उग्रवाद के खिलाफ अभियान : झारखंड में उग्रवाद के खिलाफ चलाए जा रहे लगातार सुरक्षा अभियानों के बीच राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने स्थिति में सुधार का दावा किया है। DGP के अनुसार, लगातार anti-extremism operations, intelligence-based कार्रवाई, सुरक्षा बलों की मौजूदगी, बेहतर infrastructure और स्थानीय लोगों के सहयोग से राज्य में उग्रवादी गतिविधियों को काफी कमजोर करने में सफलता मिली है।
पुलिस के मुताबिक, लंबे समय से उग्रवाद प्रभावित रहे कई इलाकों में अब सामान्य गतिविधियां बढ़ी हैं और लोगों में सुरक्षा को लेकर भरोसा मजबूत हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति में केवल ऑपरेशन ही नहीं, बल्कि सड़क और अन्य infrastructure का विस्तार, स्थानीय intelligence network को मजबूत करना तथा आत्मसमर्पण के लिए प्रोत्साहित करना भी शामिल है।
लगातार Anti-Extremism Operations से कमजोर हुआ नेटवर्क
झारखंड में उग्रवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई लंबे समय से जारी है। राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में targeted operations किए जा रहे हैं।
DGP के अनुसार, इन लगातार अभियानों का असर उग्रवादी संगठनों की operational क्षमता पर पड़ा है। कई प्रमुख उग्रवादी नेताओं और सदस्यों के मारे जाने, गिरफ्तार होने या आत्मसमर्पण करने से संगठनात्मक नेटवर्क कमजोर हुआ है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती केवल जंगलों में अभियान चलाना नहीं है। उग्रवाद प्रभावित इलाकों में स्थानीय नेटवर्क, आवाजाही, हथियारों की आपूर्ति और संगठन की सूचना प्रणाली को कमजोर करना भी महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में intelligence-based operations पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
Intelligence-Based Action बना अहम हथियार
उग्रवाद के खिलाफ अभियान में intelligence यानी खुफिया जानकारी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। सुरक्षा बलों को किसी क्षेत्र में उग्रवादियों की मौजूदगी, उनकी आवाजाही और संभावित गतिविधियों के बारे में समय पर जानकारी मिलने पर अभियान को अधिक targeted बनाया जा सकता है।
झारखंड पुलिस ने स्थानीय intelligence network और informer system को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। फरवरी 2026 में DGP की एक high-level review meeting में anti-Naxal operations को तेज करने के साथ local intelligence networks, informer systems और digital surveillance mechanisms को मजबूत करने के निर्देश दिए गए थे।
इस रणनीति का उद्देश्य बड़े पैमाने पर अभियान चलाने के बजाय उपलब्ध जानकारी के आधार पर उन स्थानों और लोगों पर ध्यान केंद्रित करना है, जहां उग्रवादी गतिविधियों की आशंका अधिक है।
Security Forces की मौजूदगी से बदली तस्वीर
उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की स्थायी या नियमित मौजूदगी भी इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। पहले जिन इलाकों में सुरक्षा बलों की पहुंच सीमित थी, वहां camp और road connectivity बढ़ने से प्रशासन की पहुंच बेहतर हुई है।
सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस और प्रशासन तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। इससे लोगों को शिकायत दर्ज कराने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और सामान्य आर्थिक गतिविधियां शुरू करने में भी मदद मिलती है।
DGP ने भी infrastructure development और public cooperation को उग्रवाद कमजोर होने के महत्वपूर्ण कारणों में शामिल किया है।
Infrastructure Development का भी असर
उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़क और connectivity केवल विकास का मुद्दा नहीं है, बल्कि security के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
बेहतर सड़कें बनने से:
- सुरक्षा बलों की आवाजाही आसान होती है।
- मेडिकल और emergency services तक पहुंच बढ़ती है।
- प्रशासनिक अधिकारियों का ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचना आसान होता है।
- स्कूल और बाजार जैसी सामान्य गतिविधियां बेहतर तरीके से संचालित हो सकती हैं।
- ग्रामीण इलाकों को मुख्य शहरों और कस्बों से जोड़ना आसान होता है।
इसलिए anti-extremism strategy में security operation के साथ development को जोड़ना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जनता का सहयोग क्यों है महत्वपूर्ण?
किसी भी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों के लिए स्थानीय लोगों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है। स्थानीय लोग क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, संदिग्ध गतिविधियों और स्थानीय परिस्थितियों से परिचित होते हैं।
DGP के अनुसार, public cooperation ने भी उग्रवाद को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जब स्थानीय लोगों का भरोसा पुलिस और प्रशासन पर बढ़ता है, तो वे संदिग्ध गतिविधियों के बारे में जानकारी देने में अधिक सहज हो सकते हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों को ground-level intelligence प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, ऐसे इलाकों में सुरक्षा और विश्वास का माहौल बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है, ताकि आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
कई इलाकों में लौटी सामान्य स्थिति
DGP के अनुसार, राज्य के कई ऐसे इलाके जो पहले उग्रवाद के लिए संवेदनशील माने जाते थे, वहां अब सामान्य स्थिति वापस आई है। पुलिस का कहना है कि लगातार अभियानों से उग्रवादी संगठनों की क्षमता कमजोर हुई है और आम लोगों का confidence बढ़ा है।
इस बदलाव का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ सकता है। जब किसी इलाके में सुरक्षा स्थिति बेहतर होती है तो स्कूल, बाजार, transport और सरकारी सेवाओं का संचालन ज्यादा नियमित तरीके से हो सकता है।
हालांकि पूरे राज्य को उग्रवाद मुक्त घोषित करना और किसी क्षेत्र में स्थिति में सुधार के बीच अंतर है। कुछ इलाकों में अभी भी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहना पड़ता है।
Surrender Policy भी रणनीति का हिस्सा
उग्रवाद के खिलाफ केवल सुरक्षा कार्रवाई ही नहीं, बल्कि surrender और rehabilitation की रणनीति भी महत्वपूर्ण है।
जो लोग उग्रवादी संगठनों से अलग होकर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए surrender policy एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराती है। जून 2026 में झारखंड में Operation Navjeevan के तहत CPI (Maoist) और JJMP से जुड़े लोगों के आत्मसमर्पण की खबर सामने आई थी। इस पहल में surrender, rehabilitation और mainstream reintegration पर जोर दिया गया।
ऐसी नीतियों का उद्देश्य उन लोगों को हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने का अवसर देना है, जो संगठन से अलग होना चाहते हैं।
युवाओं और ग्रामीणों के लिए क्या बदल सकता है?
उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति बेहतर होने का सीधा असर युवाओं और ग्रामीण आबादी पर पड़ सकता है।
यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय तक हिंसा या सुरक्षा संबंधी समस्या रहती है, तो वहां रोजगार, शिक्षा, business और infrastructure projects प्रभावित हो सकते हैं।
सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद:
- सरकारी योजनाओं का implementation बेहतर हो सकता है।
- स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच बढ़ सकती है।
- सड़क निर्माण और अन्य development projects तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।
- स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।
- युवाओं के लिए employment और skill development के अवसर बढ़ सकते हैं।
इसलिए anti-extremism campaign का उद्देश्य केवल सुरक्षा बहाल करना नहीं बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य सामाजिक और आर्थिक जीवन को मजबूत करना भी है।
अभी भी बनी हुई है चुनौती
हालांकि पुलिस ने स्थिति में सुधार की बात कही है, लेकिन उग्रवाद के खिलाफ अभियान को पूरी तरह समाप्त मानना जल्दबाजी होगी।
जंगल और दुर्गम इलाकों में सुरक्षा चुनौतियां बनी रह सकती हैं। इसके अलावा उग्रवादी संगठनों के बचे हुए छोटे नेटवर्क, हथियारों की उपलब्धता और underground support systems सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती हो सकते हैं।
इसी वजह से पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां intelligence gathering और targeted operations को जारी रखने पर जोर दे रही हैं।
आगे की रणनीति क्या होगी?
झारखंड में उग्रवाद के खिलाफ आने वाले समय में सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर काम जारी रहने की संभावना है।
पुलिस की रणनीति में मुख्य रूप से:
- Intelligence network मजबूत करना
- Targeted anti-extremism operations जारी रखना
- Security forces और state police के बीच coordination बढ़ाना
- प्रभावित इलाकों में infrastructure सुधारना
- स्थानीय लोगों का विश्वास और सहयोग बढ़ाना
- Surrender और rehabilitation को प्रोत्साहित करना
- सामान्य प्रशासनिक गतिविधियों को मजबूत करना
जैसे कदम महत्वपूर्ण रहेंगे।
निष्कर्ष
झारखंड में उग्रवाद के खिलाफ अभियान को लेकर DGP का कहना है कि लगातार security operations, बेहतर infrastructure, intelligence-based कार्रवाई और जनता के सहयोग से स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। पुलिस के अनुसार कई पुराने उग्रवाद प्रभावित इलाकों में सामान्य स्थिति लौटने लगी है और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से extremist groups की क्षमता कमजोर हुई है।
हालांकि, चुनौती पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। आने वाले समय में security operations के साथ development, public trust और rehabilitation को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा। यदि सुरक्षा और विकास की दोनों रणनीतियां लगातार प्रभावी तरीके से आगे बढ़ती हैं, तो झारखंड के प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय के लिए स्थिरता और सामान्य जीवन को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
नोट: उग्रवाद की स्थिति और सुरक्षा अभियानों से जुड़े आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं। इस लेख में DGP के हालिया बयान और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर स्थिति बताई गई है।







