी उत्पाद तैयार करते हैं। यदि इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक व्यवस्थित तरीके से पहुंचाया जाए तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। सरकार इसी दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि कृषि निर्यात केवल उत्पाद भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए गुणवत्ता, पैकेजिंग, कोल्ड चेन, भंडारण, परिवहन और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन भी जरूरी है। इसलिए राज्य सरकार इन सभी क्षेत्रों को मजबूत बनाने पर ध्यान दे रही है।
मजबूत एक्सपोर्ट इकोसिस्टम होगा तैयार
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि राज्य में ऐसा एक्सपोर्ट इकोसिस्टम विकसित किया जाए, जिससे किसान, किसान उत्पादक संगठन (FPO), निर्यातक, सरकारी विभाग और निजी संस्थाएं एक साझा मंच पर काम कर सकें।
सरकार की योजना के तहत कृषि उत्पादों की ग्रेडिंग, गुणवत्ता परीक्षण, आधुनिक पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा। इससे उत्पादों की गुणवत्ता बनी रहेगी और उन्हें सुरक्षित तरीके से विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा।
झारखंड के उत्पादों की विदेशों में बढ़ रही मांग
पिछले कुछ वर्षों में झारखंड के कई कृषि और बागवानी उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाई है। राज्य के आम, सब्जियां और गैर-बासमती चावल की मांग लगातार बढ़ रही है।
वर्ष 2025 में पूर्वी सिंहभूम और पाकुड़ के आम सऊदी अरब के लुलु हाइपरमार्केट तक पहुंचे थे। वहीं वर्ष 2026 में पूर्वी सिंहभूम, गुमला, लोहरदगा, देवघर और सिमडेगा के आम लंदन और दुबई सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किए गए।
इसके अलावा लॉन्ग बीन्स, भिंडी, अरबी और जिमीकंद जैसे उत्पाद भी दुबई, कतर, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों में भेजे जा रहे हैं। झारखंड का गैर-बासमती चावल रूस, बेनिन, आइवरी कोस्ट और टोगो जैसे देशों तक पहुंच चुका है।
एफपीओ की भूमिका होगी अहम
सरकार का मानना है कि कृषि निर्यात को बढ़ाने में किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। छोटे किसानों को संगठित कर बड़े स्तर पर उत्पादन और विपणन करना आसान होगा।
एफपीओ के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती, गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। इससे किसानों को सीधे बाजार से जुड़ने का अवसर मिलेगा और बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी।
जल्द होगी हितधारकों की बड़ी बैठक
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार जल्द ही एक राज्य स्तरीय बैठक आयोजित करेगी, जिसमें APEDA, विभिन्न सरकारी विभागों, कृषि वैज्ञानिकों, निर्यातकों, एफपीओ और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा।
इस बैठक में झारखंड के लिए कृषि निर्यात का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा, ताकि आने वाले वर्षों में राज्य के कृषि उत्पादों का निर्यात कई गुना बढ़ाया जा सके।
किसानों को क्या होंगे फायदे?
इस पहल से किसानों को कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है।
- कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलेगा।
- अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच बनेगी।
- आधुनिक खेती और गुणवत्ता सुधार को बढ़ावा मिलेगा।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
- राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
झारखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है कृषि निर्यात?
झारखंड की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां फल, सब्जियों और कई नकदी फसलों के उत्पादन के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। राज्य में बड़ी संख्या में किसान कृषि पर निर्भर हैं। यदि यहां उत्पादित कृषि सामग्री को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की मजबूत व्यवस्था विकसित होती है, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि निर्यात बढ़ने से किसानों की आमदनी में सुधार होगा, कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार होगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
निष्कर्ष
झारखंड सरकार की यह पहल राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि प्रस्तावित एक्सपोर्ट इकोसिस्टम समय पर विकसित हो जाता है और किसानों, एफपीओ, निर्यातकों तथा सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है, तो आने वाले वर्षों में झारखंड देश के प्रमुख कृषि निर्यातक राज्यों की सूची में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।







