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Jharkhand Reading Campaign 2026: 34 हजार सरकारी स्कूलों तक पहुंचा पढ़ने का अभियान, बच्चों में विकसित होगी | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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झारखंड के सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ने की क्षमता, समझ और भाषा कौशल को मजबूत करने के लिए Jharkhand Reading Campaign 2026 को बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) की ओर से शुरू किया गया यह महीने भर का अभियान राज्य के करीब 34,000 सरकारी प्राथमिक स्कूलों तक पहुंच चुका है। अभियान का उद्देश्य बच्चों में किताब पढ़ने की आदत विकसित करना और पढ़ने को केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित न रखते हुए उसे आनंददायक गतिविधि बनाना है।

इस साल अभियान की थीम “My Words, My Story” यानी “मेरे शब्द, मेरी कहानी” रखी गई है। इसके तहत बच्चों को Read Aloud, Shared Reading, Story Writing, Storytelling, Reading Buddy, 100-Word Story Challenge और Read-a-Thon जैसी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब स्कूल शिक्षा में Foundational Literacy and Numeracy (FLN) को बच्चों की आगे की पढ़ाई की बुनियाद माना जा रहा है। सरकार और शिक्षा विभाग का जोर अब केवल बच्चों के स्कूल आने पर नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर भी है कि बच्चे अपनी कक्षा के अनुरूप पढ़, समझ और अपनी बात व्यक्त कर सकें।

Jharkhand Reading Campaign 2026 क्या है?

Jharkhand Reading Campaign 2026 झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा सरकारी स्कूलों में बच्चों के बीच reading culture विकसित करने के लिए चलाया जा रहा राज्यव्यापी अभियान है।

इस वर्ष अभियान को “My Words, My Story” थीम के साथ शुरू किया गया है। JEPC ने 16 अगस्त 2026 को महीने भर चलने वाले इस अभियान की शुरुआत की थी। इसमें राज्यभर के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को अलग-अलग reading activities में शामिल किया जा रहा है।

अभियान का उद्देश्य बच्चों को सिर्फ किताब पढ़ने के लिए कहना नहीं है, बल्कि उन्हें कहानी सुनने, पढ़ने, अपनी कहानी लिखने, दूसरों के साथ पढ़ने और पढ़ी गई चीजों पर चर्चा करने के अवसर देना है।

इससे reading एक classroom activity के बजाय बच्चों के लिए रोजमर्रा के learning experience का हिस्सा बन सकती है।

34 हजार सरकारी स्कूलों तक पहुंचा अभियान

Jharkhand Reading Campaign 2026 का सबसे बड़ा पहलू इसका व्यापक coverage है।

ताजा जानकारी के अनुसार अभियान करीब 34,000 सरकारी प्राथमिक स्कूलों में चल रहा है। 19 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक हर दिन लगभग 25,000 से 29,000 स्कूल अभियान की गतिविधियों में भाग ले रहे थे। उसी दिन 21,000 से अधिक स्कूलों में “Read Aloud” activity आयोजित की गई।

इससे पता चलता है कि अभियान को केवल राज्य या जिला स्तर पर कार्यक्रम के रूप में नहीं रखा गया है, बल्कि इसे स्कूल स्तर तक ले जाने की कोशिश की जा रही है।

East Singhbhum, Dhanbad, Ranchi और Lohardaga को बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों में बताया गया है।

अभियान की थीम ‘My Words, My Story’ क्यों खास है?

My Words, My Story का उद्देश्य बच्चों को अपनी भाषा और अनुभवों से जोड़ते हुए पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करना है।

हर बच्चा केवल textbook से सीखने वाला विद्यार्थी नहीं है। उसके पास अपने घर, गांव, शहर, परिवार, त्योहार, प्रकृति और स्थानीय संस्कृति से जुड़ी अपनी कहानियां होती हैं।

अगर बच्चों को इन अनुभवों को पढ़ने और लिखने का अवसर दिया जाए, तो वे learning process में ज्यादा सक्रिय रूप से शामिल हो सकते हैं।

इसी कारण अभियान में स्थानीय भाषा, संस्कृति और बच्चों के अपने अनुभवों को भी महत्व दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार activities का उद्देश्य linguistic competence और self-expression को मजबूत करना है।

बच्चों के लिए कौन-कौन सी गतिविधियां होंगी?

Jharkhand Reading Campaign 2026 में कई तरह की interactive activities शामिल की गई हैं।

1. Read Aloud

Read Aloud यानी शिक्षक या विद्यार्थी कहानी को जोर से पढ़ते हैं।

इस activity में बच्चे केवल शब्दों को पढ़ते नहीं हैं, बल्कि pronunciation, pause, expression और listening skills पर भी ध्यान देते हैं।

ताजा अभियान में 21,000 से ज्यादा स्कूलों में Read Aloud activity आयोजित होने की जानकारी सामने आई है।

2. Shared Reading

Shared Reading में शिक्षक और बच्चे मिलकर कहानी या किताब पढ़ते हैं।

इससे कमजोर reading skills वाले बच्चों को भी साथियों और शिक्षक से सीखने का अवसर मिलता है।

बच्चे एक-दूसरे की reading सुन सकते हैं और कठिन शब्दों को समझ सकते हैं।

3. Reading Buddy

अभियान में Reading Buddy activity भी शुरू की गई है।

इसमें बड़े बच्चे छोटे बच्चों के साथ reading activity में भाग लेते हैं। वे छोटी कक्षा के बच्चों को कहानी पढ़ने, सुनने और उस पर बातचीत करने में मदद करते हैं। यह गतिविधि 7 सितंबर तक जारी रहने की जानकारी दी गई है।

इससे दो स्तरों पर फायदा हो सकता है।

बड़े बच्चों में communication और leadership skills विकसित होती हैं, जबकि छोटे बच्चों को पढ़ने के लिए एक साथी मिलता है।

4. 100-Word Story Challenge

बच्चों के लिए 100 शब्दों की कहानी लिखने की चुनौती भी अभियान का हिस्सा है।

यह activity reading के साथ writing skill को भी जोड़ती है।

बच्चे अपनी कल्पना से छोटी कहानी लिख सकते हैं और उसे अपने सहपाठियों या शिक्षक के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं।

इससे vocabulary, sentence formation, imagination और confidence विकसित करने में मदद मिल सकती है।

5. Storytelling

Storytelling बच्चों को पढ़ी गई कहानी को अपने शब्दों में बताने का अवसर देता है।

इससे यह समझने में भी मदद मिलती है कि बच्चे ने कहानी को वास्तव में समझा है या केवल उसे पढ़ा है।

Storytelling के माध्यम से बच्चे characters, घटनाओं और कहानी के संदेश को अपनी भाषा में व्यक्त कर सकते हैं।

6. Children Podcasts

अभियान में children podcasts जैसी आधुनिक गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।

यह reading और communication को digital माध्यम से जोड़ने का प्रयास है।

बच्चे कहानी पढ़कर उसे अपनी आवाज में प्रस्तुत कर सकते हैं या किसी विषय पर अपनी बात रख सकते हैं।

इससे public speaking और communication skills को बढ़ावा मिल सकता है।

7. QR Code Story Walls

अभियान में QR Code Story Walls भी शामिल हैं।

इसका उद्देश्य technology को reading activities के साथ जोड़ना है।

बच्चे QR code के माध्यम से stories या reading resources तक पहुंच सकते हैं। इससे traditional books के साथ digital learning resources का इस्तेमाल भी बढ़ सकता है।

8. Read-a-Thon

Read-a-Thon अभियान की प्रमुख activities में से एक है।

इसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी एक साथ reading activity में हिस्सा लेते हैं।

झारखंड में 2025 के reading campaign के दौरान लगभग 7 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया था और इस अभियान को national record recognition मिलने की जानकारी भी सामने आई थी।

इस वर्ष भी Read-a-Thon के माध्यम से बच्चों को सामूहिक रूप से पढ़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

बच्चों की Reading Skills क्यों जरूरी हैं?

Reading केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के लिए जरूरी नहीं है।

अगर बच्चा अच्छी तरह पढ़ सकता है तो वह:

  • सवालों को बेहतर समझ सकता है
  • नई जानकारी सीख सकता है
  • निर्देशों को आसानी से समझ सकता है
  • अपनी भाषा में विचार व्यक्त कर सकता है
  • कहानी और घटनाओं को जोड़ सकता है
  • नई vocabulary सीख सकता है
  • दूसरे subjects में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है

इसलिए reading ability को पूरी education system की foundation माना जाता है।

JEPC के अधिकारियों ने भी कहा है कि नियमित reading से learning outcomes, comprehension और बच्चों के confidence को मजबूत किया जा सकता है।

केवल Textbook Reading पर नहीं रहेगा जोर

Jharkhand Reading Campaign का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बच्चों को textbook से बाहर की किताबें पढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कहानी, कविता, कॉमिक, स्थानीय साहित्य और बच्चों की रुचि से जुड़ी किताबें reading habit विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

JEPC के अधिकारियों ने भी सरकारी स्कूलों में libraries के उपयोग और बच्चों को अपनी पसंद की किताबें पढ़ने के अवसर देने पर जोर दिया है।

इसका उद्देश्य यह है कि बच्चा पढ़ने को homework या परीक्षा की तैयारी के रूप में नहीं बल्कि joyful learning के रूप में देखे।

School Libraries की भूमिका बढ़ेगी

Reading Campaign के साथ सरकारी स्कूलों की libraries का उपयोग भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

अगर स्कूल में किताबें उपलब्ध हैं लेकिन बच्चे उन्हें पढ़ते नहीं हैं, तो library का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।

इसलिए campaign के दौरान बच्चों को:

  • library visit
  • book selection
  • story reading
  • group reading
  • book discussion
  • storytelling

जैसी activities से जोड़ा जा सकता है।

2025 के campaign के बाद JEPC ने सरकारी स्कूलों में libraries के उपयोग की लगातार निगरानी पर भी जोर दिया था।

Local Language को भी मिलेगा महत्व

झारखंड भाषाई और सांस्कृतिक विविधता वाला राज्य है।

यहां अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं और बोलियों का इस्तेमाल होता है। ऐसे में बच्चों को केवल एक भाषा के माध्यम से सीखने के बजाय उनकी स्थानीय linguistic background को भी ध्यान में रखना उपयोगी हो सकता है।

Reading Campaign में local-language literature को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार स्थानीय भाषा की साहित्यिक सामग्री बच्चों को अपनी संस्कृति और पहचान से जोड़ने में मदद कर सकती है।

इससे tribal और regional communities के बच्चों के लिए learning ज्यादा familiar और engaging बन सकती है।

बच्चों में Confidence कैसे बढ़ेगा?

कई बच्चे classroom में सवाल पूछने या सबके सामने बोलने में झिझकते हैं।

Reading, storytelling और role-based activities उन्हें अपनी बात कहने का सुरक्षित अवसर देती हैं।

जब बच्चा कहानी को अपने शब्दों में सुनाता है, तो उसे:

सोचना → समझना → शब्द चुनना → बोलना

इन चारों प्रक्रियाओं का अभ्यास होता है।

यही skills आगे चलकर school education, competitive exams और professional life में भी उपयोगी होती हैं।

Teachers की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण

Reading Campaign की सफलता केवल activities की संख्या पर निर्भर नहीं करेगी।

इसमें teachers की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

शिक्षकों को यह देखना होगा कि:

  • कौन बच्चा fluently पढ़ रहा है?
  • किस बच्चे को pronunciation में समस्या है?
  • कौन शब्दों का अर्थ नहीं समझ पा रहा?
  • कौन कहानी पढ़कर उसका मतलब नहीं बता पा रहा?
  • कौन बच्चा बोलने में झिझक रहा है?
  • किस बच्चे को अतिरिक्त reading practice की जरूरत है?

इन observations के आधार पर बच्चों को अलग-अलग स्तर की सहायता दी जा सकती है।

Parents भी बन सकते हैं Reading Partner

Reading habit केवल स्कूल में नहीं बनती।

अगर घर पर भी माता-पिता बच्चों के साथ रोज कुछ समय किताब पढ़ें तो इसका असर ज्यादा स्थायी हो सकता है।

माता-पिता बच्चों से:

  • आज क्या पढ़ा?
  • कहानी में कौन था?
  • तुम्हें कौन-सा character पसंद आया?
  • कहानी का अंत क्या था?
  • तुम होते तो क्या करते?

जैसे सवाल पूछ सकते हैं।

इससे reading comprehension और communication दोनों बेहतर हो सकते हैं।

Mobile के दौर में Books की जरूरत क्यों?

आज बच्चों के पास smartphone, television और digital content के कई विकल्प हैं।

Digital learning के अपने फायदे हैं, लेकिन लंबे समय तक focused reading की आदत अलग skill है।

JEPC अधिकारियों ने भी इस बात पर जोर दिया है कि मोबाइल से देखकर सीखने और स्वयं पढ़कर सीखने में अंतर होता है। कहानी की किताबें बच्चों के social, emotional और life skills development में भूमिका निभा सकती हैं।

इसलिए Reading Campaign का उद्देश्य technology को हटाना नहीं, बल्कि books और meaningful digital resources दोनों के बीच संतुलन बनाना है।

Jharkhand Reading Campaign 2026 से क्या उम्मीद?

अभियान से तत्काल परिणाम के बजाय long-term improvement की उम्मीद की जा रही है।

यदि स्कूलों में नियमित reading practice जारी रहती है तो बच्चों में धीरे-धीरे:

  • reading fluency
  • vocabulary
  • comprehension
  • storytelling
  • writing
  • confidence
  • logical thinking

जैसी क्षमताओं में सुधार हो सकता है।

लेकिन इसके लिए campaign खत्म होने के बाद भी reading activities को जारी रखना जरूरी होगा।

2025 के अभियान से मिली सीख

झारखंड में reading campaign पहली बार नहीं चल रहा है।

2025 में “My Book, My Story” अभियान के तहत 35,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में बच्चों को reading activities से जोड़ा गया था। उस अभियान में 24 जिलों के 7 लाख से अधिक बच्चों की भागीदारी की जानकारी सामने आई थी।

2026 का अभियान इसी broader reading movement को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

इससे यह संकेत मिलता है कि reading को केवल एक महीने की activity न रखकर स्कूल education में नियमित habit बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

Jharkhand Education में NIPUN Bharat से कनेक्शन

Reading Campaign को Foundational Literacy and Numeracy (FLN) के broader objective से भी जोड़कर देखा जा सकता है।

NIPUN Bharat का उद्देश्य बच्चों में foundational literacy और numeracy को मजबूत करना है।

Reading ability इसमें केंद्रीय भूमिका निभाती है क्योंकि अगर बच्चा सवाल या instruction ही नहीं पढ़ पाता तो दूसरे subjects को समझना भी कठिन हो सकता है।

NITI Aayog की 2026 school education report में भी foundational learning को आगे की educational progress की बुनियाद बताया गया है।

कौन-कौन से जिले बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं?

19 अगस्त की उपलब्ध जानकारी के अनुसार East Singhbhum, Dhanbad, Ranchi और Lohardaga बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल थे।

हालांकि campaign अभी जारी है, इसलिए जिलों की participation और performance आगे बदल सकती है।

JEPC exemplary district practices को showcase करने की योजना भी रखता है, ताकि एक जिले की अच्छी गतिविधियों को दूसरे जिलों के स्कूलों में अपनाया जा सके।

अभियान की अवधि कितनी है?

2026 का reading campaign 16 अगस्त से शुरू हुआ और यह 18 सितंबर 2026 तक चलने वाला है।

इस दौरान अलग-अलग activities को चरणबद्ध तरीके से स्कूलों में आयोजित किया जा रहा है।

अभियान की अवधि के दौरान school-level participation के साथ district-level monitoring पर भी जोर रहेगा।

Jharkhand Reading Campaign 2026: एक नजर में

जानकारीविवरण
अभियानJharkhand Reading Campaign 2026
थीमMy Words, My Story
शुरुआत16 अगस्त 2026
अवधि18 सितंबर 2026 तक
प्रमुख संस्थाJharkhand Education Project Council (JEPC)
स्कूलकरीब 34,000 सरकारी प्राथमिक स्कूल
लक्ष्यReading habit और foundational literacy
प्रमुख गतिविधियांRead Aloud, Shared Reading, Reading Buddy
अन्य गतिविधियांStory Writing, Storytelling, QR Story Walls, Podcasts
विशेष गतिविधि100-Word Story Challenge, Read-a-Thon
प्रमुख जिलेEast Singhbhum, Dhanbad, Ranchi, Lohardaga बेहतर प्रदर्शन में
लक्षित प्रभावFluency, comprehension, vocabulary, confidence और logical thinking

Official Website

Jharkhand Education Project Council (JEPC):
JEPC Official Website

Jharkhand School Education & Literacy Department:
Jharkhand School Education Department

अभियान से संबंधित official circular, school instructions और education updates के लिए सरकारी portals को प्राथमिक स्रोत माना जाना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Jharkhand Reading Campaign 2026 क्या है?

यह झारखंड के सरकारी स्कूलों में बच्चों की reading habit और foundational literacy को मजबूत करने के लिए JEPC द्वारा चलाया जा रहा राज्यव्यापी अभियान है। 2026 अभियान की थीम “My Words, My Story” है।

Jharkhand Reading Campaign 2026 कितने स्कूलों में चल रहा है?

ताजा जानकारी के अनुसार अभियान करीब 34,000 सरकारी प्राथमिक स्कूलों तक पहुंच चुका है।

Jharkhand Reading Campaign 2026 कब तक चलेगा?

अभियान 16 अगस्त से 18 सितंबर 2026 तक चलने वाला है।

Reading Campaign का मुख्य उद्देश्य क्या है?

मुख्य उद्देश्य बच्चों में reading habit विकसित करना, reading fluency और comprehension सुधारना तथा बच्चों को confident readers और communicators बनने में मदद करना है।

Reading Campaign में कौन-कौन सी activities होंगी?

Read Aloud, Shared Reading, Reading Buddy, 100-Word Story Challenge, QR Code Story Walls, Children’s Podcasts और Read-a-Thon जैसी गतिविधियां अभियान का हिस्सा हैं।

Reading Buddy Activity क्या है?

इसमें बड़े बच्चों को छोटे बच्चों के साथ जोड़ा जाता है। वे छोटे बच्चों के साथ कहानी पढ़ते, सुनते और उस पर चर्चा करते हैं।

क्या अभियान में स्थानीय भाषाओं की किताबें भी शामिल हैं?

हां। अभियान में local-language literature को महत्व देने की बात कही गई है, ताकि बच्चे अपनी संस्कृति और स्थानीय अनुभवों से जुड़ी reading सामग्री से भी सीख सकें।

क्या यह केवल प्राथमिक कक्षा के बच्चों के लिए है?

अभियान का मुख्य फोकस सरकारी प्राथमिक स्कूलों और शुरुआती grades की reading skills पर है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट में higher classes के विद्यार्थियों की participation भी दर्ज की गई है।

Jharkhand Reading Campaign 2026 किस विभाग द्वारा चलाया जा रहा है?

इसे Jharkhand Education Project Council (JEPC) द्वारा Department of School Education and Literacy, Government of Jharkhand के तहत चलाया जा रहा है।

निष्कर्ष

Jharkhand Reading Campaign 2026 झारखंड के सरकारी स्कूलों में reading culture को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण education initiative बनकर सामने आया है। करीब 34,000 सरकारी प्राथमिक स्कूलों तक इसकी पहुंच और रोजाना हजारों स्कूलों में activities का आयोजन इसकी व्यापकता को दिखाता है।

“My Words, My Story” की थीम के तहत बच्चों को सिर्फ किताब पढ़ने तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उन्हें कहानी सुनाने, लिखने, अपनी बात कहने, साथियों के साथ पढ़ने और स्थानीय भाषा व संस्कृति से जुड़ने का अवसर दिया जा रहा है।

Read Aloud, Reading Buddy, 100-Word Story Challenge, QR Code Story Walls, Children’s Podcasts और Read-a-Thon जैसी गतिविधियां reading को classroom की routine activity से निकालकर joyful learning experience बनाने का प्रयास हैं।

2025 के अभियान में 35,000 से अधिक स्कूलों और 7 लाख से अधिक बच्चों की भागीदारी के बाद 2026 में भी इस reading movement को आगे बढ़ाया जा रहा है।

हालांकि किसी भी campaign की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि 18 सितंबर के बाद भी बच्चे नियमित रूप से किताबें पढ़ते हैं या नहीं। यदि schools, teachers, parents और communities मिलकर reading को रोज की आदत बनाते हैं, तो इसका असर बच्चों की comprehension, vocabulary, writing, communication और overall learning पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।

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Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
मनीष सिंह चन्देल रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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