Ranchi Protest : झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन सोमवार को राजधानी रांची में काफी तनावपूर्ण हो गया। विधानसभा घेराव के लिए पहुंचे छात्र-छात्राओं और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग के साथ वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जबकि कई रिपोर्टों में लाठीचार्ज की भी जानकारी सामने आई है। इसी कार्रवाई को लेकर छात्र नेता रविंद्र पासवान ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अब आंदोलनकारियों की बात सीधे मुख्यमंत्री से होगी।
नोट: रविंद्र पासवान के इस कथन की स्वतंत्र पुष्टि मुझे उपलब्ध प्रमुख ऑनलाइन स्रोतों में नहीं मिली है। नीचे की रिपोर्ट में इसे आपके दिए गए घटनाक्रम/हेडलाइन के आधार पर उनके कथित बयान के रूप में रखा गया है।
विधानसभा घेराव के दौरान बढ़ा तनाव
JPSC-JSSC से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा के घेराव का आह्वान किया था। सुबह से ही रांची में अलग-अलग जगहों से छात्र और अभ्यर्थी आंदोलन स्थल की ओर पहुंचने लगे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और जिन परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की थी। जैसे-जैसे भीड़ विधानसभा के करीब पहुंची, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ता गया।
लाठीचार्ज पर भड़के स्टूडेंट लीडर रविंद्र पासवान
प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर छात्र नेताओं में नाराजगी देखने को मिली। इसी बीच स्टूडेंट लीडर रविंद्र पासवान ने कथित तौर पर कहा कि अब छात्रों की बात सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी।
उनके कथित बयान “अब डायरेक्ट CM से होगी बात” को आंदोलन के अगले चरण से जोड़कर देखा जा रहा है। छात्र नेताओं का कहना है कि बातचीत के कई दौर के बावजूद यदि उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं निकलता है, तो सरकार के शीर्ष स्तर पर सीधे बातचीत जरूरी है।
हालांकि, रविंद्र पासवान के इस बयान की पूरी वीडियो या आधिकारिक प्रेस बयान के रूप में स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में स्पष्ट नहीं है। इसलिए पाठकों को इसे उनके कथित बयान के तौर पर ही देखना चाहिए।
पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों में नाराजगी
विधानसभा के बाहर स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने की कोशिश की। मीडिया रिपोर्टों में वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में पुलिस लाठीचार्ज का भी उल्लेख है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने आए छात्रों पर बल प्रयोग किया गया। वहीं प्रशासन की ओर से ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और विधानसभा परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस, लाठियों और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
‘We Want Justice’ के नारों से गूंजा इलाका
विधानसभा के बाहर प्रदर्शन के दौरान छात्र लगातार अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाते रहे। प्रदर्शनकारियों के बीच “We Want Justice” के नारे भी सुनाई दिए।
छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि परीक्षा से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
छात्रा के बेहोश होने की खबर से बढ़ी चिंता
प्रदर्शन के बीच एक छात्रा के बेहोश होने की खबर भी सामने आई। बताया गया कि वह प्रदर्शन के दौरान नारे लगा रही थी, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई।
मौके पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों ने उसे संभालने की कोशिश की। हालांकि, छात्रा के बेहोश होने के कारण और उसकी मेडिकल स्थिति की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि उसकी तबीयत पुलिस कार्रवाई, भीड़, तनाव, गर्मी या किसी अन्य स्वास्थ्य कारण से बिगड़ी। मेडिकल रिपोर्ट या अस्पताल की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
देवेंद्र नाथ महतो भी आंदोलन में रहे सक्रिय
JPSC-JSSC आंदोलन में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी प्रमुख रूप से सक्रिय रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वह कई दिनों से अनशन पर थे और खराब स्वास्थ्य के बावजूद विधानसभा मार्च में शामिल हुए।
उन्हें स्ट्रेचर के जरिए आंदोलन में लाए जाने की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए। उनके स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों में चिंता बनी हुई थी।
इससे पहले भी महतो ने आंदोलनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने की अपील की थी।
JPSC-JSSC विवाद आखिर क्या है?
झारखंड में JPSC और JSSC के माध्यम से होने वाली सरकारी भर्तियों को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लंबे समय से अलग-अलग मुद्दों पर सामने आता रहा है। वर्तमान आंदोलन में छात्र भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और अभ्यर्थियों की शिकायतों के समाधान की मांग कर रहे हैं।
JSSC से संबंधित भर्ती मामलों को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में भी अलग-अलग याचिकाएं और मामले सामने आते रहे हैं। कोर्ट रिकॉर्ड में JSSC और राज्य सरकार से जुड़े भर्ती मामलों का उल्लेख मिलता है।
छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में युवाओं को वर्षों का समय और आर्थिक संसाधन लगते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया पर किसी भी तरह का सवाल उठने से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत बनी अहम
विधानसभा घेराव और पुलिस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच आगे होने वाली बातचीत को लेकर है।
यदि छात्र नेताओं की मांग के अनुसार मुख्यमंत्री स्तर पर सीधे बातचीत होती है, तो इससे आंदोलन को लेकर कोई रास्ता निकलने की संभावना बन सकती है। वहीं यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है।
सरकार के सामने एक ओर छात्रों की शिकायतों का समाधान करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर विधानसभा और राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की प्राथमिकता है।
अब आगे क्या?
रांची में हुए विधानसभा घेराव के बाद JPSC-JSSC आंदोलन का अगला कदम महत्वपूर्ण होगा। छात्र नेता सरकार से सीधे बातचीत की मांग कर सकते हैं। वहीं आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों को लेकर आगे की रणनीति भी तय करेंगे।
रविंद्र पासवान का कथित बयान “अब डायरेक्ट CM से होगी बात” इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस बयान की आधिकारिक पुष्टि होने पर ही इसे अंतिम रूप से उनके बयान के तौर पर प्रकाशित करना बेहतर होगा।
निष्कर्ष
रांची में JPSC-JSSC से जुड़े छात्र आंदोलन ने सोमवार को उस समय नया मोड़ लिया, जब प्रदर्शनकारी विधानसभा घेराव के लिए पहुंचे और पुलिस के साथ उनका टकराव हुआ। पुलिस कार्रवाई में लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरों के बाद छात्र नेताओं में नाराजगी बढ़ गई।
इसी बीच स्टूडेंट लीडर रविंद्र पासवान के कथित बयान “अब डायरेक्ट CM से होगी बात” ने आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर चर्चा तेज कर दी है। दूसरी ओर, प्रदर्शन के दौरान छात्रा के बेहोश होने और कुछ प्रदर्शनकारियों के प्रभावित होने की खबरों ने भी चिंता बढ़ाई है।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच आगे बातचीत होती है या आंदोलन का रुख और कड़ा होता है।







