AISF 90वां स्थापना दिवस : ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) ने अपना 90वां स्थापना दिवस मनाते हुए शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों को उठाया। कार्यक्रम में संगठन ने शिक्षा के निजीकरण, नई शिक्षा नीति और झारखंड के कॉलेजों में लागू क्लस्टर सिस्टम को लेकर विरोध जताया। AISF नेताओं ने कहा कि शिक्षा को आम विद्यार्थियों की पहुंच से दूर नहीं होने दिया जाएगा। संगठन ने अपनी मांगों को लेकर आने वाले दिनों में आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी है।
AISF के मुताबिक, यदि सरकार ने छात्रों की मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो राज्यभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन ने 18 कॉलेजों में एमए की पढ़ाई दोबारा शुरू करने और बीएससी की पढ़ाई शुरू कराने की मांग भी उठाई है। इस घोषणा के बाद झारखंड में उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर छात्र राजनीति और तेज होने की संभावना है।
90 साल पुराना है AISF का इतिहास
AISF यानी ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन देश के पुराने छात्र संगठनों में शामिल है। स्थापना दिवस कार्यक्रम में संगठन के नेताओं ने इसके 90 वर्षों के इतिहास और छात्र आंदोलनों में इसकी भूमिका को याद किया।
AISF के राज्य सचिव अफसर दुरानी ने बताया कि संगठन की स्थापना वर्ष 1936 में लखनऊ के गंगा प्रसाद मेमोरियल में हुई थी। संगठन ने आजादी से पहले अंग्रेजी शासन के खिलाफ छात्र आंदोलनों में भागीदारी की और बाद में शिक्षा तथा विद्यार्थियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को अपने आंदोलन का हिस्सा बनाया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि छात्र सिर्फ शिक्षा प्राप्त करने वाले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि देश और समाज के भविष्य को दिशा देने वाली महत्वपूर्ण शक्ति हैं। इसलिए शिक्षा व्यवस्था से जुड़े फैसलों में छात्रों की समस्याओं और उनके हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ AISF
स्थापना दिवस समारोह में शिक्षा के बढ़ते निजीकरण को लेकर AISF ने गंभीर चिंता जताई। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में निजी संस्थानों की भूमिका बढ़ने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
AISF ने शिक्षा को मौलिक अधिकार और सामाजिक समानता का माध्यम बताते हुए सरकारी शिक्षण संस्थानों को मजबूत करने की मांग की। संगठन का कहना है कि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में बेहतर आधारभूत संरचना, पर्याप्त शिक्षक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
AISF नेताओं ने शिक्षा के व्यवसायीकरण का विरोध करते हुए कहा कि शिक्षा को केवल बाजार और मुनाफे के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों को भी उच्च शिक्षा के समान अवसर मिलने चाहिए।
क्लस्टर सिस्टम को लेकर विरोध
झारखंड में कॉलेजों के क्लस्टर सिस्टम को लेकर भी AISF ने अपना विरोध दर्ज कराया। संगठन ने इस व्यवस्था की समीक्षा करने और छात्रों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक बदलाव करने की मांग की है।
AISF ने विशेष रूप से 18 कॉलेजों में एमए की पढ़ाई बंद होने का मुद्दा उठाया। संगठन की मांग है कि इन कॉलेजों में एमए की पढ़ाई दोबारा शुरू की जाए। इसके साथ ही जिन कॉलेजों में बीएससी की पढ़ाई उपलब्ध नहीं है, वहां बीएससी की पढ़ाई शुरू करने की मांग की गई है।
AISF का कहना है कि कॉलेजों में विषय और पाठ्यक्रम सीमित होने से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों या संस्थानों का रुख करना पड़ सकता है। इससे गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
10 से 15 दिनों में आंदोलन की चेतावनी
AISF ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर उसकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाएगा। संगठन ने कहा है कि अगले 10 से 15 दिनों में भूख हड़ताल और व्यापक आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
छात्र संगठन की यह चेतावनी झारखंड में पहले से चल रहे विभिन्न छात्र आंदोलनों के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो आने वाले दिनों में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आंदोलन का असर देखने को मिल सकता है।
AISF ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं है, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर दिलाना है।
सरकारी स्कूलों की स्थिति पर भी उठे सवाल
कार्यक्रम के दौरान सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर भी चिंता जाहिर की गई। AISF के सह सचिव और जिलाध्यक्ष एतेशाम प्रवीण ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना जरूरी है।
AISF ने शिक्षकों की नियुक्ति को प्राथमिकता देने की मांग की। संगठन का कहना है कि केवल तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने से शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार नहीं हो सकता। स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, कक्षाएं, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी जरूरी हैं।
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़ी संख्या में विद्यार्थी इन्हीं संस्थानों पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकारी शिक्षा व्यवस्था मजबूत होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
छात्र एकता का दिया संदेश
AISF की स्टेट प्रेसिडेंट हिमांशी सिंह ने विद्यार्थियों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने छात्रों से जाति और धर्म के आधार पर विभाजन से बचने और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होने का आह्वान किया।
संगठन ने कहा कि छात्र आंदोलन तभी प्रभावी हो सकता है, जब अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थी अपने साझा मुद्दों को लेकर एक साथ खड़े हों। फीस, रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रवृत्ति और कॉलेजों में पर्याप्त सुविधाएं जैसे मुद्दे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को प्रभावित करते हैं।
झारखंड में बढ़ सकती है छात्र राजनीति
AISF के 90वें स्थापना दिवस पर दिए गए बयानों से संकेत मिलता है कि झारखंड में शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर छात्र संगठनों की सक्रियता आने वाले समय में बढ़ सकती है। खासतौर पर क्लस्टर सिस्टम, कॉलेजों में पाठ्यक्रमों की उपलब्धता और सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर आंदोलन की संभावना बनी हुई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार AISF की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है। यदि बातचीत के माध्यम से समाधान निकलता है तो आंदोलन को टाला जा सकता है। वहीं, यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो AISF की ओर से घोषित भूख हड़ताल और राज्यव्यापी आंदोलन झारखंड की शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस खड़ी कर सकता है।
निष्कर्ष
AISF का 90वां स्थापना दिवस समारोह संगठन के इतिहास को याद करने के साथ-साथ झारखंड की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाने का अवसर भी बना। शिक्षा के निजीकरण का विरोध, सरकारी स्कूलों को मजबूत करने की मांग, कॉलेजों में बंद पाठ्यक्रमों को फिर शुरू कराने और क्लस्टर सिस्टम पर पुनर्विचार जैसे मुद्दे AISF के आगामी आंदोलन के केंद्र में रह सकते हैं।
संगठन ने साफ किया है कि छात्रों की मांगों को नजरअंदाज किए जाने की स्थिति में आंदोलन को राज्यव्यापी स्तर पर ले जाया जाएगा। ऐसे में झारखंड सरकार और AISF के बीच होने वाली बातचीत आने वाले दिनों में अहम होगी। विद्यार्थियों और अभिभावकों की नजर भी इस बात पर रहेगी कि उच्च शिक्षा से जुड़े इन मुद्दों पर सरकार क्या कदम उठाती है।







