JPSC-JSSC Protest : झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे। उन्होंने छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों और आंदोलन की स्थिति की जानकारी ली। रघुवर दास ने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
छात्रों से मिलने पहुंचे रघुवर दास
JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इसी बीच बुधवार को रघुवर दास धरनास्थल पहुंचे और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों से बातचीत की।
उन्होंने छात्रों से उनकी मांगों, आंदोलन की वर्तमान स्थिति और सरकार के साथ हुई बातचीत के बारे में जानकारी ली। रघुवर दास ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ फैसला लेना चाहिए।
सरकार को दिया एक सप्ताह का समय
रघुवर दास ने राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने कहा कि इस अवधि में यदि छात्रों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वह स्वयं आंदोलन में शामिल होंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि एक सप्ताह बाद वह बिरसा मुंडा समाधि स्थल पर अनशन शुरू करेंगे। उनके इस ऐलान से JPSC-JSSC विवाद में राजनीतिक दबाव और बढ़ सकता है।
विधानसभा मार्च में पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया
रघुवर दास ने छात्रों के विधानसभा मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
इससे पहले विधानसभा मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। घटना के बाद JPSC-JSSC आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है।
किन मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन?
JPSC-JSSC आंदोलन में अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े छात्रों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं पर कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।
छात्र विशेष रूप से JSSC-CGL परीक्षा को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं और कई विवादित परीक्षाओं की जांच के लिए CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग कर रहे हैं। सरकार की ओर से राज्य CID की जांच और अन्य प्रक्रियाओं का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
14वीं JPSC परीक्षा पर सरकार का फैसला
JPSC-JSSC आंदोलन के बीच सरकार ने 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है। हालांकि, छात्रों की सभी मांगें पूरी नहीं होने के कारण आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि केवल एक परीक्षा पर फैसला लेने से भर्ती परीक्षाओं से जुड़े व्यापक सवालों का समाधान नहीं होगा। इसी वजह से आंदोलन जारी है और छात्र अन्य मांगों पर भी सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन में राजनीतिक समर्थन बढ़ा
JPSC-JSSC आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं की सक्रियता भी बढ़ी है। इससे पहले BJP समेत विपक्षी नेताओं ने भी छात्रों की मांगों का समर्थन किया है। अब रघुवर दास के धरनास्थल पहुंचने और एक सप्ताह बाद अनशन की चेतावनी देने से मामला और राजनीतिक रूप ले सकता है।
हालांकि, छात्रों का आंदोलन मूल रूप से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, जांच और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर है।
अब सरकार के सामने क्या चुनौती?
रघुवर दास के एक सप्ताह के अल्टीमेटम के बाद सरकार के सामने छात्रों की लंबित मांगों पर स्पष्ट रुख रखने की चुनौती है। एक ओर सरकार पहले ही कुछ मांगों पर कार्रवाई का दावा कर चुकी है, वहीं आंदोलनकारी अभ्यर्थी स्वतंत्र जांच और अन्य मुद्दों पर ठोस निर्णय चाहते हैं।
अब आने वाले दिनों में सरकार और छात्रों के बीच बातचीत तथा किसी नए फैसले पर सबकी नजर रहेगी। अगर एक सप्ताह के भीतर समाधान नहीं निकलता है, तो रघुवर दास की घोषित अनशन की कार्रवाई आंदोलन को नया राजनीतिक आयाम दे सकती है।
निष्कर्ष
JPSC-JSSC छात्र आंदोलन के बीच रघुवर दास का छात्रों के समर्थन में उतरना झारखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। उन्होंने छात्रों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने के लिए सरकार को एक सप्ताह का समय दिया है और समाधान नहीं होने पर बिरसा मुंडा समाधि स्थल पर अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है।
अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार छात्रों की लंबित मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या रघुवर दास के अल्टीमेटम से पहले आंदोलन को लेकर कोई सहमति बन पाती है।
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