ASI मनोज गोंड का निधन : झारखंड पुलिस विभाग के लिए शुक्रवार का दिन बेहद दुखद रहा। लोहरदगा जिले में पदस्थापित सहायक अवर निरीक्षक (ASI) मनोज गोंड का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर साहेबगंज लाया गया, जहां पुलिस अधिकारियों और जवानों ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी। इसके बाद मुक्तेश्वर घाट पर पूरे सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
मनोज गोंड अपने कर्तव्यनिष्ठ स्वभाव, अनुशासन और सरल व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। उनके निधन से न केवल पुलिस विभाग बल्कि स्थानीय लोगों और शुभचिंतकों में भी गहरा दुख है।
लंबे समय से लीवर की बीमारी से जूझ रहे थे ASI मनोज गोंड
जानकारी के अनुसार, ASI मनोज गोंड पिछले करीब ढाई वर्षों से लीवर संबंधी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। बेहतर इलाज के लिए उन्हें कुछ दिन पहले कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।
परिजनों और पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन उनकी हालत लगातार गंभीर बनी रही। आखिरकार गुरुवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
साहेबगंज पहुंचा पार्थिव शरीर, पुलिस ने दी गार्ड ऑफ ऑनर
शुक्रवार सुबह जैसे ही उनका पार्थिव शरीर साहेबगंज पहुंचा, पुलिस विभाग के अधिकारियों और जवानों ने पूरे सम्मान के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी। इस दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और पुलिस बैंड की धुनों के बीच उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मनोज गोंड एक समर्पित और ईमानदार पुलिस अधिकारी थे। उन्होंने अपने पूरे सेवा काल में अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ अपनी ड्यूटी निभाई।
मुक्तेश्वर घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
अंतिम सलामी के बाद उनका पार्थिव शरीर मुक्तेश्वर घाट ले जाया गया, जहां राजकीय सम्मान और धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। उनके छोटे बेटे कृष कुमार गोंड ने मुखाग्नि दी।
अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी, जवान, स्थानीय जनप्रतिनिधि, रिश्तेदार और आम नागरिक शामिल हुए। हर किसी की आंखें नम थीं और लोगों ने दिवंगत अधिकारी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मनोज गोंड अपने परिवार के जिम्मेदार सदस्य थे। बताया जाता है कि वे तीन भाइयों में दूसरे स्थान पर थे। उनके परिवार में पत्नी, दो बच्चे और अन्य परिजन हैं।
पिछले कई महीनों से पूरा परिवार उनके इलाज में जुटा हुआ था। उनके निधन से परिवार गहरे सदमे में है। अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
पुलिस विभाग ने जताया गहरा शोक
झारखंड पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने ASI मनोज गोंड के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ जनता की सेवा की।
उनके साथ काम कर चुके कई पुलिसकर्मियों ने बताया कि वे हमेशा सहयोगी, शांत और अनुशासित अधिकारी रहे। किसी भी कठिन परिस्थिति में वे अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटते थे।
ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए थे प्रसिद्ध
पुलिस विभाग में मनोज गोंड की पहचान एक मेहनती और जिम्मेदार अधिकारी के रूप में थी। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर अपनी सेवाएं दीं और हर जगह अपने कार्य से लोगों का विश्वास जीता।
सहकर्मियों के अनुसार, वे ड्यूटी के प्रति पूरी तरह समर्पित रहते थे और जनता के साथ भी उनका व्यवहार बेहद सरल और सम्मानजनक था। यही कारण है कि उनके निधन की खबर से पुलिस विभाग के साथ-साथ स्थानीय समाज में भी शोक की भावना है।
पुलिस सम्मान का क्या होता है महत्व?
जब किसी पुलिस अधिकारी या जवान का निधन होता है, तो विभाग की ओर से उन्हें अंतिम सलामी दी जाती है। इसे गार्ड ऑफ ऑनर भी कहा जाता है। यह सम्मान उनके द्वारा पुलिस सेवा में दिए गए योगदान और कर्तव्य के प्रति समर्पण का प्रतीक होता है।
ASI मनोज गोंड को दी गई अंतिम सलामी ने उनके लंबे सेवा जीवन और विभाग के प्रति उनकी निष्ठा को सम्मानपूर्वक याद किया।
झारखंड पुलिस के लिए अपूरणीय क्षति
मनोज गोंड का निधन झारखंड पुलिस के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। एक अनुभवी और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में उन्होंने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
उनके निधन से पुलिस विभाग ने एक समर्पित अधिकारी खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
निष्कर्ष
लोहरदगा में पदस्थापित ASI मनोज गोंड का निधन पूरे झारखंड पुलिस परिवार के लिए बेहद दुखद घटना है। लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हुआ और साहेबगंज पुलिस ने उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी देकर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुक्तेश्वर घाट पर हुए अंतिम संस्कार में पुलिस अधिकारियों, परिजनों और स्थानीय लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। उनका समर्पण, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा हमेशा पुलिस विभाग और समाज के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।







