JPSC-JSSC छात्र आंदोलन : झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन रविवार को भी जारी रहा। सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच लगातार तीन दौर की बातचीत होने के बावजूद मुख्य मुद्दों पर पूरी सहमति नहीं बन सकी। सरकार ने छात्रों से 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव स्थगित करने की अपील की है, लेकिन छात्र अपनी प्रमुख मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
आंदोलन में सबसे बड़ा गतिरोध JSSC CGL परीक्षा और CBI जांच को लेकर बना हुआ है। सरकार ने CGL मामले की समीक्षा के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने और विशेषज्ञ संस्थानों की मदद लेने का विकल्प दिया है, लेकिन छात्रों ने इसे स्वीकार नहीं किया है।
तीन दौर की बातचीत के बाद भी समाधान नहीं
JPSC-JSSC विवाद को सुलझाने के लिए सरकार और छात्रों के बीच लगातार तीन दौर की बातचीत हुई। बैठकों में कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच, प्रभावित परीक्षाओं को रद्द करने, दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य में परीक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
सरकार की ओर से कई मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने की बात कही गई। इसके बावजूद छात्र आंदोलन समाप्त करने के लिए तैयार नहीं हुए। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
14वीं JPSC परीक्षा को लेकर क्या हुआ?
बातचीत में 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितताओं का मुद्दा प्रमुख रहा। सरकार की ओर से बताया गया कि TDPL से संबंधित कथित गड़बड़ियों की जांच CID करेगी।
सरकार ने मामले में संदिग्ध लोगों के खिलाफ कार्रवाई और आवश्यकता पड़ने पर आर्थिक अपराध से जुड़े पहलुओं की जांच के लिए ED से अनुरोध करने की बात भी कही है। साथ ही JPSC की बैकलॉग और नियमित परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच की बात सामने आई है।
छात्रों की मांग है कि परीक्षा में यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
JSSC CGL पर फंसा सबसे बड़ा पेंच
पूरे विवाद में JSSC CGL सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है।
सरकार का कहना है कि JSSC CGL से संबंधित मामला फिलहाल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में सरकार के लिए सीधे परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना संभव नहीं है।
हालांकि, सरकार ने मामले की समीक्षा के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का विकल्प छात्रों के सामने रखा है। सरकार के अनुसार यह कमेटी लगभग 90 दिनों में अपनी रिपोर्ट दे सकती है।
जांच और समीक्षा प्रक्रिया में IIT-ISM, XLRI जैसे विशेषज्ञ संस्थानों की मदद लेने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
लेकिन छात्रों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है और CGL मामले में स्पष्ट निर्णय की मांग पर कायम हैं।
CBI जांच की मांग पर सरकार का क्या कहना है?
आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में CBI जांच भी शामिल है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
वहीं सरकार ने CBI जांच की मांग को लेकर अपना अलग पक्ष रखा है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि JPSC की पहली और दूसरी परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच पहले CBI को दी गई थी, लेकिन दो दशक से अधिक समय गुजरने के बाद भी अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आया।
सरकार का तर्क है कि जांच ऐसी एजेंसी या व्यवस्था से होनी चाहिए जिसमें कार्रवाई समयबद्ध तरीके से पूरी हो और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
इसी वजह से सरकार ने रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली कमेटी और विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से जांच का विकल्प रखा है।
10 अगस्त को विधानसभा घेराव पर अड़े छात्र
तीन दौर की बातचीत के बाद भी छात्र 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के अपने कार्यक्रम को स्थगित करने के लिए तैयार नहीं हुए हैं।
सरकार ने छात्रों और उनके अभिभावकों से आंदोलन की जगह बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। सरकार का कहना है कि बातचीत का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
दूसरी तरफ छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक प्रमुख मांगों पर स्पष्ट फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
इस वजह से 10 अगस्त का कार्यक्रम झारखंड की राजनीति और छात्र आंदोलन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भविष्य की JSSC परीक्षाओं में होंगे बदलाव
विवाद के बीच सरकार की ओर से भविष्य की JSSC परीक्षाओं को लेकर कई सुधारों का प्रस्ताव भी रखा गया है।
50 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी तो दो चरणों में परीक्षा
यदि किसी परीक्षा में 50 हजार से अधिक अभ्यर्थी शामिल होते हैं तो परीक्षा को PT और Mains यानी दो चरणों में कराने का प्रस्ताव है।
Mains के लिए 15 गुना अभ्यर्थी
प्रारंभिक परीक्षा के बाद उपलब्ध पदों की संख्या के 15 गुना अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए चयनित करने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
CBT मोड में Mains परीक्षा
मुख्य परीक्षा को Computer Based Test (CBT) मोड में कराने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे प्रश्नपत्र से जुड़ी गड़बड़ियों की संभावना कम की जा सकती है।
रिजल्ट में अधिक पारदर्शिता
भविष्य में अभ्यर्थियों को केवल अपना परिणाम देखने के बजाय अधिक विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसमें अंक और रिजेक्शन से संबंधित जानकारी शामिल करने का प्रस्ताव है।
परीक्षा केंद्रों पर सुविधाएं
परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की शिकायतों के लिए grievance व्यवस्था, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं को बेहतर बनाने की बात भी कही गई है।
छात्रों की मांगों पर सरकार का रुख
सरकार की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। सरकार ने जांच, परीक्षा सुधार और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।
लेकिन छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस निर्णय और आधिकारिक आदेश चाहिए। यही वजह है कि बातचीत के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हुआ है।
आंदोलन के बीच बढ़ा तनाव
JPSC-JSSC विवाद अब केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसे की मांग कर रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी तरह की अनियमितता का सीधा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। कई उम्मीदवार लंबे समय तक तैयारी करने के बाद परीक्षा में शामिल होते हैं, इसलिए परीक्षा प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
सरकार की ओर से भी भविष्य की परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई तकनीकी और प्रशासनिक बदलावों का प्रस्ताव दिया गया है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 10 अगस्त का विधानसभा घेराव होगा या सरकार और छात्रों के बीच अंतिम समय में कोई सहमति बन पाएगी?
सरकार ने बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कही है, जबकि छात्र अपनी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे हैं। विशेष रूप से JSSC CGL और CBI जांच का मुद्दा अभी भी दोनों पक्षों के बीच बड़ा मतभेद बना हुआ है।
ऐसे में आने वाले घंटे आंदोलन की अगली दिशा तय करने में अहम होंगे।
निष्कर्ष
JPSC-JSSC छात्र आंदोलन को लेकर सरकार और छात्रों के बीच तीन दौर की बातचीत के बाद भी गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सरकार ने कई मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए जांच और परीक्षा सुधारों का भरोसा दिया है, लेकिन छात्र JSSC CGL और CBI जांच जैसे प्रमुख मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय चाहते हैं।
सरकार ने 10 अगस्त के विधानसभा घेराव को स्थगित करने की अपील की है, लेकिन छात्र फिलहाल पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। अब सबकी नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली बातचीत तथा 10 अगस्त के प्रस्तावित विधानसभा घेराव पर है।
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