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JPSC-JSSC आंदोलन : सदर अस्पताल में छात्रों से मिले बाबूलाल मरांडी, बोले- जान नहीं देनी | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

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JPSC-JSSC आंदोलन : झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। इसी क्रम में अनशन पर बैठे कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुक्रवार को झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी सदर अस्पताल पहुंचे और अनशनकारी छात्रों से मुलाकात की।

बाबूलाल मरांडी ने अस्पताल में भर्ती छात्रों का हालचाल जाना और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी जान जोखिम में न डालें। मरांडी ने कहा कि छात्रों को अपने अधिकारों के लिए अभी लंबी लड़ाई लड़नी है, इसलिए स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।

अनशनकारी छात्रों से मिलने सदर अस्पताल पहुंचे बाबूलाल मरांडी

JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान अनशन कर रहे छात्रों की तबीयत बिगड़ने की खबर के बाद बाबूलाल मरांडी सदर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने वहां भर्ती छात्रों से मुलाकात की और उनकी स्थिति के बारे में जानकारी ली।

मरांडी ने छात्रों से कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जरूर करें, लेकिन अपनी जान की कीमत पर नहीं। उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनके मुद्दे को राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर उठाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि छात्रों के सामने अभी लंबी लड़ाई है। ऐसे में आंदोलन कर रहे युवाओं के लिए खुद को स्वस्थ और सुरक्षित रखना जरूरी है।

‘जान नहीं देनी है, लंबी लड़ाई लड़नी है’

छात्रों से बातचीत के दौरान बाबूलाल मरांडी ने विशेष रूप से उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार से अपने अधिकारों की मांग करना छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी जिंदगी को खतरे में नहीं डालना चाहिए।

मरांडी का संदेश साफ था कि आंदोलन चाहे जितना लंबा चले, छात्रों को अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका कहना था कि युवा ही झारखंड का भविष्य हैं और उन्हें अपनी मांगों के लिए आगे भी संघर्ष करना है।

इस दौरान अस्पताल में भर्ती छात्रों ने भी अपनी समस्याएं और मांगें उनके सामने रखीं।

JPSC-JSSC मामले में CBI जांच की मांग

JPSC और JSSC से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच शामिल है। आंदोलनकारी छात्र पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट और निष्पक्ष समाधान चाहते हैं।

बाबूलाल मरांडी ने भी छात्रों की मांगों का समर्थन किया है। उन्होंने JPSC और JSSC से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच तथा कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच एजेंसी या न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

भर्ती परीक्षाओं को लेकर क्यों नाराज हैं छात्र?

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले हजारों युवाओं के लिए JPSC और JSSC की परीक्षाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं। लंबे समय तक तैयारी करने के बाद अभ्यर्थी इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं।

ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने से छात्रों के बीच असंतोष पैदा होता है। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।

छात्रों की मांग है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और यदि परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता साबित होती है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।

राहुल क्रांति के मामले का भी उठा मुद्दा

सदर अस्पताल में छात्रों से मुलाकात के दौरान बाबूलाल मरांडी ने राहुल क्रांति से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद छात्र को नियुक्ति नहीं मिली और मामला न्यायालय तक पहुंच गया।

मरांडी का कहना है कि ऐसे मामलों में सरकार को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए, ताकि लंबे समय से सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं को न्याय मिल सके।

यह मामला भी छात्रों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और आंदोलन के दौरान इसे प्रमुख मुद्दों में शामिल किया जा रहा है।

झारखंड में बढ़ रहा राजनीतिक दबाव

JPSC-JSSC आंदोलन के कारण झारखंड में राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। विपक्षी दल लगातार सरकार से आंदोलनकारी छात्रों के साथ बातचीत करने और उनकी मांगों का समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं।

बाबूलाल मरांडी के सदर अस्पताल पहुंचने से इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक समर्थन मिला है। विपक्ष का कहना है कि युवाओं की शिकायतों को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को उनके साथ संवाद करना चाहिए।

दूसरी ओर, छात्रों की ओर से भी लगातार यह मांग की जा रही है कि सरकार सिर्फ आश्वासन देने के बजाय ठोस कदम उठाए।

सरकार और छात्रों के बीच बातचीत अहम

JPSC-JSSC आंदोलन का समाधान निकालने के लिए सरकार और छात्रों के बीच बातचीत बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं तो लंबे समय से चल रहे आंदोलन को समाप्त करने का रास्ता खुल सकता है।

छात्रों की मांगों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना होगा। साथ ही, परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच होने पर ही अभ्यर्थियों के बीच भरोसा बहाल किया जा सकता है।

अनशनकारी छात्रों की सेहत बनी सबसे बड़ी चिंता

इस पूरे आंदोलन में सबसे गंभीर चिंता अनशन कर रहे छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर है। लंबे समय तक भूख हड़ताल करने से शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में सदर अस्पताल में भर्ती छात्रों की स्थिति आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

बाबूलाल मरांडी ने भी छात्रों से यही अपील की कि वे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और अपनी जान को खतरे में न डालें।

उनका कहना है कि आंदोलन और संघर्ष लंबा हो सकता है, इसलिए छात्रों को खुद को सुरक्षित रखते हुए अपनी मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठानी चाहिए।

आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच होने वाली बातचीत पर है। यदि सरकार छात्रों की मांगों पर ठोस पहल करती है और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सवालों का समाधान निकालती है तो विवाद को शांत करने में मदद मिल सकती है।

वहीं, यदि छात्रों की मांगों पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं होता है तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है।

निष्कर्ष

JPSC-JSSC आंदोलन झारखंड में युवाओं के रोजगार, भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और सरकारी परीक्षाओं में भरोसे से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। सदर अस्पताल में अनशनकारी छात्रों से बाबूलाल मरांडी की मुलाकात ने आंदोलन को एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

मरांडी ने छात्रों से अपनी जान नहीं देने और स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील की है। उन्होंने संकेत दिया कि छात्रों की लड़ाई लंबी है और उन्हें सुरक्षित रहते हुए अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना चाहिए।

अब सबसे अहम सवाल यही है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और JPSC-JSSC से जुड़े विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है। आने वाले दिनों में सरकार और छात्रों के बीच संवाद तथा किसी ठोस निर्णय पर पूरे झारखंड की नजर रहेगी।

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