रांची (झारखंड) — देश की आज़ादी के आंदोलन में अपने साहस, त्याग और अदम्य राष्ट्रप्रेम से अमिट छाप छोड़ने वाले पंजाब केसरी लाला लाजपत राय जी की 161वीं जयंती आज राजधानी रांची में श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रीय एकता के भाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर महात्मा गांधी मार्ग स्थित लाला लाजपत राय चौक पर एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पहली बार पंजाबी हिंदू बिरादरी, सिख समाज एवं अन्य वर्गों के लोग एक साथ बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम के महानायक को नमन किया, बल्कि सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय चेतना का भी सशक्त संदेश दिया।
सुबह से ही लाला लाजपत राय चौक पर लोगों का जुटना शुरू हो गया था। जैसे-जैसे समय बढ़ता गया, चौक पर देशभक्ति की भावना और उत्साह का वातावरण गहराता चला गया। उपस्थित लोगों ने लाला लाजपत राय जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम” और “लाला लाजपत राय अमर रहें” जैसे गगनभेदी नारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। नारे केवल शब्द नहीं थे, बल्कि वे उस त्याग और संघर्ष की याद दिला रहे थे, जिसने भारत को आज़ादी दिलाई।
इस ऐतिहासिक अवसर पर पंजाबी हिंदू बिरादरी के महासचिव राजेश मेहरा के साथ-साथ राजेश खन्ना, रणदीप आनंद, अरुण चावला, रवि पराशर, कुणाल अजमानी, देवेश अजमानी, मदन सेन कुजारा, आशीष भाटिया, अजय सखूजा, अशोक माकन, दीपक खोसला, राकेश जग्गी, पृथ्वीराज भाटिया, हरजीत जग्गी, प्रवीण जग्गी, विजय खन्ना, प्रवीण आनंद, सूरज छाबड़ा, अश्विनी मोहन, वीरेंद्र कैंथ, प्रोफेसर हरविंदर वीर सिंह, अजीत सिंह जग्गी, विनोद सलूजा, वेद प्रकाश बुद्धिराजा, प्रशांत गौरव, दीपेश पाठक, विकास सिंह, बिरसा तिर्की सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लाला लाजपत राय भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन स्तंभों में से एक थे, जिन्होंने अंग्रेज़ी हुकूमत के अत्याचारों के सामने कभी घुटने नहीं टेके। उन्होंने न केवल विदेशी शासन के खिलाफ संघर्ष किया, बल्कि समाज सुधार, शिक्षा और राष्ट्रीय जागरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने स्वतंत्रता संग्राम के दौर में थे। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को लाला जी के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने जलियांवाला बाग कांड के बाद लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज और उनके बलिदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लाला जी ने अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई और देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श है। उनके बलिदान ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा दी।
इस आयोजन की एक विशेष बात यह रही कि इसमें विभिन्न समुदायों के लोगों ने एकजुट होकर भाग लिया। पंजाबी हिंदू बिरादरी और सिख समाज के साथ-साथ अन्य वर्गों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि देश की आज़ादी किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि सभी भारतीयों की साझा विरासत है। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में जब समाज में विभाजन की कोशिशें होती रहती हैं, ऐसे कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित कई लोगों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि रांची में इस तरह का आयोजन होना गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि लाला लाजपत राय जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों की जयंती केवल औपचारिक कार्यक्रम न बनकर, एक जन आंदोलन की तरह मनाई जानी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी को अपने इतिहास और बलिदानों की सही जानकारी मिल सके। कुछ वक्ताओं ने यह भी सुझाव दिया कि स्कूलों और कॉलेजों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर छात्रों को स्वतंत्रता संग्राम के नायकों से जोड़ा जाए।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और गरिमा का विशेष ध्यान रखा गया। आयोजन स्थल को सादगीपूर्ण तरीके से सजाया गया था और प्रतिमा के चारों ओर पुष्पों की आकर्षक सजावट की गई थी। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने का संकल्प लिया।
आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में भी लाला लाजपत राय की जयंती को और व्यापक स्तर पर मनाया जाएगा। इसके माध्यम से समाज में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और देश के लिए कुछ करने की भावना को मजबूत किया जाएगा। आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही ऐसे कार्यक्रम सफल होते हैं।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और देशभक्ति के नारों के साथ हुआ। जैसे ही लोग आयोजन स्थल से लौटे, उनके मन में लाला लाजपत राय के त्याग, संघर्ष और बलिदान की गूंज बनी रही। रांची में आयोजित यह श्रद्धांजलि सभा न केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी को नमन थी, बल्कि यह संदेश भी थी कि भारत की आत्मा आज भी अपने नायकों को याद करती है और उनके दिखाए रास्ते पर चलने के लिए संकल्पित है।




