पेनासिया अस्पताल रांची : झारखंड की राजधानी रांची स्थित पेनासिया अस्पताल एक बार फिर विवादों में आ गया है। अस्पताल प्रबंधन पर मृतक का शव बकाया बिल के नाम पर रोकने का गंभीर आरोप लगा है। मृतक के परिजनों का कहना है कि मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने इलाज का पूरा भुगतान किए बिना शव सौंपने से इनकार कर दिया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई और परिजनों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तथा रांची उपायुक्त (DC) से मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की अपील की है।
यह मामला सामने आने के बाद निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, मरीजों के अधिकार और स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, मृतक का इलाज रांची के पेनासिया अस्पताल में चल रहा था। इलाज के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि मरीज की मृत्यु के बाद अस्पताल प्रशासन ने बकाया बिल का हवाला देते हुए शव देने से मना कर दिया।
परिवार का कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और तत्काल पूरी राशि जमा करने की स्थिति में नहीं थे। उनका आरोप है कि इसी वजह से उन्हें घंटों तक अस्पताल परिसर में परेशान होना पड़ा और शव लेने के लिए गुहार लगानी पड़ी।
हालांकि, इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से आधिकारिक बयान सामने आने का इंतजार है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री और रांची DC से लगाई गुहार
घटना से आहत परिजनों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, रांची उपायुक्त और स्वास्थ्य विभाग से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
परिजनों का यह भी कहना है कि किसी भी परिवार के लिए अपने प्रियजन की मृत्यु के बाद ऐसी परिस्थितियों का सामना करना बेहद पीड़ादायक होता है। उनका आरोप है कि अस्पताल का रवैया अमानवीय था।
अस्पताल प्रबंधन पर उठ रहे हैं सवाल
यदि परिजनों के आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे निजी स्वास्थ्य क्षेत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल और मरीज के बीच बिल भुगतान को लेकर विवाद हो सकता है, लेकिन मरीज की मृत्यु के बाद शव रोकना संवेदनशील और गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में अस्पतालों को कानून और मानवीय मूल्यों का पालन करना चाहिए।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
झारखंड सहित देश के कई राज्यों में समय-समय पर निजी अस्पतालों पर इलाज में लापरवाही, अत्यधिक बिलिंग और मरीजों के परिजनों से दुर्व्यवहार जैसे आरोप लगते रहे हैं। ऐसे मामलों के सामने आने से लोगों का भरोसा स्वास्थ्य संस्थानों पर प्रभावित होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निजी अस्पतालों में पारदर्शिता, मरीजों के अधिकारों की जानकारी और शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था होना आवश्यक है।
प्रशासनिक जांच की मांग
मामले को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग से भी अपेक्षा की जा रही है कि वह मामले की पूरी रिपोर्ट लेकर आवश्यक कदम उठाए।
मरीजों के अधिकार क्या कहते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मरीज और उनके परिजनों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना प्रत्येक अस्पताल की जिम्मेदारी है। बिल भुगतान को लेकर विवाद होने की स्थिति में भी अस्पतालों को कानून के दायरे में रहकर प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
किसी भी विवाद का समाधान प्रशासनिक या कानूनी माध्यम से किया जा सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
परिजनों की प्रमुख मांगें
- मृतक के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की जांच हो।
- दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
- निजी अस्पतालों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
अस्पताल का पक्ष आना बाकी
फिलहाल इस पूरे मामले में परिजनों की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं, खबर लिखे जाने तक पेनासिया अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई थी। ऐसे में प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
निष्कर्ष
रांची के पेनासिया अस्पताल से जुड़ा यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े कई अहम सवाल खड़े करता है। मृतक के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि जांच में अलग तथ्य सामने आते हैं तो उन्हें भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि लोगों के सामने पूरी सच्चाई आ सके।







